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अब दो सीटों पर चुनाव लडऩे पर लगेगी पाबंदी, चुनाव आयोग ने भेजी सिफारिश

अब दो सीटों पर चुनाव लडऩे पर लगेगी पाबंदी, चुनाव आयोग ने भेजी सिफारिश

नई दिल्ली। अभी तक दो सीटों से चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवारों का चुनावी खर्च चुनाव आयोग ही उठाता है, लेकिन अब इस पर पाबंदी लगती दिखाई दे रही है। चुनाव आयोग ने केंद्रीय विधि मंत्रालय से सिफारिश की है कि एक उम्मीदवार के दो सीटों से चुनाव लडऩे की प्रावधान को समाप्त किया जाए। चुनाव आयोग ने इसके अलावा कुछ और संशोधन भी केंद्रीय विधि मंत्रालय को भेजे हैं।

चुनाव आयोग के अनुसार अभी तक दो सीटों से चुनाव लडऩे वाले प्रत्याशी का खर्च चुनाव आयोग ही उठाता है। चुनाव आयोग ने कहा है कि अगर मंत्रालय इसे बदलना नहीं चाहता है तो वह इसमें संशोधन करे और उपचुनाव के दौरान होने वाले खर्च की जिम्मेदारी सीट छोडऩे वाले उम्मीदवार पर ही डाले। चुनाव आयोग ने कहा कि उपचुनाव में सीट छोडऩे वाले प्रत्याशी को 5 लाख और लोकसभा के लिए 10 लाख के खर्च का वहन करे। आयोग ने कहा समय समय पर इस राशि को बढ़ाया भी जाना चाहिए।

काले धन पर काबू पाने के लिए विमुद्रीकरण के एलान के बाद मोदी सरकार का यह दूसरा बड़ा नीतिगत फैसला होगा। जिसके बारे में जल्द एलान किए जाने की संभावना है। विधि आयोग ने जो रिपोर्ट जमा की है, उसमें पेज नंबर 244 से 255 तक ‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट’ पर सिफारिशें हैं। विधि और कानून मंत्रालय के विधायिका विभाग ने इस बारे में संबंधित सभी विभागों को परिपत्र जारी किया है, जिसमें जल्द ही आयोग की सिफारिशें लागू करने की बात कही गई है।

विधि आयोग के दो सुझाव गौर करने लायक हैं। पहला, ऐसे मामले जिनमें कम से कम पांच साल की सजा का प्रावधान है, चार्जशीट वाले नेता को चुनाव लडऩे की अनुमति नहीं होगी। दूसरा, राजनीतिक दलों के नेताओं के खिलाफ चल रहे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें गठित की जाएंगी, जिन्हें एक साल के भीतर फैसला सुनाना होगा। फास्ट ट्रैक कोर्ट से सजा पाने वाले भले ही ऊपरी अदालत से बरी हो जाएं, लेकिन उन पर चुनाव लडऩे, राजनीतिक पार्टी बनाने और राजनीतिक दल में पदाधिकारी बनने पर हमेशा के लिए रोक लग जाएगी।

चुनाव सुधार को लेकर बीते ढाई दशक से कवायद चल रही है। मोदी सरकार ने विधि आयोग से इस बारे में सुझाव मांगे। चुनाव के दौरान पेड न्यूज (पैसे लेकर किसी उम्मीदवार के पक्ष में खबर दिखाने या छापने), स्टेट फंडिंग (उम्मीदवार का खर्च सरकार देगी), झूठे शपथपत्र, खर्च का ब्योरा कम बताने और अपराधों में आरोपी उम्मीदवारों के चुनाव लडऩे पर रोक लगाने जैसे मुद्दों पर सहमति बनाने के प्रयास चल रहे हैं। चुनाव सुधार के मामले में विधि मंत्रालय और विधि आयोग को सुझाव भेजने वाले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय के अनुसार, चुनाव व्यवस्था में सुधार या संशोधन की जिम्मेदारी विधि मंत्रालय की होगी।

मंत्रालय ही चुनाव संचालन नियम, 1961 और जनप्रतिनिधि कानून, 1951 में फेरबदल की पहल करेगा। विधि आयोग और चुनाव आयोग ने अपने सुझाव दे दिए हैं। विधि आयोग की सिफारिशों को हरी झंडी दिखाते हुए मंत्रालय के उप सचिव केके सक्सेना ने पत्र जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि ‘विधि आयोग द्वारा चुनाव सुधारों को लेकर पृष्ठ संख्या 244 से 255 पर दिए गए सुझावों को सरकार लागू करने की तैयारी कर रही है।

अभी चुनाव आयोग रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट के दायरे में चुनाव कराता है। केंद्र में मोदी सरकार के गठन के बाद विधि आयोग की कवायद तेज हुई। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश डॉ बीएस चौहान को विधि आयोग का 21 वां अध्यक्ष बनाया गया। उनके साथ गुजरात उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रवि आर त्रिपाठी को सदस्य बनाया गया। आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त 2018 तक है।

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