प्रयागराज: कोरोना काल की तन्हाई बन रही आत्महत्या की वजह, अपनों से बिछड़ने का गम नही हो रहा बर्दाश्त

प्रयागराज: कोरोना संक्रमण की वजह से लोग एक दूसरे से दूरी बना रहें है। संक्रमित होकर लोग दुनिया छोड़कर हमेशा के लिए अपनों से दूर हो जा रहें है। अपनों के द्वारा मिली तन्हाई के गम को लोग बर्दाश्त नहीं कर पा रहें हैं जिस कारण लोग अपनी इहलीला समाप्त करना ही मुनासिब समझ रहें हैं।
जिला मुख्यालय की बात करें तो पिछले दस दिनों में दस लोगों ने आत्महत्या की है। यानी प्रतिदिन एक लोग कोरोना महामारी की वजह से अपनी ज़िंदगी को मिटाने का काम कर रहें हैं। कोरोना काल में कोई पत्नी की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर सका तो किसी ने मां के जाने के बाद इहलीला समाप्त कर ली। लोग अकेलापन बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।
मनोवैज्ञानिक डॉ. रंजना तिवारी ने बताया कि तन्हाई में व्यक्ति अपने आपको अकेला पाकर भविष्य की कल्पना करता है। भूतकाल के बारे में सोचता है। नकारात्मक विचार उसके मन में आते हैं। उसे यह लगता है कि उसके साथ हमेशा ही गलत हुआ है। भविष्य में भी उसे परेशान किया जाएगा। कोई समाधान नहीं दिखता। इस दौरान उसके मन में मानसिक आवेग आती है। इसी दौरान व्यक्ति खुद को असहाय पाकर जान देने की कोशिश करता है।
मनोवैज्ञानिक की सलाह है कि जिंदगी में दोस्ती जरूर करें। दोस्त से ही हम अपनी पीड़ा व्यक्त करते हैं। जिस वक्त किसी के मन में आत्मघाती विचार आते हैं, वह समय बहुत ही खतरनाक होता है। अगर उस वक्त किसी से बातचीत हो जाए। उसके मन की बात सामने आ जाए तो स्थिति संभल जाएगी। परिवार में पति पत्नी को उनकी हरकतों से ध्यान देना चाहिए। तनाव होने पर मनोवैज्ञानिक से काउंसिलिंग करानी चाहिए ताकि उनके मन से नकारात्मक विचार दूर किया जा सके।
ज़िन्दगी की गम को बर्दाश्त कर पाए ये लोग
30 अप्रैल-करेली की रागिनी शुक्ला ने मां की मौत के बाद नए पुल से यमुना में कूद कर दी जान।
30 अप्रैल-कौशाम्बी के रहने वाले युवक आसिफ ने करेली में आकर फांसी लगा ली थी।
29 अप्रैल-कटरा के संजय सिंह की पत्नी मायके में थी। रात में उसने फांसी लगा ली थी।
28 अप्रैल-सेना का जवान महेंद्र सिंह छिवकी सीओडी में फांसी पर लटका मिला।
28 अप्रैल-करहेंदा के अनिल कोरोना काल में पत्नी की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर सके।
27-अप्रैल-अतरसुइया के रहने वाले इरफान ने नए यमुना पुल से कूद कर जान दे दी।
23 अप्रैल-प्रतापगढ़ के कन्हैया लाल ने फाफामऊ पुल से गंगा में कूदकर जान दे दी।
22 अप्रैल-कर्नलगंज के अरविंद यादव को पत्नी छोड़ गई थी। फांसी लगाकर जान दी।
20 अप्रैल-कर्नलगंज का सुरेंद्र पत्नी को लेने ससुराल गया। नहीं लौटी तो फांसी लगा ली।
