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ताज में एकत्रित होगा प्रदूषण का सही विवरण

आगरा। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताज। इसके अद्भुत सौंदर्य के किस्सों के साथ उसे प्रदूषण की कालिख से पहुंचे नुकसान के भी चर्चे खबर बन जाते हैं। हालांकि इसका सही विवरण न होने से वायु प्रदूषण से स्मारक को पहुंच रहे नुकसान का सही आकलन नहीं हो पाता। अब ताज में ऑटोमेटिक एयर क्वालिटी मॉनीटच्रग सिस्टम लगाया जाएगा। इससे सही विवरण मिल सकेगा, जिससे स्मारक पर प्रदूषण के प्रभाव की जांच करना भी आसान होगा।

ताजमहल को प्रदूषण की कालिख से बचाने के लिए ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में प्रदूषणकारी उद्योगों की स्थापना पर रोक लगी हुई है। इसके बावजूद समय-समय पर हुए अध्ययनों में वायु प्रदूषण की वजह से ताज का धवल सौंदर्य पीला पडऩे और कूड़ा जलने से उसके नूर खोने का खुलासा हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा यह सिस्टम लगाने से हर घंटे ताज पर वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों धूल कणों, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर-डाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइ-ऑक्साइड आदि का पता चल सकेगा। सीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी वीके शुक्ला ने बताया कि ऑटोमेटिक सिस्टम लगाने के लिए एएसआइ के अधिकारियों से वार्ता की जा चुकी है। एएसआइ इसकी अनुमति इस शर्त पर देने को तैयार है कि सिस्टम से स्मारक के बाहरी स्वरूप में कोई परिवर्तन न हो। शीघ्र ही स्थानीय अधिकारियों के साथ एक बार फिर बैठक की जाएगी।

पहले से लगे हैं दो सिस्टम
ताज में वायु प्रदूषण की जांच को दो सिस्टम लगे हुए हैं। एएसआई का सिस्टम मेहमानखाने के पास यमुना किनारा स्थित बुर्ज पर लगा है। यहां लगे डिस्प्ले बोर्ड में एक दिन पुराने वायु प्रदूषण के आंकड़े दिखाए जाते हैं, जबकि सीपीसीबी का सिस्टम पश्चिमी गेट के पास बुर्जी पर लगा है।

प्रदूषण के प्रभाव का हो अध्ययन
एएसआई भी प्रदूषण की कालिख से ताज को पहुंच रहे नुकसान को लेकर चिंतित है। वह चाहता है कि ताज के परिवेश में वायु गुणवत्ता की जांच के साथ प्रदूषणकारी तत्वों के स्मारक पर प्रभाव की भी जांच हो। इसीलिए उसने मडपैक के साथ फिल्टर के माध्यम से स्वयं यह जांच शुरू कर दी है। इसके लिए सैंपलिंग के साथ डाटा एकत्र किया जा रहा है।

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