ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन ने 2 अक्टूबर को नो यूपीआई डे का ऐलान किया है। दुकानदार UPI नहीं लेंगे। इसलिए कैश साथ रखें। सुप्रीम कोर्ट ने नए चार्ज पर रोक से इनकार किया।
नई दिल्ली। अगर आप 2 अक्टूबर को नया फोन या मोबाइल एक्सेसरीज खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो जेब में कैश रखकर निकलें। ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन यानी AIMRA ने इस दिन को नो UPI डे घोषित किया है। देश भर के मोबाइल दुकानदार उस दिन यूपीआई से भुगतान नहीं लेंगे। वजह है सरकार का वह फैसला, जिसके तहत 15 अक्टूबर से कुछ यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगने जा रहा है।
काले कपड़े से ढकेंगे QR कोड
विरोध के तौर पर दुकानदार अपने काउंटरर पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड को काले कपड़े से ढक देंगे। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और दिल्ली एनसीआर अध्यक्ष तरविंदर सिंह का कहना है कि उन्हें डिजिटल पेमेंट से कोई दिक्कत नहीं है। आपत्ति सिर्फ उस अतिरिक्त खर्च से है, जो दुकानदारों पर डाला जा रहा है।
क्या है नया यूपीआई चार्ज
बता दें कि 2000 रुपये से ऊपर के कुछ चुनिंदा पर्सन टू मर्चेंट भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगेगा। यह अधिकतम 300 रुपये प्रति लेन-देन होगा। रेलवे, टेलीकॉम, पेट्रोल पंप और बीमा जैसे सेक्टर में 2000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट चार्ज लगेगा। म्युचुअल फंड और शेयर बाजार से जुड़े भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत चार्ज होगा।
आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा बोझ
आम ग्राहकों के आपसी ट्रांसफर और 2000 रुपये तक की खरीददारी पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। महीने में 1 लाख रुपये तक यूपीआई के कारोबार करने वाले छोटे दुकानदार भी इससे बेहतर हैं। सरकार का दावा है कि करीब 96 प्रतिशत लेन-देन पहले की तरह मुक्त रहेंगे। नियम के अनुसार, दुकानदार यह शुल्क ग्राहक से नहीं वसूल सकते, लेकिन कुछ विक्रेता कीमतें बदलकर इसकी भरपाई कर सकते हैं।
दुकानदारों की नाराजगी की वजह
मोबाइल रिटेल में मार्जिन पहले से बहुत कम होता है। AIMRA ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को दिए ज्ञापन में बताया कि महीने में 5 से 30 लाख रुपये का यूपीआई कारोबार करने वाले दुकानदार पर हर महीने 2000 से 12000 रुपये का बोझ पड़ेगा। पूरे देश के मोबाइल विक्रेताओं पर हर महीने करीब 40 करोड़ और सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये का असर आएगा। एसोसिएश की मांग है कि यूपीआई मर्चेंट पेमेंट पर जीरो एमडीआर जारी रहे।
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
दरअसल, सोमवार के सुप्रीम कोर्ट ने इन चार्जेस पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र और आरबीआई से चार हफ्ते में हलफनामा मांगा है। याचिका वकील अंजन दत्ता ने दायर की है। केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने कहा कि 96 प्रतिशत लोग नए ढांचे से बाहर हैं। पीठ ने इसे कानूनी से ज्यादा तकनीकी मामला बताया।