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डीआईओएस आगरा पर नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी का आरोप

मथुरा। आगरा के डीआईओएस पर मथुरा, राजस्थान के दर्जन भर बेरोजगारों को शिक्षा विभाग में नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी करने का आरोप लगा है। पीडि़तों ने राष्ट्रपति को इस संबंध में शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।
फरह थाना के ग्राम पिपरौंठ निवासी पदम सिंह पुत्र बहोरन सिंह सबसे पहले डीआईओएस के झांसे में आया है। पदम सिंह के मुताबिक वह 20 मई 2015 को डीआईओएस आगरा से उनके आवास पर मिला था। यहां डीआईओएस ने पदम सिंह के भाईयों को शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर 20 लाख रूपए का ऑफर दिया। कहा कि यदि इतने पैसे का इंतजाम कर लो तो वह नौकरी लगवा सकता है। पदम सिंह डीआईओएस के झांसे में आ गया, उसने अपने भाई राकेश, नरेश व दिन व पुत्र संतोष चार युवकों की नौकरी लगवाने के लिए रूपयों का इंतजाम कर लिया।

पदम सिंह के अनुसार उसने रकम का एक बड़ा हिस्सा गांव के ही बनवारी लाल पुत्र देवी सिंह के सामने 28 जून 2015 को डीआईओएस को दिए। इसके बाद डीआईओएस ने उसे अपनी मीठी बातों में उलझाया, कहा कि अभी विभाग में और भी पद खाली है, चाहो तो और लडक़े ले आओ, सबकी नियुक्ति एक साथ करा दूंगा। इस झांसे में अन्य लोग भी आ गए, जिनमें भरत सिंह पुत्र विजयसिंह निवासी आगरा, सचिन पुत्र रामप्रकाश यादव निवासी आगरा, राकेश पुत्र जवाहर निवासी वृंदावन, जितेंद्र पुत्र रामगोपाल निवासी फरह, सत्यभान पुत्र जगदीश निवासी फरह, गिरधर सिंह पुत्र रामेश्वर निवासी हाईवे, श्रीमती प्रियंका पत्नी नीरज कुमार निवासी अछनेरा आगरा, भीष्म देव पुत्र भोजेंद्र निवासी गोवर्धन, अमित कुमार पुत्र फूलचंद व बनवारी पुत्र भजनी निवासी कामां राजस्थान ने भी अपनी नियुक्तियों के लिए लाखों रूपए पदम सिंह के मार्फत से जितेंद्र सिंह को दिए।

जनवरी माह में और भी बेरोजगार इस ठगी के नेटवर्क का हिस्सा बन गए, जिनमें हरेंद्र पुत्र नरेश कुमार, ऋषिपाल पुत्र भगवान सिंह, उमेश चंद पुत्र मोहन सिंह, नवल सिंह पुत्र पूरन सिंह, रवि पुत्र बापू, नंदकिशोर पुत्र बनवारी आदि है। इन्होंने भी बड़ी रकम कथित डीआईओएस को दे दी। आरोप है कि पैसे उगाहने के बाद डीआईओएस मुकर गए। कभी शासन से लगी रोक तो कभी मंजूरी का इंतजार, इन बहानों से वह इन सभी को टहलाते रहे, मगर बाद में डीआईओएस ने साफ इंकार कर दिया। पीडि़तों के अनुसार डीआईओएस अब पद का रौब गालिब करते हुए धौंस दे रहे हैं। पीडितों का कहना है कि राजनीतिक पकड़ होने के चलते पुलिस कार्यवाही से बच रही है।

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