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ताजनगरी के उद्योगों को बचाने एक मंच पर आए उद्यमी

ताजनगरी के उद्योगों को बचाने एक मंच पर आए उद्यमी

-पीएम-10 श्रेणी में न आने वाले उद्योगों के प्रतिबंध का किया विरोध

बैठक में आगरा के उद्योगों पर लगे नए प्रतिबंधों व निदान रणनीति पर चर्चा करते उद्यौगिक ईकाईयों के प्रतिनिधिगण।
आगरा। उद्योगों की कैटेगरी तय करने की नई नीति ने ताज ट्रिपेजियम जोन की इकाइयों के विस्तार और नए निर्माण पर संकट खड़ा कर दिया है। अभी हाल ही में केन्द्रीय पर्यावरण सचिव की अध्यक्षता में दिल्ली में सम्पन्न हुई ताज ट्रिपेजियम जोन अथाॅरिटी की बैठक में नए उद्योगों की स्थापना और उनके विस्तार पर प्रतिबंध लगाया गया है। जिसे आगरा मंडल के उद्योग जगत ने एकतरफा बताते हुए निर्णय को वापस लेने की मांग की है। इस सम्बंध में रविवार को आगरा, अलीगढ़, फिरोजाबाद व मथुरा की प्रमुख औद्यौगिक ईकाइयों के प्रतिनिधियों की बैठक संजय प्लेस स्थित एक होटल में सम्पन्न हुई।
प्रदूषण उद्योगों से नहीं, प्रशासनिक उदासीनता से
बैठक में एडीएफ के सचिव केसी जैन ने पर्यावरण सचिव की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि आगरा में सल्फरडाई आक्साइड व नाइट्रोजन के स्तर मानकों के अनुसार पाए गए। मात्र पर्टिकुलेटेड मैटर-10 (पीएम-10) को मानकों से अधिक पाया गया। यह पीएम-10 (धूल के महीन कण) को बढ़ाने में उद्योंगों का कोई योगदान नहीं है। बैठक में उद्यमी अमर मित्तल ने कहा कि उद्यौगिक इकाईयां पर्यावरण व प्रदूषण के मानकों का पूरा ध्यान रखती हैं। साथ ही सड़क निर्माण, टूटी सड़कें, हरियाली की कमी, सूखी यमुना, कचरा आदि कारण प्रदूषण में वृद्धि कर रहे हैं। जिसकी जिम्मेदारी नगर निगम, लोक निर्माण विभाग व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की है। बैठक में पर्यटन व्यवसायी अरूण डंग ने कहा कि प्रतिबंध आगरा के उद्योगों के साथ अन्याय है।
उद्योगों का श्रेणीकरण गलत
एफमेक व आगरा डवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष पूरन डाबर द्वारा केन्द्र सरकार द्वारा फरवरी 2016 में विभिन्न उद्योगों के किए गए लाल, नारंगी, हरा व सफेद वर्गीकरण को भी गलत बताया। कहा कि कुछ उद्योगों को जैसे फुटवियर इंडस्ट्री को हरी व 100 कमरों से ज्यादा वाले होटल इंडस्ट्री को लाल श्रेणी में नहीं रखना चाहिए था। श्रेणियों के वर्गीकरण को केन्द्र सरकार द्वारा उद्योग जगत से बात करनी चाहिए।
लड़ाई लड़ने के लिए बनी कमेटी
बैठक के समन्वयक व लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष राकेश गर्ग ने बताया कि उद्यमियों ने अपनी लड़ाई लड़ने के लिए कमेटी का गठन किया है। जिसमें पूरन डावर, अशोक गोयल, केसी जैन, अमर मित्तल, राकेश गर्ग, राजेश गोयल, अरुण डंग, मथुरा के कृष्ण दयाल अग्रवाल, उमेश शर्मा, फिरोजाबाद से संजय अग्रवाल आदि शामिल हैं।
प्रदूषण कम करने के यह आए सुझाव
-आगरा के अंदर आने वाली कमर्शियल वाहनों को सीएनजी की अनुमति की जाए।
-वीकेन्ड पर ताज देखने आने वाले लगभग 40-50 हजार वाहनों पर अंकुश लगे।
-सुप्रीम कोर्ट के आदेश पालन करते हुए आगरा को 24 घंटे अबाधिक बिजली मिलें, जिससे जेनरेटर का प्रयोग न हो।
-आगरा में लगभग 24 प्रतिशत कचरा जला कर नष्ट किया जा रहा है। इस पर रोक लगे।
पूर्व में लगाया जा चुका है प्रतिबंध
बताते चले कि आगरा में 13 जनवरी 2010 को एक आदेश के तहत नए उद्योगों की स्थापना पर पर्यावरण मंत्रालय द्वारा प्रतिबंध लगाया गया था, जिसे मंत्रालय ने 15 फरवरी 2011 को वापस ले लिया था। बैठक में चैम्बर अध्यक्ष अशोक गोयल ने कहा कि टीटीजेड अथॉरटी व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अपने एक्शन प्लान पर्यावरण मंत्रालय को प्रस्तुत करने चाहिए ताकि उद्योगों पर लगाई गई अस्थाई रोक को केन्द्र सरकार समाप्त कर सके।
बैठक में इनकी रही उपस्थिति
अध्यक्षता एफमेक अध्यक्ष पूरन डाबर ने की। संचालन राकेश गर्ग ने किया। इस मौके पर प्रह्लाद अग्रवाल, भुवेश अग्रवाल, रमेश वाधवा, अवनीश शिरोमणी, उमेश शर्मा, अनुज सिंघल, विजय गुप्ता, संजय अग्रवाल व हेमन्त अग्रवाल (फिरोजाबाद), कृष्ण दयाल अग्रवाल व मनीष गर्ग (मथुरा) प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. रामकरन, नितिन वाष्र्णेय (हाथरस) डॉ. राजीव अग्रवाल व मनोज कुमार अग्रवाल (अलीगढ़), उपस्थित रहे।
यह है सारणी
प्रदूषण इंडेक्स कैटेगरी इंडस्ट्री की संख्या
60 से अधिक रेड 60
41-59 ओरेन्ज 83
21-40 ग्रीन 63
20 से कम व्हाइट 36

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