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अपनी हार का मंथन कर रहे हम : अखिलेश

निजी कार्यक्रम में आये अखिलेश ने घूमा झांसी का किला

झांसी। झांसी का ऐतिहासिक किला घूमने आये पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए डिफेंस कार्यक्रम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश में सबसे अधिक आर्मी स्कूल खुलवाये हैं। झांसी में आर्मी स्कूल दिया है। उन्होंने केन्द्र की भाजपा सरकार पर सीधे प्रहार करते हुए कहा कि आज देश के जवानों के सिर कलम किये जा रहे हैं। सरकार क्या कर रही है हमारे देश के सपूत जवान सीमा पर आंतकियों की गोली खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमा पर शहीद जवानों में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश बिहार और दक्षिण भारत के हैं। क्या आप ने कभी सुना है कि गुजरात का जवान शहीद हुआ है। आज पीएम मोदी का 56 इंच का सीना कहां गया। देश में शहीदो और वंदेमातरम पर राजनीति की जा रही है।

किले में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि वह अपनी हार से निराश नहीं बल्कि खुश हैं। इस समय वह घूम कर शादियां अटेंड कर रहे है। इस बहाने लोगों से मुलाकात भी हो रही है। या यह समझइये कि यह मेरी जानकारी यात्रा है। मैं लोगों के बीच यही जानने का प्रयास कर रहा हूं कि आखिर जनता हमसे दूर क्यों हो गई। कहा खामियां रही है जबकि प्रदेश में सपा की सरकार ने जितना काम किया किसी ने नहीं किया। सड़कें बनाई और झांसी में प्लाईओवर दिया। आज हमारी सरकार नहीं है। मध्य प्रदेश में चुनाव के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि एमपी में विधान सभा चुनाव समाजवादी पार्टी लड़ेगी। अभी यह कह पाना कठिन होगा कि किससे गठबंधन किया जाएगा। बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन के सवाल अखिलेश यादव ने कहा कि अभी हम खुद सदस्यता अभियान चला रहे हैं। संगठन की मजबूती पर ध्यान दे रहे हैं। अधिक से अधिक सदस्य बनाये जा रहे हैं। लोग नेट के जरिये भी सदस्य बन रहे हैं। हमारा फोकस अधिक सदस्य बनाना है। गठबंधन की बात बाद में देखी जाएगी। इस अवसर पर संत सिंह सेरसा, गरौठा से पूर्व विधायक दीपनारायण सिंह यादव, राकेश पाल, समेत कई नेता मौजूद रहे।

गर्मी से परेशान भी रहे
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी फैमिली के साथ झांसी फोर्ट पहुंचे थे। उनके साथ पत्नी सांसद डिंपल यादव और तीनों बच्चे टीना, अर्जुन और अदिति भी थे। इस दौरान सभी गर्मी से परेशान दिखे। इनके किले में जाते ही बाकी पर्यटकों को गेट के बाहर ही रोक दिया गया। जब तक ये लोग वहां से निकल नहीं गए तब तक पर्यटक बाहर ही खड़े रहे। किला देखने के बाद वे दतिया को रवाना हो गये।

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