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तीन प्लॉटों पर तान दिया एक आलीशान मकान

तीन प्लॉटों पर तान दिया एक आलीशान मकान


ग्वालियर/विशेष प्रतिनिधि।
एक ही परिवार के तीन सदस्यों ने हरीशंकरपुरम जैसी पॉश कॉलोनी में पहले तो चार अलग-अलग प्लॉट खरीदे, फिर इनमें से तीन प्लॉटों पर अलग-अलग भवन निर्माण की अनुमति ली, इसके बाद सारे नियम कायदों को धता बताते हुए इन तीन प्लॉटों पर एक आलीशान तीन मंजिला भवन तान दिया। यह निर्माण जानबूझकर निगम को भवन अनुज्ञा राशि और सम्पत्तिकर में छूट हांसिल करने के लिए किया गया। गलत ढंग से निर्माण होने पर निगम अमला हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हरिशंकपुरम में बी-26,27,28 और 29 नंबर के 900 वर्गफीट के तीन अगल-अलग प्लाट पंकज गुप्ता पुत्र विशन स्वरूप गुप्ता, और नितिन गुप्ता एवं सचिव गुप्ता पुत्र विशन स्वरूप गुप्ता ने वर्ष 2010 में रतनलाल शिवहरे पुत्र माया राम शिवहरे निवासी किलागेट और रश्मि पत्नी महेन्द्र कृपलानी निवासी सिंध बिहार से क्रय किए। इसके बाद गुप्ता बंधुओं ने 21 मई 2012 में क्षेत्रीय कार्यालय क्र.13 वार्ड क्र. 58 में इन प्लाटों पर भवन अनुज्ञा के लिए तीन अलग-अलग आवेदन प्रस्तुत किए। इसके लिए इन्होंने दस्तावेजों के साथ नजूल एन.ओसी भी आवेदन के साथ लगाई। सब इंजीनियर और भवन अधिकारी ने इन आवेदनों की जांच पड़ताल के बाद तीन अलग-अलग भवन अनुज्ञा इस शर्त के साथ दीं कि तलघर का उपयोग पार्किंग के लिए होगा, वाटर हार्वेस्टिंग करना जरूरी है, एमओ एस मानचित्र के अनुसार रखना होगा। लेकिन भूस्वामी ने अनुमति मिलने के बाद लगभग तीन हजार वर्गफीट भूमि पर अपने आर्किटेक्ट से एक अलग नक्शा बनाकर तीन मंजिला आलीशान भवन तान दिया। इसमें एमओएस का सीधा उल्लंघन किया गया और मकान के आगे छज्जे भी निकाल लिए हैं, जबकि एक प्लाट खाली छोड़कर उसके बाहर लोहे का दरवाजा लगा दिया गया है। इतना ही नहीं जी प्लस टू की अनुमति लेकर तीसरी मंजिल पर भी अनाधिकृत निर्माण कर लिया गया है। बताते है कि भवन निर्माणकर्ता दालबाजार का कारोबारी हैं इसलिए उसने निर्माण पर काफी बड़ी राशि खर्च की है।

अर्थिंग के लिए रेल पटरी का इस्तेमाल

हरीशंकरपुरम में ग्वालियर ग्लोरी स्कूल से सटे इस आलीशान भवन में बिजली की अर्थिंग के लिए बाहर दस फीट का गड्ढा खोदकर रेल की पटरी का इस्तेमाल किया गया है, जो अपने आप में एक अनूठा प्रयोग है।

विशेषज्ञ की राय

यदि भू-स्वामी ने तीन अलग-अलग अनुमतियां लेकर उस पर एक बढ़ा निर्माण किया है तो उसमें एमओएस नहीं छोड़ा गया होगा। इसमें निगम इंजीनियरों को भवन बनते समय ध्यान देना चाहिए था। यह नियमों का सरेआम उल्लंघन है।

अरूण कुमार कुलश्रेष्ठ, सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री नगर निगम

इनका कहना

आपने यह प्रकरण हमारी जानकारी में लाया है, हम भवन निरीक्षक को मौके पर भेजकर जांच करवाएंगे और शिकायत सही होने पर उचित कार्यवाही होगी।

प्रदीप वर्मा, भवन अधिकारी ग्वालियर पूर्व

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