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बजट-3 : साहस के साथ आगे बढ़ते कदम

ज्ञानेश पाठक

बजट-3 : साहस के साथ आगे बढ़ते कदम

लाभांश कर नीति में बदलाव

बजट की अनेक महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक है - लाभांश कर नीति में बदलाव। आम बजट में कहा गया है कि लाभांश पर कर की देनदारी अब शेयर धारकों की होगी। यानि जो भी शेयर धारक कंपनी से लाभांश प्राप्त करेगा, कर का भुगतान भी वही करेगा। आलोचकों का सरकार पर आरोप है कि पहले से ही परेशान मध्यम वर्ग पर एक और कर चुकाने का भार आएगा। जबकि कंपनियां फायदे में रहेंगी। उनका कहना है कि यह सारी कवायद असल में उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने के लिये है।

हकीकत - किसी भी कंपनी के मालिक उस कंपनी के शेयर धारक ही होते हैं। पहले कंपनियां अपने शेयर धारकों को जो भी लाभांश देती थीं, उस पर टैक्स सरकार को देने की जवाबदारी संबंधित कंपनी की बनती थी। अब उसे बदलकर शेयर धारकों पर डाल दिया गया है। इस व्यवस्था को बदलने के पीछे दो तर्क हैं। पहला, कर का व्यावहारिक सिद्धांत। यानि जिसके हाथ में आमदनी आए, कर भी उसे ही चुकाना चाहिये। दूसरा, दोहरा कराधान। कंपनियां अपने लाभ पर कर चुकाती हैं। लाभ को वह फिर अपने शेयर धारकों में बांटती हैं। सरकार लाभांश वितरण के नाम पर फिर से टैक्स लेती है। वास्तव में सरकार लाभ पर ही कर ले रही होती है।

प्रभाव- साधारण सा दिखाई देने वाला यह कर सुधार आगे चलकर अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालेगा, इसकी उम्मीद की जा सकती है। यह सरकार के राजस्व को प्रभावित करेगा। कंपनियों की नगदी को सुधारेगा। अधिक लाभांश पाने के लिए छोटे निवेशक कंपनियों में निवेश के लिये प्रोत्साहित होंगे।

सरकार को इस बदलाव की कीमत भी चुकानी पड़ सकती है। वास्तव में देखा जाए तो सरकार ने खुद के राजस्व के लिए खासा जोखिम मोल लिया है। कारण एक अच्छी खासी रकम सरकार को इस मद में मिलती है। वह भी आसानी से। व्यक्तिगत आयकरदाताओं की तुलना में सीधा कंपनियों से लाभांश वितरण कर वसूलना ज्यादा आसान और कम खर्चीला है। जानकार मान रहे हैं कि इससे सरकार को 25 हजार करोड़ की रकम से हाथ धोना पड़ सकता है। कहा जा सकता है, इसके बावजूद सरकार ने साहसिक कदम उठाया है।

कंपनियों की दृष्टि से देखें तो अब उनके पास पहले से ज्यादा नगदी होगी। अधिक नगदी का मतलब अधिक निवेश। नया निवेश नौकरियां भी लाएगा। लोगों के पास जब पैसा होगा, वह वापस अर्थव्यवस्था में लौटेगा।

वित्तमंत्री के आलोचकों का यह कहना सही नहीं है, कि छोटे निवेशकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। वास्तव में उन्हें इस प्रावधान का फायदा मिलेगा। नुकसान में अगर कोई रहेगा, तो वह कंपनी के प्रवर्तक सहित बड़े निवेशक हो सकते हैं। कंपनी के प्रवर्तक जो पहले से ही उच्च कर के दायरे में आते हैं, उन्हें प्राप्त लाभांश पर 42.7 प्रतिशत की दर से कर चुकाना होगा। लाभांश वितरण कर करीब 20.56 प्रतिशत है। ऐसे करदाता जिनकी आमदनी 5 लाख से कम है, उन्हें यह कर नहीं चुकाना होगा। 5 लाख से ज्यादा आमदनी वाले करदाता अपने वर्ग के हिसाब से कर चुकाएंगे। इसलिए यह कहना कि छोटे निवेशकों की सरकार ने चिंता नहीं की है, पूरी तरह गलत है।

सही निकला स्वदेश का आकलन

अपने इसी कॉलम में 3 फरवरी के अंक में हमने इशारा किया था 'इंतजार कीजिए, बाजार का खिलना तय है।Ó बाजार वाकई में केवल दो दिनों में खिल गया। बजट के शेयर बाजार बाद जिस तेजी से गिरा था, उसी तेजी से उछल गया। न सिर्फ उसने बजट से पहले की गिरावट की भरपाई की, वरन शेयर धारकों को खुश भी कर दिया।

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