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कार्यकुशलता के पर्याय नितिन गडकरी

पार्टी में संगठन से लेकर सरकार में मिली जिम्मेदारियों को उन्होंने बखूवी निभाया। खासकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग व जहाजरानी मंत्री, के रूप में तो उन्होंने अपनी कार्यकुशलता और दक्षता का लोहा मनवा दिया।

कार्यकुशलता के पर्याय नितिन गडकरी
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File Photo

भारतीय जनता पार्टी में सौम्य स्वभाव, व्यवहार कुशलता, नीति निर्माता और क्रियान्वयन के पर्याय माने जाने वाले पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी अपनी कार्यशैली के नाम से जाने जाते हैं। गडकरी ने कर्तव्यपरायणता के ढ़ेरों ऐसे मुकाम छोड़े हैं, जिन्हें उंगलियों पर नहीं गिनाया जा सकता। पार्टी में संगठन से लेकर सरकार में मिली जिम्मेदारियों को उन्होंने बखूवी निभाया। खासकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग व जहाजरानी मंत्री, के रूप में तो उन्होंने अपनी कार्यकुशलता और दक्षता का लोहा मनवा दिया। अधिकारी वही हैं, योजनाएं वही हैं लेकिन सीमित संसाधनों के बावजूद गडकरी ने जिस तरह मानव शक्ति व संसाधनों का इस्तेमाल करवाकर विकास के नए-नए आयाम जोड़े, उससे उन्होंने साबित कर दिया कि काम करने का जज्बा हो तो रोड़े बाधक नहीं बना करते। वे खुलकर कहते हैं, मैं भागने वालों में से नहीं, मैं लोहा लेता हूं। उनका यही साहस उन्हें अक्सर चर्चा में भी रखता है और लीक से अलग हटकर काम करने और कराने वाले राजनीतिज्ञों की सूची में भी आगे खड़ा करता है। उनके पास बजट की कमी और नौकरशाहों की शिथिलता के लिए सिर पीटने का वक्त नहीं है। बल्कि उनके रहते मंत्रालय में ऐसे कई उदाहरण जरूर हैं कि नौकरशाही रातों रात फैसला करे। उनकी मानसिक मजबूती व कार्यदक्षता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें गंगाा सफाई से जुड़े मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया। गडकरी तीन-तीन मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। तभी गडकरी का आत्मविश्वास बोलता है, उनकी शारीरिक भाषा और संवाद बेजोड़ बन जाते हैं। हाल ही में उन्होंने संसद में कहा कि बैंकों ने राजमार्ग के निर्माण के लिए 1.30 लाख करोड़ रुपए के वित्तपोषण का आश्वासन दिया है। बैंकों के हवाले का जिक्र करते गडकरी कहते हैं कि उन्होंने सड़क क्षेत्र के वित्तपोषण को लेकर बैंकों, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर तथा केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ बैठकें कीं। इन बैंकों का आश्वासन विकास के लिए प्ररेणापुंज है। वे ईपीसी (इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन) मोड में बनने वाली राजमार्ग परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए 1.30 लाख करोड़ रुपए देने के लिए तैयार हैं।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान 3.85 लाख करोड़ रुपए की लागत वाली 403 परियोजनाएं ठप हुईं। मई 2014 में सत्तासीन होने के बाद मौजूदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने तीन लाख करोड़ रुपए की लागत वाली ठप परियोजनाओं को पटरी पर ला दिया। मई 2014 तक देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 91,000 किलोमीटर थी, जो वाहनों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए अपर्याप्त थी, क्योंकि वाहन उद्योग में सालाना 22 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। मौजूदा सरकार ने इस लंबाई को दोगुना बढ़ाकर 1.80 लाख किलोमीटर कर दिया। इनमें से 1.30 लाख किलोमीटर केंद्र सरकार के अधीन तथा बाकी 50,000 किलोमीटर मुख्य नेशनल हाईवे के अधीन है, जिसका रख-रखाव राज्यों द्वारा किया जाना है। अप्रैल-जून अवधि में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गं प्राधिकरण (एनएचएआई) को 87,663 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, जिनमें से 20,743 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।

जलपरिवहन को भी बढ़ावा

इसके अलावा गडकरी जल परिवहन को भी लगातार बढ़ावा दे रहे हैं पर गंगा में जल स्तर की जो समस्या रहती है उसमें जल परिवहन संभव है क्या? केवल बरसात के तीन माह के दौरान ही मालवाहक जहाज चलाएंगे? इसके जवाब में उन्होंने कई बार संसद के अंदर और बाहर कहा है कि वे पहले तो लोगों के उस भ्रम को दूर करना चाहते हैं कि कम पानी में जहाज नहीं चल सकता। गाजीपुर से हल्दिया तक पानी है। वहीं फरक्का गेट की मरम्मत करके पानी रोका जाएगा। इस पर साढ़े चार सौ करोड़ रुपए खच किए जा रहे हैं। वाराणसी से हल्दिया तक साढ़े तीन मीटर का ड्राफ्ट सुनिश्चित करने की गारंटी के साथ इस हिस्से की ड्रेजिंग का सात साल का काम दिया जा चुका है। इसके अलावा नेवीगेशनल लॉक जैसे तकनीकी उपाय भी अग्रसर हैं। फिर गंगा में गंडक, घाघरा जैसी अनेक नदिया मिलती हैं। इसलिए कोई समस्या नहीं है। केवल 45 मीटर चौड़ाई में जल प्रवाह के लिए तकनीकी क ाइस्तेमाल किया जा रहा है ताकि आसानी के साथ जहाजों का संचालन किया जा सके। जहाजों के अलावा फ्लोटिला की भी डिजाइन की जा रही है जिन्हें आपस में जोड़कर चलाया जा सकता है। उसे केवल 1.8 मीटर ड्राफ्ट चाहिए। फ्लैट बाटम बार्ज का भी उपयोग किया जाएगा। इसकी विशेषज्ञता भारत में नहीं है। इसीलिए हम विश्व बैंक व यूरोपीय कंपनियों की मदद से यह काम किया जा रहा है। देश की 111 नदियों को जलमार्ग बनाने का कार्य प्रगति पर है। इसमें गंगा समेत काफ ी नदियां शामिल हैं। जैसे एयरपोर्ट हैं, बस पोर्ट हैं, वैसे ही रिवर पोर्ट बनाए जा रहे हैं। देश के साढ़े सात हजार किलोमीटर समुद्र के किनारों पर हमारे 12 बड़े पोर्ट हैं। बांग्लादेश ही नहीं, म्यांमार तक सामान जाएगा। गंगा में वाराणसी से हल्दिया तक और फि र बंगाल से ब्रह्मापुत्र तक। वहां से बांग्लादेश के चिटगांव और फिर पूर्वोत्तर तथा आगे म्यामांर तक जाया जा सकेगा। हल्दिया से वाराणसी तक खाद्य तेल लाया जा सकेगा। यह उत्तर प्रदेश के लिए ग्रोथ इंजन साबित हो सकता है। वायु यातायात नियंत्रण की तरह ही गंगा पर नदी यातायात नियंत्रण बनाया है। इससे गंगा में कौन सी नाव कहां जा रही है, कौन कहां डूब रहा है, इस पर निगरानी रखी जा सकेगी। हल्दिया से पटना तक यह बन गई है। इससे रात में भी निगरानी की जा सकेगी। पर सबसे जरूरी यह है कि लोगो को समझना होगा कि रोड से ढ़ुलाई का खर्च प्रति किमी डेढ़ रुपया और रेलवे से एक रुपया है। इसके मुकाबले पानी से केवल 20 पैसे खर्च आता है। जब मारुति की कारें गंगा से जाएंगी तो तीन-चार हजार रुपए सस्ती होंगी। उत्तर प्रदेश में खाद्य तेल हल्दिया से आता है। वहां से दस-बारह टन के ट्रक में वह उत्तर प्रदेश के एक-एक शहर में जाता है। जब 40 नदी पोर्ट बना दिए जाएंगे तो 4 हजार से 5 हजार टन का माल शिप में उत्तर प्रदेश आएगा। वहीं रिफ ानरी होगी। इससे उत्तर प्रदेश में तेल दो रुपये किलो सस्ता हो जाएगा। इसी तरह गेहूं, आम उत्तर प्रदेश से बाहर जाएगा। नागपुर में कपास होता है। वहां से लुधियाना जाता है जहां होजियरी बनती है परंतु फि र निर्यात के लिए जेएनपीटी मुंबई आती है। इससे लागत बढ़ती है। विश्व बाजार में लागत, खासकर ढुलाई लागत या तार्किक कीमत बहुत महत्वपूर्ण है। चीन में यह लागत 18 फ ीसद व यूरोप में 10-12 फ ीसद है। जबकि भारत में 18 फीसद है। इससे हमारा निर्यात महंगा हो जाता है। इसीलिए देश में 20 हजार किलोमीटर जल मार्ग बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

गडकरी के कार्यकाल में योजनाओं को लगे पंख

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा 24 अक्टूबर, 2017 को आयोजित एक बैठक में भारतमाला परियोजना के चरण-1 के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद भारतमाला देश का एक व्यापक राजमार्ग विकास कार्यक्रम बन गया है। भारतमाला राजमार्गों के बुनियादी ढांचे के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। दरअसल, राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एनएचडीपी) 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी नीत राजग सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया देश का पहला प्रमुख राजमार्ग विकास कार्यक्रम था। योजना और निष्पादन के गलियारा पहुंच के आधार पर देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, संचालन और अनुरक्षण के लिहाज से सड़क विकास में एक ऊंची छलांग लगाने की भारतमाला की परिकल्पना है। भारतमाला का उद्देश्य उपयुक्त पहल के जरिए पूरे देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर माल ढुलाई और यात्रियों, दोनों स्तर पर तार्किक संबंधी दक्षता में सुधार करना है।

भारतमाला परियोजना: राजमार्ग विकास का नया आयाम एक सुसंगत गलियारा पहुंच को अपनाते हुए पूरे देश में सड़कों पर यातायात की क्षमता में सुधार किया गया है। इस नेटवर्क से देश के विभिन्न जिलों में लगभग 80 प्रतिशत माल ढुलाई होने की संभावना है। इससे देश में वाहनों की औसत रफ्तार 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी। आर्थिक गलियारों और संबंधित अंतर-गलियारे और फीडर मार्गों के विकास के परिणामस्वरूप सड़कों के ढांचे में सुधार होगा, बाईपास, रिंग रोड्स के माध्यम से भीड़भाड़ समाप्त होगी। गलियारा में प्रवेश व निकासी आधारित टोलिंग के साथ नियंत्रित प्रवेश वाले एक्सप्रेसवे जैसी पहल से राजमार्गों की औसत रफ्तार में अधिक सुधार होगा।

आर्थिक गलियारों में बुनियादी ढांचे में विभिन्नताओं के चलते भीषण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के लिए मुंबई-कोलकाता गलियारे में ओडिशा राज्य में एक बड़ा खंड दो लेन वाला है और वहां भी अक्सर लेन परिवर्तन होते हैं। अगर यह पूरा खंड कम-से-कम एक समान 4-लेन में नहीं बदला गया तो यातायात पर तो असर होगा ही, माल भाड़ा भी बढ़ेगा और इसका असर अंत उत्पाद, स्टील और ऊर्जा पर पड़ेगा। इसी प्रकार देश भर के राजमार्गों में मौजूदा असमानताओं को कम करने की तत्काल जरूरत थी। नए गलियारों और फीडर मार्गों के विकास के अतिरिक्त राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एनएचडीपी) के तहत पहले से विकसित सड़क विस्तारों (स्ट्रेचेज) की क्षमता में सुधार किए जाने की आवश्यकता के मद्देनजर गडकरी के निर्देशन में इस अभियान को गति दी जा रही है।

भारत के पड़ोसी देशों, नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के साथ व्यापार संबंधी कनेक्टिविटी में सुधार के साथ रणनीतिक महत्व के आधार पर सीमा स्थित सड़कों को चिन्हित किया गया है। नौवहन मंत्रालय के सागरमाला कार्यक्रम के साथ तटीय सड़क विकास और बंदरगाह कनेक्टिविटी सड़कों के उन्नयन को सहयोग दिया गया है। भारतमाला परियोजना के तहत छह घटकों को जोड़ा गया है। आर्थिक गलियारा, अंतर-गलियारा और फीडर मार्ग, राष्ट्रीय गलियारा दक्षता सुधार, सीमा और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी सड़क, तटीय और बंदरगाह कनेक्टिविटी सड़क, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे।

चिन्हित किए गए आर्थिक महत्व के गलियारों से आने वाले वर्षों में 25 प्रतिशत माल ढुलाई की संभावना है। एक बार निर्मित होने के बाद राष्ट्रीय और आर्थिक गलियारों, अपने अंतर-गलियारों और फीडर मार्गों के साथ, द्वारा माल ढुलाई के 80 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। लगभग 26,200 किलोमीटर लंबे खंडों को आर्थिक गलियारे के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें से चरण -1 में 9,000 किलोमीटर पर काम किया जाएगा।

मध्य प्रदेश को दी सौगात

केन्द्रीय मंत्री ने सड़क निर्माण की सभी परियोजनाओं का काम जल्द शुरू किए जाने की बात की है। इसके लिए करीब 10 लाख करोड़ रुपए के कामों को मंजूरी दे दी है। अभी तक उनका मंत्रालय प्रदेश को 25 हजार करोड़ रुपए दे भी चुका है।

एनएचडीपी के अंतर्गत 85.31 किलोमीटर लंबी, 830 करोड़ की शिवुपरी-गुना

4-लेन (एनएच-3) का 93 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। एनएच-3 पर ही गुना-ब्यावरा लिंक 93.5 किलोमीटर लंबी 4- लेन का भी 98 फीसदी कार्य पूरा किया जा चुका है। एनएच-7 पर 58.67 करेाड़ लागत वाले लखनादौन - स्योनी 4-लेन का निर्माण कार्य लगभग पूरा किया जा चुका है।

इससे पहले गडकरी ने इसी वर्ष मार्च और मई माह में 2-लेन व 4-लेन की कई परियोजनाओं का शिलान्यास किया। जिनमें मार्च में गडकरी ने नेशनल हाइवे पर ही 752 बी पर खिलचीपुर-जीरापुर क्षेत्र में 17 किलोमीटर लंबी, 101.61 करोड़ लागत की 2-लेन का शिलान्यास किया गया। मई माह में 41.9 किलोमीटर लंबी, 254.17 करोड़ लागत की ब्योरा-मधुसूदनगढ़ 2-लेन का शिलान्यास किया गया। 252 सी के अंतर्गत 39.81 किलोमीटर लंबी, 184.62 करोड़ लागत की पचोर-सुजालपुर 2-लेन परियोजना का शिलान्यास किया गया। इसी पर मई माह में 44.34 किलोमीटर लंबी 235.91 करोड़ लागत की सुजालपुर-आस्था परियोजना का शिलान्यास किया गया। 135 बी के अंतर्गत 36.71 किलोमीटर लंबी, 162 करोड़ की रीवा-सिरमौर 2-लेन का शिलान्यास किया गया। इसके अलावा एनएच-43 विस्तार- के अंतर्गत गुलानी-अमानगंज-पवाई-कटनी 2-लेन, एनएच-43 पर सलेहा-जस्सो-नागोद, एनएच-552 विस्तार मिहोना- लहार -दबोह, एनएच-552 विस्तार दबोह-भांडेर-उप्र सीमा तथा एनएच-347 बी पर ठीकरी-अंजाद 2-लेन परियोजनाओं का भी मई माह में गडकरी ने शिलान्यास किया।

इसके अलावा एनएच-75 पर 76.61 किलोमीटर लंबी, 976 करोड़ लागत की ओरछा-निवाड़ी-बंगरा-मऊरानीपुर- एवं देवरी 4-लेन, एनएच-44 पर महगांव-कुरई-खवासा 4-लेन, एनएच-12 हीरेन नदी पर 64 किलोमीटर लंबे, 64 करोड़ लागत की 4-लेन, एनएच-75 विस्तार रीवा-सीधी बाईपास चुरहट 4-लेन का शिलान्यास किया गया।

उनका मंत्रालय लगातार भ्रष्टाचारमुक्त होने का दावा कर रहा है। वे कहते भी हैं कि अगर कोई गड़बड़ी की तो बुलडोजर के नीचे गिट्टी की जगह उन्हें डाल दिया जाएगा। यही कारण है कि कोई ठेकेदार उनके पास नहीं फटकता। देश में कृषि विकास की गति मात्र 4 से 4.5 प्रतिशत है। महाराष्ट्र में अकेले सिंचाई के लिए 1 लाख करोड़ रुपए मुहैया कराने और काफ ी प्रयास के बाद कहीं कृषि की विकास दर 10 से 12 प्रतिशत पर आ सकी है। इस मामले में केवल मध्यप्रदेश की हालत ठीक है जहां कृषि क्षेत्र में विकास दर 23 प्रतिशत है। गडकरी किसानों की हालत सुधारने बाबत मलेशिया से आ रहे पाम आइल पर ड्यूटी जो शून्य प्रतिशत थी, को 35 प्रतिशत कर दिया है। दाल का आयात करना बंद किया और इंडोनेशिया को कृषि उपज निर्यात करने पर विचार चल रहा है। चीनी का भी निर्यात किया जाएगा।

Updated : 2018-07-23T05:59:49+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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