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कहीं देवराहा बाबा की भविष्यवाणी सच तो नहीं होने जा रही ?

कहीं देवराहा बाबा की भविष्यवाणी सच तो नहीं होने जा रही ?


विजय कुमार गुप्ता

मथुरा। योगिनी एकादशी पर ब्रह्मांड फाड़ कर देह त्यागने वाले महान संत देवराहा बाबा की भविष्यवाणी कही सच तो नहीं होने जा रही? बाबा अक्सर अपने भक्तों से कहा करते थे कि आने वाले समय में पृथ्वी की तीन चौथाई आबादी साफ हो जाएगी।

बाबा जिस आने वाले समय की बात किया करते थे वह कहीं यही तो समय नहीं? लोगों के मन में इस प्रकार की आशंका बार-बार उठ रही है और यह कल्पना करके कि कहीं आने वाला समय यही तो नहीं? हृदय कांपने लगता है। ईश्वर करे महामारी यहीं थम जाए और जनजीवन सामान्य होने लगे। देवराहा बाबा कहते थे कि जब धरती पर महामारी का प्रकोप होगा तब उनमें वे लोग ज्यादा मरेंगे जो ईश्वर को नहीं मानते तथा अहंकारी हैं और अंडा मांस मदिरा आदि का सेवन करने वाले हैं। बाबा ने जो बातें कहीं और जैसा माहौल बन रहा है उससे तो यही प्रतीत हो रहा है कि शायद उनकी भविष्यवाणी सच होने जा रही है। अब समय आ गया है कि हम सभी मिलकर गलत व्यसनों को छोड़ें और परमार्थी बने तथा ईश्वर से प्रार्थना करें कि हे परमपिता परमात्मा कृपा करो और जैसे भी हो आपदा की इस घड़ी से उबारो। हम सभी को किसी भी प्राणी की हत्या नहीं करनी चाहिए तथा किसी के साथ धोखा बेईमानी और छल कपट नहीं करना चाहिए।

अब तक जो अपराध हम लोगों से बने हैं उनके लिए ईश्वर या ईश्वर का ही दूसरा स्वरूप प्रकृति और इस धरा (पृथ्वी) से क्षमा मांगनी चाहिए अब तक किए गए अपने पापों के लिए यही सबसे अच्छा और सच्चा प्रायश्चित होगा। पुराने बुजुर्ग लोग प्रातः उठते ही नीचे पैर रखने से पूर्व जमीन का स्पर्श करके अपने मस्तक से लगाते और कहते थे धरती माता तू बड़ी तोसे बड़ों न कोए, सबेरे उठकर पग धरूं बैकुंठ बसेरो होय। यह पृथ्वी माँ ही हमको अपनी गोद में बैठाकर लालन पालन कर रही है पृथ्वी के बाद नंबर आता है सूर्य नारायण भगवान का, जिनकी कृपा से यह सारा संसार पल रहा है। यही स्थिति प्रकृति की है जिसकी वजह से हवा वृक्षावलि और जल आदि से हम सभी पोषित हो रहे हैं। हमारी संस्कृति कृतज्ञ संस्कृति है अतः हम सभी को .कृतज्ञ होना चाहिए। यह दुर्भाग्य है कि कृतज्ञता लोप होती जा रही है और कृतघ्नता दिन दूनी रात चौगुनी फल फूल रही है। इसी का यह दुष्परिणाम है जो चारों ओर दिखाई पड़ रहा है।

Updated : 6 April 2020 2:21 AM GMT

स्वदेश मथुरा

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