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उप्र में 99% पुरुष मोबाइल के चक्कर में हो रहे हादसा

उप्र में 99% पुरुष मोबाइल के चक्कर में हो रहे हादसा
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लखनऊ। मोबाइल पर बातें करते वक्त करीब 40 प्रतिशत तक सड़क हादसे हो रहे हैं। इसमें 99 प्रतिशत पुरुष व एक फीसदी महिलाएं चोटिल होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। यह खुलासा केजीएमयू ट्रॉमा सर्जरी विभाग के शोध में हुआ है।

केजीएमयू ट्रॉमा सर्जरी विभाग ने अब तक 900 घायलों का ब्यौरा जुटाया है। 18 से 49 साल के घायलों को शोध में शामिल किया गया है। होश में अस्पताल पहुंचे घायलों से डॉक्टरों की टीम ने बात की। जिसमें घायलों ने मोबाइल पर बात करने की बात कुबूल की है। बेहोश या फिर अति गंभीर मरीजों को शोध में शामिल नहीं किया गया है।

ट्रॉमा सर्जरी विभाग के मुताबिक मोबाइल पर बात करने के अलावा लोग वाट्सएप का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। संदेश भेजते व पढ़ते हैं। ऐसे लोगों की संख्या करीब 10 प्रतिशत है। यह भी हादसे की बड़ी वजह बन गया है।

बहुत से पैदल चलते वक्त फोन पर बात करते हैं। वाट्सएप देखते हैं। ये लोग मोबाइल में इतना मगन हो जाते हैं कि कब यह सड़क किनारे से बीच में पहुंच जाते हैं। पता नहीं चलता। ऐसे में पीछे या आगे से आ रहे वाहन की चपेट में आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे 11 प्रतिशत घायल अपताल पहुंचे।

काफी लोग नशे में धुत्त होकर गाड़ी चलाते हैं। ये लोग खुद के अलावा दूसरे लोगों की भी जान जोखिम में डालते हैं। दो से तीन प्रतिशत लोग नशेड़ियों की वजह से अस्पताल पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा हाथ-पैर के फ्रैक्चर, पेट व छाती में चोट लगे मरीज आ रहे हैं। भीषण हादसे में सिर में चोट लगने की आशंका अधिक रहती है।

तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने का शौक भी जिन्दगी पर भारी पड़ रहा है। डॉ. समीर मिश्र के मुताबिक सड़के पहले के मुकाबले बेहतर हुई हैं। हाईवे की संख्या में भी इजाफा हुआ है। ऐसे में लोगों के गाड़ियों की रफ्तार भी बढ़ी। मोबाइल पर बात करना और भी घातक हो गया है। दुखद यह है कि तेज रफ्तार में हादसा होने पर मल्टीपल इंजरी यानी कई अंगों में फ्रैक्चर हो रहा है।

Updated : 8 Nov 2020 8:15 AM GMT
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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