Top
Home > राज्य > उत्तरप्रदेश > अन्य > हुरियारिनों की प्रेम पगी लाठियों की चोट से आनंदित हो उठे नंदगांव के हुरियारे

हुरियारिनों की प्रेम पगी लाठियों की चोट से आनंदित हो उठे नंदगांव के हुरियारे

हुरियारिनों की प्रेम पगी लाठियों की चोट से आनंदित हो उठे नंदगांव के हुरियारे
X

बरसाना में एक बार फिर साकार हुई कृष्णकालीन लठामार होली लीला

बरसाना। नैक आगे आ श्याम तो पै रंग डारूं, नैक आगे आ......। बरसाना की रंगीली गली में हुरियारों और हुरियारिनों के बीच पहले हंसी ठिठौली और फिर लाठियों की तड़तड़ाहट के बीच आनंद में सराबोर हुरियारे और श्रद्धालु होली की मस्ती में ऐसे आनंदित हुए मानो तीनों लोकों का सुख उनको नसीब हो गया।

कृष्णकालीन होली भगवान कृष्ण की लीलाओं की पुनरावृत्ति है मान्यता है कि कृष्ण अपने सखाओं के साथ कमर में फेंटा बांधकर राधारानी और उनकी सखियों के साथ हंसी ठिठोली करते हुए होली खेलते थे। आज भी इसी परम्परा का निर्वहन उसी कृष्णकालीन रूप में किया जाता है।

रंगीली गली आज के आंनद स्वर्ग और अपवर्ग के सुख को फीका करती मालूम दे रही है। हुरियारिनें हाथों में चमचमाती लाठियां लिए घूंघट की ओट से हुरियारों पर तड़ातड़ प्रहार कर रही हैं। हुरियारे अपनी ढालों पर इन प्रहारों को झेल कर अपने को बचा रहे है रहे। स्त्री आज उन्मुक्त है और पुरुष रक्षा आवरण के होते हुए भी असहाय होता दिख रहा है। पुरुष का नारी शक्ति के सामने समर्पण और प्रतिकार न कर पाने का यह दृश्य दुनिया को नारी तत्व की प्रधानता का सन्देश दे रहा है कि संसार मातृत्व शक्ति से द्वारा ही संचालित है। इस दृश्य को देखने के लिए देश विदेश से लाखों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

शुक्रवार को सुबह से ही समूची राधा नगरी उत्साह और उल्लास से लबरेज दिखाई दे रही थी। देश दुनिया में विख्यात लठामार रंगीली होली का आनंद उठाने को लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। कस्बे की हर एक गली श्रद्धालुओं के आवागमन की चहल पहल की गवाह बनी। रंगीली गली में तो पैर रखने को भी जगह नहीं मिली। बालक, युवा और वृद्ध सभी का जोश देखते ही बन रहा था। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने गहवर वन की परिक्रमा लगाना शुरु कर दिया।

परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु जोश व मस्ती से नाचते कूदते होली के भजन गाते चल रहे थे। श्रद्धालुओं ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी। कस्बे की गलियों में खडे स्थानीय लोगों ने परिक्रमा लगा रहे श्रद्धालुओं पर गुलाल और रंग की बारिश की। श्यामा श्याम मंदिर, गोपाल जी मंदिर, राम मंदिर, सांकरी खोर, विलास गढ, गह्वर वन, रस मंदिर, मोर कुटी, राधा सरोवर, मान गढ, दानगढ और कुशल बिहारी मंदिर से होते हुए परिक्रमार्थी लाडिली जी के मंदिर में पहुंचे। मंदिर में लोगों ने राधा रानी के चरणों में गुलाल भेंट किया। हुरियारिनें सुबह से ही होली की तैयारियों में जुटी हैं। हुरियारिनों का उत्साह देखते ही बन रहा है।

इधर नंद भवन से कान्हा की प्रतीक ध्वजा के पीछे पीछे हुरियारे नाचते झूमते गाते आये। मुख पर पसीना झलक रहा है लेकिन थकान कहीं भी दिखाई नहीं दे रही है। बरसाना में पहुंचते ही प्रिया कुंड पर सब इकठ्ठे हो गए। बरसाना के गोस्वामी समाज के मुखिया के नेतृत्व में हजारों बरसानावासी उनके स्वागत को जा पहुंचे हैं। भांग की ठंडाई में केवडा, गुलाबजल ओर मेवा घोल कर हुरियारों को पिलाई जा रही है। जो कभी भांग नहीं पीता वो हुरियारा भी आज भांग पिये बिना रह नहीं पाता। यहा पर हुरियारों ने अपने सिरों पर पाग बांधी हैं। प्रिया कुंड के घाटों पर सैंकड़ों हुरियारे एक दूसरे के पाग बांध रहे हैं। जो छोटे बच्चे पहली बार होली खेलने आए हैं उनके पिता या दादा उनकी पाग बांध रहे है। मंदिर में दोनों गांवों के गोस्वामियों के मध्य संयुक्त समाज गायन किया गया। समाज गायन में दोनों पक्ष एक दूसरे पर प्रेम भरे कटाक्ष करने लगे। समाज गायन के बाद हुरियारे मंदिर से उतर कर रंगीली गली में आ पहुंचे। रंगीली गली में हुरियारिनें अपने द्वारों पर टोल बना कर खडी हुई है। हुरियारों ने उनको देखकर पंचम वेद के प्रचलित पदों का गायन शुरु कर दिया।

बरसाना की लठामार होली को लेकर पुलिस व प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये थे। इस बार सुरक्षा के मद्देनजर बीएसएफ के जवान भी तैनात किये गये। वहीं हर स्थिति से निपटने के लिये प्रशासन भी मुस्तैद नजर आया।

नहीं होता है कभी कोई चुटैल

लठामार रंगीली होली लाठियों और ढाल का पर्व है। हुरियारिनों अपनी पूरी ताकत से प्रेम पगी लाठियों से प्रहार करती हैं। हुरियारे जिनमें तीन साल के बच्चे से लेकर 80-90 साल तक के बुजुर्ग शामिल होते हैं। गठिया के बुजुर्ग भी कुशलता से ढाल लेकर लाठियों का प्रहार झेलते हैं। अक्सर लाठियां लग भी जाती हैं। हल्की फुल्की चोटें भी लग जाती हैं।

परंपरा के अनुसार ब्रजरज को चोट पर लगा लिया जाता है। मान्यता है कि इसी ब्रजरज से घाव भर जाता है। लठामार के कारण आज तक किसी को कोई ऐसी चोट नहीं लगी कि डाक्टर के पास जाने की नौबत आई हो।

Updated : 2019-03-15T22:09:54+05:30

Naveen

Swadesh Contributors help bring you the latest news and articles around you.


Next Story
Share it
Top