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क्रिकेट में भी रेड कार्ड

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के डेढ़ शताब्दी से अधिक पुराने इतिहास में फुटबॉल और हॉकी की तरह ही खेल मैदान पर बुरा बर्ताव करने वाले खिलाड़ी के खिलाफ रेडकार्ड का नियम लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी)की विश्व किक्रेट समिति ने बुधवार को आयोजित एक बैठक में इस पर विचार के बाद इसे लगभग अमल में लाने की तैयारी कर ली है। उल्लेखनीय है कि कई बार देखने में आता है कि क्रिकेट के मैदान पर कई बार खिलाडिय़ों का अपने प्रतिद्वंदी टीम के खिलाड़ी से छोटी-छोटी बातों पर विवाद हो जाता है। इसके चलते खिलाड़ी एक-दूसरे के खिलाफ भद्दे इशारे ही नहीं बल्कि भद्दी और अश्लील टिप्पणियां तक कर देते हैं। इसका एक चर्चित उदाहरण भारतीय ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह और ऑस्ट्रेलिया के रिटायर्ड हरफनमौला खिलाड़ी एन्ड्रयू साइमंड्स के बीच एक दूसरे के खिलाफ अभद्र भाषा और नस्लभेदी टिप्पणी के मामले ने काफी तूल पकड़ लिया था। ऐसे एक नहीं बल्कि कई मामले है जबकि खिलाडिय़ों ने आपस में ही नहीें बल्कि अम्पायर के फैसले के खिलाफ भी मैदान पर अपना गुस्सा जाहिर किया है जो कि मर्यादाओं के विपरीत है। हालांकि समय के साथ अब ऐसे कई नियम आ गए हैं जिससे खिलाड़ी काफी नियंत्रण में दिखाई देने लगे हैं। लेकिन खिलाडिय़ों को मर्यादा में रखने के लिए शायद एमसीसी का यह प्रयास भी एक अच्छी पहल हो सकती है। इसके तहत अनुशासन के उल्लंघन पर अम्पायरों के पास खिलाडिय़ों को खेल के दौरान ही बाहर करने का अधिकार होगा। इससे यह फायदा होगा कि अम्पायर को धमकाने, अधिकारी या दर्शक को शारीरिक तौर पर नुकसान पहुंचाने या खेल के मैदान पर अन्य हिंसक गतिविधियों के लिए खिलाड़ी को तत्काल सजा मिलेगी जिससे वह अनुशासन में रहेगा। अभी तक मैच के बाद अम्पायर की शिकायत या सिफारिश के आधार पर मैच रैफरी द्वारा सजा का निर्णय लेने का प्रावधान है। रेड कार्ड मामले में की गई सिफारिशों को अब एमसीसी की मुख्य समिति के पास भेजा जाएगा। समिति की बैठक आगामी तीन और चार जुलाई 2017 को लंदन में होगी। इस बैठक में यदि सिफारिशें मंजूर की जाती हैं तो इसे 1 अक्टूबर 2017 से लागू कर दिया जाएगा। यदि यह नियम लागू हो जाता है तो निश्चित ही क्रिकेट के मैदान पर खिलाडिय़ों में और अधिक अनुशासन देखने को मिलेगा।

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