Home > Archived > केरल लव जिहाद मामला : कोर्ट में हदिया ने बार-बार पति से मिलने की इच्छा जताई, कहा - स्वतंत्रता चाहती हूँ

केरल लव जिहाद मामला : कोर्ट में हदिया ने बार-बार पति से मिलने की इच्छा जताई, कहा - स्वतंत्रता चाहती हूँ

केरल लव जिहाद मामला : कोर्ट में हदिया ने बार-बार पति से मिलने की इच्छा जताई, कहा - स्वतंत्रता चाहती हूँ

-हदिया फिलहाल न पिता के साथ रहेगी न पति के साथ, पढ़ाई करेगी
नई दिल्ली। केरल के लव जिहाद के मामले पर अपने तय समय से ज्यादा समय तक सुनवाई करते हुए लड़की हदिया से सवाल पूछने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे तमिलनाडु के सलेम जिले में स्थित शिवराज होम्योपैथिक कॉलेज में पढ़ाई जारी रखने के लिए जाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कॉलेज के डीन को उसका स्थानीय अभिभावक नियुक्त किया है। कोर्ट ने कहा है कि ये कोर्स 11 महीने का है और हदिया के साथ कॉलेज वैसे ही पेश आएगी जैसे बाकी छात्रों के साथ। हदिया कॉलेज के हॉस्टल में रहेगी और हॉस्टल के नियमों का पालन करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेज के डीन को आदेश दिया कि अगर कोई समस्या आती है तो वो सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं। मामले की सुनवाई जनवरी के तीसरे सप्ताह में होगी। अदालत की इस व्यवस्था से इतना तय हो गया कि मामले हल तक हदिया न पिता के साथ रहेगी न पति के साथ|

खचाखच भरे कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि हमने आज तक ऐसे मामले पर कभी सुनवाई नहीं की है। आज सुप्रीम कोर्ट में हदिया पेश हुई जिससे सुप्रीम कोर्ट ने जिरह किया। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने हदिया से जब पूछा कि आपके भविष्य का सपना क्या है तो हदिया ने कहा कि वो स्वतंत्रता चाहती है।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने जब पूछा कि क्या आप सरकार के खर्च से अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हो तो हदिया ने जवाब दिया कि पढ़ाई जारी रखना चाहती हूं लेकिन जब हमारे पति हमारा ध्यान रखने के लिए हैं तो सरकार के खर्च पर नहीं।

कोर्ट ने पूछा कि क्या आप पढ़ाई के लिए वापस जाना चाहती हो तब हदिया ने कहा कि वो अपने पति को देखना चाहती है। उसे विश्वविद्यालय में एक स्थानीय अभिभावक की जरुरत होगी। तब कोर्ट ने कहा कि हम कॉलेज के डीन को अभिभावक नियुक्त कर देंगे। तब हदिया ने कहा कि मैं केवल अपने पति को अभिभावक के रुप में चाहती हूं किसी और को नहीं।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि मैं भी अपनी पत्नी का अभिभावक नहीं हूं। पत्नियां चल संपत्ति नहीं होती हैं। हदिया ने कहा कि पिछले 11 महीनों से उसका मानसिक शोषण हो रहा है। मैं चाहती हूं कि दिल्ली में अपनी दोस्त के यहां जाकर आराम करूं।

सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की जिरह से नाराज होकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि इस मामले पर बार को हमारी मदद करनी चाहिए। दरअसल केंद्र सरकार और हदिया के पिता एनआईए की सौ पेंजों की रिपोर्ट पर गौर करने के लिए कोर्ट से बार-बार आग्रह कर रहे थे।

सुनवाई के शुरु होते ही हदिया उर्फ अखिला के पिता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने इस मामले की गोपनीय सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि हदिया की जान खतरे में है। ये मामला सांप्रदायिक रंग ले चुका है। हदिया मीडिया को अपना बयान दे चुकी है। उसके पीछे बड़े-बड़े संगठनों का हाथ है। उसके बयान गोपनीय तरीके से होना चाहिए। हदिया के पिता की तरफ से एक आडियो क्लिप का ट्रांसक्रिप्ट पेश किया गया । इस आडियो के ट्रांसक्रिप्ट पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इसकी सत्यता कैसे साबित होगी।

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से एएसजी मनिंदर सिंह ने कहा कि एनआईए की रिपोर्ट काफी गंभीर है। उन्होंने कहा कि गोपनीय सुनवाई करने पर फैसला करना कोर्ट का अधिकार है। एएसजी ने कहा कि ऐसे 11 मामले हुए हैं जिनमें 7 एक ही संगठन सत्य सरिणी के जरिये हुए हैं। इसे प्रोग्रामिंग करते हैं। ये सब कोर्ट के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे साबित कर सकते हैं कि हदिया का पति आईएसआईएस से जुड़ा हुआ है।

सभी पक्षों की इस तरह दलीलें देने के बाद चीफ जस्टिस ने बार से मदद की अपील की। चीफ जस्टिस ने कहा कि वे कपिल सिब्बल की तरह मदद नहीं चाहते हैं कि जो कहें कि अब हम मदद नहीं कर सकते हैं। हम ये नहीं कह रहे हैं कि हम लड़की से बात नहीं करेंगे बल्कि हम ये कह रहे हैं कि किस स्टेज में उससे बात की जाए। हमें दूसरे मसलों की भी चिंता है लेकिन लड़की को इसलिए कैद नहीं रखना चाहिए कि उसने कुछ फैसला किया है। हम केवल ये चाहते हैं कि धारा 21 का पालन हो और जब वो इस कोर्ट से बाहर जाए तो वो जहां जाना चाहे स्वतंत्र होकर जाए।

हदिया के पति के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि हदिया से ये नहीं पूछा जा रहा है कि वो क्या चाहती है| न्यूज चैनल्स और फेसबुक पर जो जहर उगले जा रहे हैं हम वही देख रहे हैं। ये महिला अपने जीवन के बारे में खुद फैसला करने के लिए स्वतंत्र है। कपिल सिब्बल ने कहा कि जो आडियो ट्रांसक्रिप्ट पेश किया गया है क्या वे उसकी जांच करवाएंगे। कपिल सिब्बल ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी रिटायर्ड जज की देखरेख में जांच होगी तो ये जांच कैसे चल रही है। ये कोर्ट की अवमानना है। उन्होंने कहा कि किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सांप्रदायिक रंग देना ठीक नहीं है। तब जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पूछा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की क्या सीमा होनी चाहिए। कपिल सिब्बल ने कहा कि मान लीजिए कि उसने इस व्यक्ति से शादी करने का गलत फैसला किया, लेकिन ये पूरे तरीके से उसका फैसला है। वो उसका परिणाम भुगतेगी। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम ये नहीं कह रहे हैं कि आपके केस में ऐसा है लेकिन स्टॉकहोम सिंड्रोम में ऐसा होता है कि व्यक्ति बालिग होने के बावजूद स्वतंत्र फैसला नहीं कर पाता है।

हदिया के पिता के वकील श्याम दीवान ने कहा कि कोर्ट को पहले इस संगठन पर विचार करना चाहिए तब उस लड़की से बात करना चाहिए। उसके बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने पूछा कि क्या आपने कोई रिसर्च किया है कि हम उस महिला से बात करेंगे तब दूसरे मुद्दों पर विचार करेंगे या हम ये मान लें कि वो किसी प्रभाव में है और दूसरे मुद्दों पर विचार कर हम उस महिला से बात करें?

सुनवाई के दौरान एक बार जब कोर्ट ने कहा कि हम इस मसले पर कल सुनवाई करेंगे। तब कपिल सिब्बल ने कहा कि ये गलत है। हदिया महिला कोर्ट में है और आप कह रहे हैं कि हम उसे कल सुनेंगे। उसे कल भी कोर्ट में आना होगा। उन लोगों ने तीन बार वही बात रखी जो आज रख रहे हैं और आगे भी वही दलील देंगे। कोर्ट उनकी एनआईए जांच की बात खारिज कर चुकी है। हम क्या दलील देंगे। तब जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आप भले ही कोर्ट से जा सकते हैं लेकिन हम नहीं। हम संविधान से बंधे हैं। ये कोई दलील नहीं है कि आज जो चाहते हैं वही निर्णय करें। हम ये फैसला करेंगे कि आप हमें सहयोग करें कि नहीं। उसके बाद कपिल सिब्बल ने कोर्ट से माफी मांगी।

केरल के वकील वीवी गिरी ने कहा कि पहले साक्ष्यों को देख लिया जाए उसके बाद लड़की से बात की जाए। अमूमन सुप्रीम कोर्ट में चार बजे सुनवाई खत्म हो जाती है। लेकिन आज हदिया के मामले में सुनवाई तीन बजे शुरु हुई जो करीब पांच बजे तक चली। डेढ़ घंटे तो इसी में लग गए कि हदिया से सुप्रीम कोर्ट को सवाल पूछना चाहिए कि नहीं। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हदिया से सवाल पूछे।

21 नवंबर को हदिया के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में गोपनीय सुनवाई की मांग करने वाली याचिका याचिका दायर की थी। पिछले 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केरल पुलिस को हदिया उर्फ अखिला को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले की किसी एजेंसी से जांच की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल से पूछा था कि क्या किसी कानून में किसी लड़की की शादी अपराधी से करने पर रोक है। इस मामले में लड़की की मर्जी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। वह बालिग है।

Share it
Top