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दूध बहने पर इतनी पीड़ा और खून बहने पर बोलती बंद-मनोज तौमर

सामाजिक विकृतियों के लिए समाचार पत्र पचास प्रतिशत जिम्मेदार

दूध बहने पर इतनी पीड़ा और खून बहने पर बोलती बंद-मनोज तौमर

मनोज तौमर।


विजय कुमार गुप्ता

मथुरा। प्रबुद्ध विचारक एवं जीव जंतुओं के प्रति अपार स्नेह रखने वाले मनोज तौमर ने कहा है कि सावन के पहले सोमवार को देश के एक प्रमुख समाचार पत्र ने एक बड़ा लेख छाप कर लोगों से अपील की थी कि शिवजी तथा अन्य देवी-देवताओं पर दूध चढ़ाकर नालियों में न बहाऐं क्योंकि इससे प्रदूषण फैलता है। समाचार पत्र ने सुझाव दिया कि केवल दो बूंद दूध शिवजी या अन्य देवी-देवताओं पर चढ़ा कर शेष दूध को गरीबों के बच्चों को बांट दें।

मनोज तौमर का कथन है कि सुझाव तो अच्छा है किंतु जब ईद पर करोड़ों निरीह और बेजुबान पशुओं की हत्या करके उनका खून नालियों में बहाया जाता है तब उससे प्रदूषण नहीं होता क्या? उस पर अखबार ने कोई टीका टिप्पणी या सुझाव नहीं दिया। उनका कथन है कि इस विषय पर बोलने की हिम्मत किसी भी समाचार पत्र में नहीं है। उनका कथन है कि जब दो बूंद दूध देवता को चढ़ा कर शेष दूध गरीब बच्चों को बांटा जा सकता है तो फिर इसी प्रकार का प्रतीकात्मक कार्य इन निरीह जानवरों की रक्षा कर के भी तो किया जा सकता है इस पर चुप्पी क्यों?

मनोज तौमर कहते हैं कि इन निरीह और बेजुवानों की हत्या करने के बजाय उनका कुछ बूंद खून इंजेक्शन से निकालकर प्रतीकात्मक कुर्बानी या बलि करके भी तो मन को तसल्ली दी जा सकती है जिससे उन प्राणियों की जीवन रक्षा हो सकेगी। इससे बड़ा पुण्य और क्या होगा? उनका कथन है कि ऐसा नहीं कि सिर्फ ईद पर ही मुसलमानों द्वारा बकरों की हत्या की जाती है और उसे नाम कुर्बानी का दिया जाता है। हिन्दुओं में भी बलि का नाम देकर बकरों की ही नहीं अन्य अनेक निरीह पशुओं की हत्या की जाती है जो अत्यंत घृणित है। श्री तौमर कहते हैं कि कोई भी जाति या धर्म हो, सभी को अपने अन्दर दया भाव रखकर इन्सानी धर्म निभाना चाहिए। वे कहते हैं कि मुसलमानों में भी बहुत से लोग ऐसे हैं जो मांसाहार तो क्या प्याज तक नहीं खाते, रहीम दास और कबीर दास भी तो मुसलमान थे और हिन्दुओं में भी ऐसे क्रूर हैं जो बगैर मांस मदिरा के एक दिन भी नहीं रह सकते।

मनोज तौमर कहते हैं कि वर्तमान सामाजिक विकृतियों के लिए समाचार पत्रों की भूमिका पचास प्रतिशत है। ज्यादातर समाचार पत्र और उनके प्रतिनिधि केवल उन समाचारों को छापते हैं जिनसे उन्हें लाभ होता है और पुलिस व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की चापलूसी में लगे रहते हैं। वे अपना ही एक उदाहरण देकर बताते हैं कि सन 2012 में उनके साथ ढाई लाख की नकदी, मोटरसाइकिल और दो मोबाइलों की लूट हुई। उस समय वे एक फाइनेंस कंपनी से जुड़े हुए थे।

मांट क्षेत्र के कराहरी गांव निवासी श्री तौमर कहते हैं कि यह लूट मांट ब्रांच गंग नहर की पटरी पर नशीटी गांव के पास हुई। उस दौरान बदमाशों ने सर पर तमंचे की बटें मारी तथा गोली भी चलाई किंतु फायर मिस हो गया। जब यह लूट हो गई तब उन्होंने बमुश्किल तत्कालीन सीओ मांट मुकुल द्विवेदी से कह सुनकर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और उसके बाद क्षेत्र के सभी बड़े समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों से समाचार छापने को कहा किंतु किसी ने भी समाचार नहीं छापा जबकि सभी पत्रकार उनके जान पहचान और दुआ सलाम वाले थे और जब कुछ दिन बाद उन्होंने भागदौड़ करके बदमाशों को पकड़वाया तथा मोटरसाइकिल और नकदी की बरामदगी हुई तब पुलिस ने मामले का वर्क आउट किया। फिर तो क्षेत्र के सभी खबरची आनन-फानन में पहुंच गए तथा घटनाक्रम और बरामदगी को प्रमुखता से छापा।

श्री तौमर कहते हैं कि यह हाल लगभग सभी जगह है। एक मजेदार बात उन्होंने और बताई की एक प्रमुख समाचार पत्र के संवाददाता की मोटरसाइकिल भी उसी दौरान मांट क्षेत्र से चोरी हो गई जो आज तक नहीं मिली। अब वही संवाददाता पुलिस को कोसता रहता है तथा उनकी मोटरसाइकिल व ढाई लाख की लूट का समाचार न छापने का प्रायश्चित अक्सर करके अपनी गलती मानता है।

Updated : 31 July 2020 2:55 PM GMT

स्वदेश मथुरा

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