आज कल खान पान की विविधता के साथ ही भोजन में केवल स्वाद का विषय ही बन के रहा गया हैं। हम यह भी भूल गए की भोजन देह को तो तंदुरुस्त ही नहीं...
Vishal Anand Beder: क्या आप है एसिडिटी से पीड़ित? तो अब ज्योतिष से होगा सटीक इलाज, जानिए |
विशाल आनंद बेडर, ज्योतिषाचार्य: आज कल खान पान की विविधता के साथ ही भोजन में केवल स्वाद का विषय ही बन के रहा गया हैं। हम यह भी भूल गए की भोजन देह को तो तंदुरुस्त ही नहीं अपितु हमारे मन पर भी प्रभाव डालता हैं। लेकिन आज हम इस विषय पर बात नहीं कर रहें हैं, आज तो बात होगी केवल एसीडीटी और ज्योतिष पर, इस रोग को हम पहले विज्ञान की भाषा में समझते हैं। हमारे आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक एसिड होता हैं। जो अधिक मात्रा में बनने के कारण यह एसिड हमारे मुंह की तरफ आने लगता हैं जिससे खट्टी डकारे, भोजन का वापस मुंह में आने जैसा लगता। इसी को हम एसिडिटी कहते हैं, लंबे समय तक यह रहें तो अल्सर जैसी खतरनाक बीमारी का कारण बन जाती हैं। अब इस बीमारी को हम देश के जाने माने ज्योतिषाचार्य विशाल आनंद बेडर से पूछे गए प्रश्नों से समझते हैं।
प्रश्न :- एसीडीटी को ज्योतिष से समझा जा सकता है क्या ? ये तो आज कल सामान्य सी बीमारी हैं और हर दूसरे आदमी को हैं।
उत्तर:- ज्योतिष के कुछ भी बाहर नहीं है फिर एसिडिटी कैसे हो सकती हैं । इसे समझने के लिये पहले हम पेट के रोगों की बात करते है, ये रोग जैसे उल्टी- दस्त जैसी बीमारी ज्यादातर वर्षा काल में देखने को मिलती हैं । तो फिर पूरी दुनियां में वर्षा काल में कुछ ऐसा होता हैं जिस कारण इस तरह के रोग अधिक होते हैं । हम देखते हैं वर्षा काल में बादल छाये रहते हैं, तो सूर्य का प्रकाश पूरी तरह से पृथ्वी पर नहीं आ पाता हैं साथ ही जल तत्व की अधिकता हो जाती हैं । तब इस तरह के रोग ज्यादा होते हैं । कहने का आशय केवल इतना हैं कुंडली में सूर्य और चंद्रमा हैं जो एसीडीटी के साथ साथ आमाशय से संबंधित रोगों के कारक होते हैं ।
प्रश्न :- इस जातक को एसीडीटी होगी या नहीं होगी यह एक ज्योतिषी बिना जाने बता सकता हैं क्या ?
उत्तर:- एक बात और समझें, जब जातक अधिक तनाव में होता हैं तब पेट से संबंधित रोग शुरू हो जाते है अर्थात अशुभ अवस्था में सूर्य बहुत अधिक तनाव प्रदान करते हैं । जब कोई बुरी खबर मन पर आघात करती है तो सबसे पहले पेट ही खराब हो जाता हैं, अर्थात मन का कारक चंद्र अशुभ फल प्रदान कर रहा होता हैं तब यही होता हैं । आपका प्रश्न तो सहज ही है एक अच्छा ज्योतिषी बड़े आराम से बता सकता है की आप एसीडीटी से परेशान है अथवा नहीं हैं ।
प्रश्न :- थोड़ा और महीन तरीके से समझाये तो और अच्छा समझ आ जायेगा ?
उत्तर:- आप समझें आमाशय के अंदर कुछ कोशिकाएं होती हैं जो एसीडीटी पैदा करने वाले हाइड्रोक्लोरिक एसिड को निकालती हैं । जब वह सामान्य अवस्था से अधिक एसिड निकालने लगती है तब एसीडीटी होने लगती हैं । उन कोशिकाओं पर प्रतिनिधित्व सूर्य देव का हैं । सूर्य देव अशुभ अवस्था में होते है तो अधिक तनाव प्रदाता हो जाते है जिसके कारण भी अम्ल अधिक निकलता हैं । अधिक महीन किया जाये तो सूर्य को संतुलित कर हम इस रोग से सहज ही आराम पा सकते हैं ।
प्रश्न :- आप अब सूर्य की बात कर रहें है, पहले आप चंद्र को भी इसी में शामिल कर रहे थे अब अकेले सूर्य को दोषी बना लिया आपने ?
उत्तर :- तनाव तो दिमाग में रहता है पर उसके कारण मन उदास हो जाता हैं, या इस बात को यू भी कह सकते हैं जब मन उदास होता है तो तनाव सहज ही हो जाता हैं । इस विषय पर चंद्रमा तो सूर्य के साथ ही है हमेशा हमने उसे बस कहा ही नहीं था अब तो समझ आ गया होगा इस विषय के लिये जब दोनों दोष युक्त होगे तभी इस तरह की बीमारी बनेगी ।
प्रश्न :- एक जटिल बीमारी अल्सर का भी आपने कहा है तो क्या चंद्र सूर्य दूषित तो ये बीमारी होना तय माने क्या ?
उत्तर :- ये तो अधूरी बात हो गई हमने तो कहा हर दूसरे आदमी को एसीडीटी है तो क्या हर दूसरे आदमी को अल्सर भी होगा । हम पेट के सामान्य रोगों की बात कर रहें थे, हाँ प्राथमिक बात यही हैं, अगर मंगल किसी तरह शनि की राशि या शनि के साथ संबंध बनाये और छठे भाव के स्वामी या भाव से संबंध बनाये तो अल्सर होने की संभावना बढ़ जाती हैं । यह रोग कितना जटिल होगा दवाओं से ही आराम होगा या ऑपरेशन होगा यह भी सब ग्रहों के योग के कारण होता हैं ।
प्रश्न :- कोई सहज सा उपाय बताये जिससे हमें यह रोग न हों ?
उत्तर :- ये बात आपने बहुत ही शानदार कही हैं , आपको ज्योतिष का एक सूत्र और बताता हूं सूर्य और चंद्रमा का कारक माता पिता होते हैं । जिन्हें यह रोग है उन्हें सूर्य और चंद्रमा को संतुलित करने के लिये अपने माता पिता का सम्मान करना चाहिये उनके चरण छू कर ही दिन की शुरूवात करनी चाहिये । जो भी ऐसा करता हैं आप देखेंगे उन्हें यह रोग धीरे धीरे परेशान करना बंद कर देगा ।