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तेन्दुआ से भैंसों ने बचाई मालिक की जान

रैबीज से ग्रस्त होने से पागल हो गया था तेन्दुआ

ग्वालियर। कहा जाता है कि पशुओं में संवेदनाएं नहीं होती हैं, लेकिन निरपत पुरा में पांच पालतू भैंसों ने अपने मालिक की जान बचाकर इस बात को निर्मूल साबित कर दिया। तेन्दुआ के हमले में घायल हुए कप्ताह सिंह गुर्जर बताते हैं कि गहरी नींद में डूबे होने के दौरान जब तेन्दुआ ने उन पर हमला किया, तो उनकी चीखे-पुकार सुनते ही पास में ही बैठीं उनकी सभी पांच भैंसें मिलकर तेन्दुआ पर टूट पड़ी। हालांकि तेन्दुआ ने अपने मुंह और पंजों से हमला कर सभी भैंसों को लहूलुहान कर दिया, लेकिन फिर भी सभी भैंसें तेन्दुआ से तब तक भिड़ती रहीं, जब तक कि तेन्दुआ मैदान छोड़कर भाग नहीं गया। इस तरह अपनी जान पर खेल कर भैंसों ने अपने मालिक की जान बचा ली।

निरपत पुरा गांव निवासी घायल कप्तान सिंह के भाई सिरनाम सिंह ने बताया कि तेन्दुआ ने रात करीब दो से ढाई बजे के बीच सोते समय कप्तान सिंह सिंह पर हमला किया तो उनकी चीख-पुकार सुनकर अन्य लोग मौके पर पहुंच गए, तो देखा कि चार-पांच भैंसें तेन्दुआ से भिड़ी हुई थीं। इसी बीच ग्रामीणों ने भी तेन्दुआ पर लाठियां फटकारीं तो लडख़ड़ाता हुआ वह सांक नदी की ओर भाग गया। इसके बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई। आनन-फानन में परिजन घायल कप्तान सिंह को ग्वालियर लेकर आए और जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। बताया गया है कि निरपत पुरा में तेन्दुआ के हमले में पांच भैंसें और चार गायें भी घायल हुई हैं।

शनिवार को सुबह होते ही ग्रामीणों ने तेन्दुआ की खोजबीन की तो वह मृत हालत में सांक नदी में पड़ा मिला। इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई। इसके बाद सुबह करीब छह बजे मुख्य वन संरक्षक राजेश कुमार, वन संरक्षक विक्रम सिंह परिहार, सोनचिरैया अभयारण्य अधीक्षक प्रकाश श्रीवास्तव, गेमरेंज घाटीगांव के वन परिक्षेत्र अधिकारी वीरेन्द्र सिंह कुशवाह सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंचे और मौका मुआयना करने के बाद तेन्दुआ के शव को वन चौकी भटपुरा लेकर पहुंचे, जहां ग्वालियर से पहुंचे दो पशु चिकित्सकों ने मृत तेन्दुआ के शव का परीक्षण किया। इसके बाद वन चौकी परिसर में ही जलाकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृत तेन्दुआ की उम्र लगभग पांच साल बताई जा रही है।

ग्रामीणों पर दर्ज नहीं होगा मामला
वन संरक्षक विक्रम सिंह परिहार ने बताया कि तेन्दुआ की मौत के मामले में ग्रामीणों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज नहीं किया जाएगा क्योंकि ग्रामीणों ने अपनी आत्म रक्षा के लिए तेन्दुआ को लाठी-डंडों से मारा था। श्री परिहार ने बताया कि हालांकि पशु चिकित्सकों ने अभी मृत तेन्दुआ की शव परीक्षण रिपोर्ट नहीं दी है, लेकिन प्रारंभिक तौर पर उन्होंने जो बताया है, उसके अनुसार तेन्दुआ की मौत अंदरूनी चोट, भूख और गर्मी की वजह से हुई है। शव परीक्षण में भी उसके पेट में आहार नहीं मिला है। चिकित्सकों के अनुसार वह रैबीज से भी ग्रस्त हो सकता है। संभवत: रैबीज से पागल हो जाने के कारण से ही वह पालतू जानवरों और ग्रामीणों पर बार-बार हमला कर रहा था। उन्होंने बताया कि मृत तेन्दुआ का बिसरा जांच के लिए जबलपुर और सागर लैब में भेजा जाएगा, जहां से रिपोर्ट मिलने के बाद ही उसकी मौत की असल वजह पता चलेगी। उन्होंने बताया कि हालांकि इस मामले में पुलिस में प्रकरण दर्ज न कराते हुए वन विभाग अपने स्तर पर अज्ञात में वन अपराध दर्ज कर मामले की जांच करेगा।

गाय ने जान देकर निभाया मां का फर्ज
गाय को मां यूं ही नहीं कहते। जरूरत पडऩे पर गाय मां होने का फर्ज भी निभाती है। यह साबित किया तिलावली गांव के ब्रजेन्द्र सिंह गुर्जर की गाय ने। इस गाय ने तेन्दुआ से लड़ते हुए अपने मालिक ब्रजेन्द्र की जान बचाकर मां होने का फर्ज बखूबी निभाया। हालांकि वह स्वयं अपनी जान नहीं बचा पाई। तेन्दुआ के हमले में घायल ब्रजेन्द्र सिंह गुर्जर बताते हैं कि गुरुवार व शुक्रवार की रात उन्होंने खिड़क में बंद पशुओं के रंभाने की आवाज सुनी। इस पर वह भागते हुए जब मौके पर पहुंचे तो तेन्दुआ ने हमला कर उनका सिर मुंह में दबा लिया। बचने के लिए उन्होंने अपने हाथ-पैर चलाने की कोशिश की, लेकिन हाथ-पैरों ने काम नहीं किया। इसके बाद उनके मुंह से अचानक यह शब्द निकले कि हे ईश्वर मुझे बचा ले, लेकिन काफी देर तक जब तेन्दुआ ने उन्हें नहीं छोड़ा तो उन्होंने पास में ही खड़ी अपनी गाय को पुकारा और कहा कि हे गऊ माता तू ही बचा ले। इतना कहते ही गाय तेन्दुआ पर टूट पड़ी और उसने अपने सींगों से मार-मारकर मुझे तेन्दुआ मुक्त करा लिया, लेकिन इसके बाद तेन्दुआ गाय पर हावी हो गया। गायल होने के कारण मैं जमीन पर पड़ा था। मैंने गाय को बचाने के लिए उठने की बहुत कोशिश की, पर लाख कोशिशों के बाद भी मैं उठ नहीं पाया और मेरी आंखों के सामने ही मेरी मां समान गाय को तेन्दुआ ने मार डाला। इसी दौरान गांव के अन्य लोग मौके पर आ गए, जिन्होंने लाठियों से पीट-पीटकर तेन्दुआ को वहां से भगाया। ब्रजेन्द्र कहते हैं कि जिस गऊ माता ने अपनी जान पर खेलकर मेरी जान बचाई, पर मैं उसकी जान नहीं बचा पाया। इसका दु:ख मुझे जीवन भर रहेगा।

गऊ माता का बनाएंगे मंदिर

तलावली गांव के लोग ब्रजेन्द्र की जान बचाते हुए तेन्दुआ के हमले में मारी गई गाय का मंदिर बनाने पर विचार कर रहे हैं। तेन्दुआ के हमले में घायल हुए तिलावली गांव के लोगों का कहना है कि अस्तपाल से छुट्टी मिलने के बाद वे सभी गांव में पहुंचकर जनभागीदारी से गांव में एक मंदिर का निर्माण कराकर उसमें विधि विधान से मृत गऊ माता की प्रतिमा स्थापित कराएंगे। यह मंदिर गऊ माता मंदिर के नाम से जाना जाएगा। इससे हमारी आने वाली तमाम पीढिय़ों को यह प्रेरणा मिलती रहेगी कि गाय वास्तव में हमारी माता है, रक्षक है और हमें उसकी सब प्रकार से सेवा करना चाहिए।a

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