चित्रकूट: जेल में ही शातिर अंशुल दीक्षित ने माफिया मुकीम काला एवं मेराजुद्दीन को गोली से उड़ाया, खुद भी बना पुलिस की गोली का शिकार

चित्रकूट: जेल में ही शातिर अंशुल दीक्षित ने माफिया मुकीम काला एवं मेराजुद्दीन को गोली से उड़ाया, खुद भी बना पुलिस की गोली का शिकार
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अंशुल दीक्षित नामक बंदी ने मेराजुद्दीन एवं मुकीम उर्फ काला की तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी। मुकीम काला पश्चिम यूपी का बड़ा बदमाश था। बाद में अंशुल दीक्षित भी पुलिस कार्रवाई में मारा गया।

चित्रकूट: जिला जेल में शुक्रवार को गैंगवार हो गया। इस दौरान जेल के अंदर शातिर ने पश्चिम यूपी के दो बदमाशों की गोली मारकर हत्या कर दी। जेल के अंदर ही पुलिस ने आरोपित को गोलियों से भून दिया। तीन की मौत के बाद जिले में हड़कंप मच गया। डीएम एवं एसपी मौके पर पहुंचे। शुक्रवार दोपहर जेल के अंदर गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा परिसर सहम गया। अंशुल दीक्षित नामक बंदी ने मेराजुद्दीन एवं मुकीम उर्फ काला की तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी। मुकीम काला पश्चिम यूपी का बड़ा बदमाश था। बाद में अंशुल दीक्षित भी पुलिस कार्रवाई में मारा गया।

प्राप्त सूचना के अनुसार चित्रकूट जिला जेल की उच्च सुरक्षा बैरक में अंशु दीक्षित पुत्र जगदीश निरुद्ध था। उसे जिला जेल सुल्तानपुर से प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित कर चित्रकूट लाया गया था। अंशु ने शुक्रवार सुबह लगभग 10 बजे सहारनपुर से प्रशासनिक आधार पर आए बंदी मुकीम काला तथा बनारस जिला जेल से प्रशासनिक आधार पर आए मेराज अली को असलहे से मार दिया। साथ ही पांच अन्य बंदियों को अपने कब्जे में कर लिया। उन्हें जान से मारने की धमकी देने लगा, क्योंकि उसके पास असलहा था। ऐसे में जिला प्रशासन को सूचना दी गई।


चित्रकूट के डीएम और एसपी ने मौके पर पहुंचकर बंदी को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इसके बावजूद वह पांच अन्य बंदियों को भी मार देने की धमकी देता रहा। उसकी आक्रामकता तथा जिद को देखते हुए पुलिस ने कोई विकल्प न देखते हुए जवाबी फायरिंग की। जिसमें अंशु दीक्षित भी मारा गया। इस प्रकार कुल 3 बंदी इस घटना में में मरे गए हैं, जिसमें अंशु दीक्षित पुलिस की गोली का शिकार हुआ है। वहीं, मुकीम काला और मेराज अली को अंशु दीक्षित ने असलहे से मारा है। जिलाधिकारी तथा एसपी की मौजूदगी में कारागार की तलाशी कराई गई है। फिलहाल कारागार में शांति कायम और स्थिति नियंत्रण में है।

जेल में कैसे पहुंच गया तमंचा :

चित्रकूट जिला जेल में पुख्ता सुरक्षा-व्यवस्था की पोल शुक्रवार को खुल गयी। यहां तैनात कुछ सिपाहियों की उगाही की शिकायतों को नजरअंदाज करना जेल प्रशासन को महंगा पड़ गया। सूत्र बताते हैं कि पैसों के लालच में गेट पर जांच नहीं की गई। इसलिए तमंचा (रिवाल्वर) को अवैध तरीके से अंदर पहुंचाया गया। जिसके बाद शुक्रवार को आखिरकार गैंगवार की वारदात हो गई। जिसमें तीन बड़े बदमाशों की जान चली गई।

ददुआ का गैंग जेल में बंद :

चित्रकूट जिला जेल में ददुआ गैंग के राधे समेत आधा दर्जन बदमाश बंद हैं। कुछ समय के लिए यहां विधायक विजय मिश्र को रखा गया था। इस समय जेल में लगता ही नहीं था कि कोई सुरक्षा के प्रबंध है। जेल में मारा गया मुकीम काला वही अपराधी है जिसने एनआईए अफसर तंजील अहमद को दिन दहाड़े मौत के घाट उतार दिया था। मुकीम काला मुख्तार अंसारी का खास गुर्गा था।

खुद ही सेटिंग से पहुचा चित्रकूट जेल :

अंशु दीक्षित ने खुद से सेटिंग कर चित्रकूट जेल पहुंचने की कहानी सामने आ रही है। कालिया (काला) को मारने के लिए उसने सेटिंग से ट्रांसफर करवाया। अंशु दीक्षित पश्चिमी यूपी का कुख्यात अपराधी है। बताया जा रहा है कि उसने कालिया को मारने की सुपारी ली थी। इसे अंजाम देने के लिए उसने सेटिंग से चित्रकूट जेल में अपना ट्रांसफर करवाया था।

2008 में पहली बार पकड़ा था अंशु :

सीतापुर जिले के मानकपुर कुड़रा बनी गांव का मूल निवासी अंशु दीक्षित लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र के रूप दाखिला लेने के बाद अपराधियों के संपर्क में आया था। वर्ष 2008 में वह गोपालगंज (बिहार) के भोरे में अवैध असलहों के साथ पकड़ा गया था। अंशु दीक्षित को दिसंबर 2019 में सुल्तानपुर जेल में वीडियो वायरल होने के बाद चित्रकूट जेल भेजा गया था।

वाराणसी से लाया गया था

मेराजुद्दीन : कारागार विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार चित्रकूट जेल की घटना में मृत मेराजुद्दीन उर्फ मेराज अली 20 मार्च, 2021 को जिला जेल वाराणसी से प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित करके लाया गया था। दूसरा मृत बंदी मुकीम काला 7 मई, 2021 को जिला जेल सहारनपुर से प्रशासनिक आधार पर लाया गया था। उक्त दोनों बंदियों को असलहे से मारने वाला तथा बाद में पुलिस द्वारा की गई सुरक्षात्मक कार्रवाई में मारा गया तीसरा बन्दी अंशु दीक्षित प्रशासनिक आधार पर 8 दिसंबर, 2019 को जिला जेल सुल्तानपुर से लाकर निरुद्ध किया गया था।

जेल में हत्या पर विपक्ष का हमला :

चित्रकूट जिला जेल में गैंगवार पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रदेश प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने कहा है कि जेल के अंदर हत्या यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश को बीजेपी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने जंगल प्रदेश और नरक प्रदेश बना दिया है। बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ हर मोर्चे पर विफल हैं। दिन पर दिन अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं। क्या जेल में भी हत्या जैसी घटनाओं से पता नहीं चलता कि अपराधियों को सरकार का संरक्षण है?

योगी से संभल नहीं रहा प्रदेश :

कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने कहा कि योगी से अब उत्तर प्रदेश संभल नहीं रहा है। मुख्यमंत्री आप पनौती बन चुके हैं उत्तर प्रदेश के लिए। उत्तर प्रदेश को मुक्त करिए और वापस जाइए। उत्तर प्रदेश को चला पाना आपके बस की बात नहीं है। उन्होंने कहा है कि कोरोना महामारी में भी सरकार न तो बेड दे पा रही है न ऑक्सीजन, ऊपर से दवाइयों की कालाबाजारी हो रही है। उसके बाद दिन पर दिन अपराध बढ़ते चले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री आप उत्तर प्रदेश को बख्श दीजिए। उत्तर प्रदेश अब आपसे मुक्ति चाहता है।

चित्रकूट जेलकांड के बदमाशों का आपराधिक इतिहास

अंशु दीक्षित: पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी का खास एवं शार्प शूटर था अंशु दीक्षित। वह मूलतः सीतापुर का रहने वाला था। उसने 27 अक्तूबर, 2013 को मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश एसटीएफ पर भी गोलियां चलाई थीं। दिसंबर 2014 में इसे पकड़ा गया था। चित्रकूट जेल आधुनिक होने से इसे यहां करीब दो साल पहले भेजा गया था। पूर्वांचल के माफियाओं का चहेता भी बताया जाता है।

मेराज अली: वाराणसी का रहने वाला था मेराजुद्दीन उर्फ मेराज अली। पहले मुन्ना बजरंगी का खास था, फिर मुख्तार की गैंग से जुड़ा। इसकी अंशु दीक्षित से तनातनी रहती थी। संभव है उसी खुन्नस में अंशु ने इसे मार गिराया।

मुकीम काला : पश्चिमी यूपी के दुर्दांत अपराधी एवं एसटीएफ के हाथों में मुठभेड़ में मारे जा चुके वसीम काला का भाई था। पंजाब, हरियाणा तक इसका गैंग वारदातें करता था। इसने सहारनपुर में वर्ष 2015 में तनिष्क ज्वैलरी शोरूम में डकैती कांड को अंजाम दिया था। दर्जनों लूट, हत्या एवं मुठभेड़ के मुकदमे दर्ज हैं।

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