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लीज की जमीन आबकारी विभाग को किराए पर उठाई

लीज की जमीन आबकारी विभाग को किराए पर उठाई

-देता है तीन हजार सालाना, लेगा एक करोड़

ग्वालियर/ विशेष प्रतिनिधि।
केन्द्र और प्रदेश सरकार जहां उद्योगों को विकसित करने के लिए उद्योगपतियों को सब्सिडी देकर जमीन मुहैया कराती है, लेकिन उद्योगपति सरकार को चूना लगाकर अपनी जेबें भरने से नहीं चूक रहे। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है, जिसमें एक उद्योगपति द्वारा उद्योग विभाग से लीज पर ली गई जमीन के बदले उद्योग विभाग को तो मात्र 3038 रुपए सालाना लीजरेंट दिया जा रहा है, किन्तु उसने इस जमीन के कुछ हिस्से को एक सरकारी विभाग को किराए पर देने का करार किया है, जिसमें उसने एक करोड़ रुपए सालाना किराया मांगा है। यहां यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार से लीज पर ली गई, जमीन को उसी के एक विभाग को किराए पर दिया जा सकता है?

सूत्रों ने बताया कि संभागीय आबकारी उपायुक्त ग्वालियर संभाग ने 20 अगस्त 2017 को अंगे्रजी शराब गोदाम किराए पर लेने के लिए विज्ञप्ति का प्रकाशन कराते हुए 24 अगस्त तक निविदाएं आमंत्रित की थी। जिस पर शहर की चार फर्मों ने दरें देते हुए टेण्डर भरे थे।

इनके नाम मां शारदा देवी वेयर हाउस पुरानी छावनी प्रोपराइटर वेदप्रकाश गोयल, राजेन्द्र वघेल झांसी रोड, सुदर्शन वेयर हाउस पार्टनर अजय गुप्ता और प्रीस्ट्रीड कान्क्रीट इन्डस्ट्री पार्टनर राजकुमार अग्रवाल थे। टेण्डर आने के बाद संभागीय आबकारी उपायुक्त शैलेष सिंह, बी.एन.त्रिवेदी, शरद पाठक, हेमंत भारद्वाज और मोनिका पाठक ने इनमें से प्रीस्ट्रीड के टेण्डर को सबसे उपयुक्त मानते हुए फाइनल कर दिया। प्रीस्ट्रीट इन्डस्ट्री द्वारा 40 हजार वर्गफीट कवर क्षेत्र के लिए 40 रुपए वर्गफीट और 20 हजार वर्गफीट खुली भूमि के लिए 16 रुपए वर्गफीट की दर भरी थी। इस लिहाज से उसका मासिक किराया लगभग 8 लाख रुपए महीना और वार्षिक लगभग एक करोड़ रुपए बैठता है।
लेकिन इस मामले में उस समय पेंच आ गया जब यह बात सामने आई कि प्रीस्ट्रीड कान्क्रीट इन्डस्ट्री के पास स्वयं उद्योग विभाग से लीज पर जमीन हैं, फिर वह उसका खुद इस्तेमाल न कर आबकारी विभाग को किराए पर कैसे उठा सकता है। इस संवाददाता ने पूरे मामले की पड़ताल की, जिसमें पता लगा है कि प्रीस्ट्रीड कान्क्रीट इंडस्ट्रीज के नाम से नरेश अग्रवाल ने 10 मई 1970 को 9.961 एकड़, यानिकी 4 लाख 33 हजार 925 वर्गफीट जमीन उद्योग विभाग से नारायण बिहार कॉलोनी गोला का मंदिर के प्लाट क्रमांक 7273 लीज पर ली थी। वर्तमान में वे इसका लीजरेंट मात्र 3038 रुपए सालाना अदा कर रहे हैं, जबकि संधारण शुल्क 24213 रुपए सालाना है। यह भी जानकारी मिली हैं कि लीज के बाद श्री अग्रवाल ने अपने ही परिवार के तीन अन्य सदस्यों हर्ष अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल और बसंती अग्रवाल को पार्टनर बना लिया। उनके द्वारा उद्योग विभाग को यह जानकारी दी गई है कि वर्तमान में उनके यहां बिजली के पोल का निर्माण हो रहा है।

दोनों विभागों ने साधी चुप्पी

इस मामले में बखेड़ा खड़ा न हो जाए, इसलिए अब उद्योग और आबकारी विभाग के लोग कुछ भी कहने से बच रहे हैं। क्योंकि उद्योग विभाग द्वारा लीज पर जमीन दिए जाने की शर्तों में इस बात का स्पष्ट उल्लेख रहता है कि लीज लेने के एक साल के भीतर उद्योग शुरू हो जाना चाहिए, साथ ही इस जमीन को किसी अन्य को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। साथ ही स्वयं के द्वारा उस जमीन पर कोई काम नहीं किए जाने की स्थिति में उद्योग विभाग लीज रद्द भी कर देता है। ऐसे में प्रीस्ट्रीड कान्क्रीर इन्डस्ट्री का कारनामा सरेआम लीज की शर्तों का उल्लंघन करने वाला है।

इनका कहना है

अंगे्रजी शराब गोदाम के लिए चार फर्मों ने टेण्डर डाले थे, जिसमें नरेश अग्रवाल की फर्म का नाम फाइनल कर कलेक्टर की ओर कलेक्टर दर से किराया निर्धारण करने के लिए फाइल भेजी गई है। हमने बाकायदा जांच समिति बनाकर निर्णय लिया है। आप चाहें तो फाइल देख लें।

शैलेष सिंह, उपायुक्त,
संभागीय आबकारी विभाग पड़ाव

प्रीस्ट्रीड कान्क्रीट इन्डस्ट्री द्वारा 1970 से जमीन लीज पर ली गई है, वर्तमान में वे विद्युत पोल बना रहे हैं। यदि उन्होंने आबकारी विभाग को कुछ जमीन किराए पर देने का अनुबंध किया है, तो इसकी जानकारी नहीं है। लीज की जमीन किसी अन्य को किराए पर नहीं दी जा सकती।

एम.एल. अटल
महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र

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