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पंजीयक विभाग को इंदौर-उज्जैन से करोड़ों के राजस्व का घाटा

इंदौर। गाइड लाइनों की दरें मनमाने तरीके से बढ़ाए जाने व ई-संपदा के चलते पंजीयक विभाग को गत वित्तीय वर्ष में प्रदेश में 500 करोड़ के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है। इंदौर व उज्जैन में विभाग को 100 करोड़ की आय कम हुई है। विभाग ने कारणों को जानने के लिए जिला पंजीयकों को मुख्यालय तलब कर उनसे घाटे के कारणों को जानने का प्रयास किया।

जमीनों के पंजीयन में हर साल लक्ष्य से आगे तक पहुंच जाने वाला पंजीयन विभाग इस बार लक्ष्य से काफी पीछे रहा है। मार्च के अंतिम समय में होने वाली आय को लेकर जो भरोसा था, वह भी धोखा दे गया। इंदौर व उज्जैन से ही विभाग को 100 करोड़ का राजस्व लक्ष्य से कम मिला है। राजस्व लक्ष्य से दूर रहने के कारणों को जानने के लिए विभाग के आला अधिकारियों ने चिंता जताते हुए जिला पंजीयकों को भोपाल बुलाकर उनसे इसके पीछे के कारणों को जानने का प्रयास किया। उनसे पूछा गया कि लक्ष्य से किस कारण से जिले पिछड़े हैं और अगली बार से क्या किया जाए कि राजस्व बढ़े?

बताया जा रहा है कि गाइड-लाइन की दर बढ़ने के साथ ही ई-सपंदा को लेकर भी लक्ष्य कम होने की बात सामने आई है। विभाग गत वर्ष में भले ही दरें नहीं बढ़ाई हो, किंतु पूर्व में बढ़ाई गई दरों का प्रभाव अब भी पंजीयन पर पड़ रहा है। ई-संपदा के चलते सर्वर में खराबी आने व अन्य कारणों से एक पंजीयन में लगने वाले समय से भी आय प्रभावित हो रही है।

सूत्रों का कहना है कि विभाग ने राजस्व कम आने को लेकर गोपनीय रूप से जांच करवाई थी। उसमें यह बात सामने आई है कि ई-संपदा ही राजस्व कम करने का मूल कारण रही है। पूर्व में जहा स्टांप वेंडर फरवरी मार्च में अधिक से अधिक स्टाप क्रय कर रख लेते थे, जिनका उपयोग अगले वर्ष तक किया जाता था। एक साथ अग्रिम रूप से बड़ी मात्रा में क्रय किए जाने वाले लाखों-करोड़ों के स्टांप के चलते विभाग का राजस्व एकदम से अधिक बढ़ जाता था, जिससे एक माह में ही विभाग के पास 25 से 40 करोड़ तक का राजस्व जमा होता रहा है। वहीं सॉफ्टवेअर में इस तरह से काम नहीं किया गया है। यदि सर्विस प्रोवाइडर पहले ही अपनी लिमिट बढ़वा लेते तो यह नौबत नहीं आती और विभाग को राजस्व लक्ष्य में कुछ कमी जरूर आती।

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