भारत में बढ़ती प्रति व्यक्ति आय

भारत में बढ़ती प्रति व्यक्ति आय
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भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद अब तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था की दौड़ में है। हालांकि प्रति व्यक्ति आय के मामले में वह 190 देशों में अभी भी काफी पीछे है। फिर भी प्रति व्यक्ति आय में लगातार हो रही वृद्धि से यह स्पष्ट है कि भारत आगे बढ़ रहा है। यह भारत के मध्यम आय वर्ग के विस्तार और आकांक्षा-प्रेरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने का संकेत है।

माना जा रहा है कि चार वर्ष बाद, यानी 2030 तक भारत में प्रति व्यक्ति आय 4000 डॉलर होने का अनुमान है। यानी भारत की कुल अर्थव्यवस्था तो तेजी से बढ़ रही है, लेकिन आबादी अधिक होने के कारण प्रति व्यक्ति आय, खासकर डॉलर के मुकाबले, अभी भी कई विकसित देशों से कम है और वैश्विक रैंकिंग में निचले स्तर पर बनी हुई है।

वर्ष 2030 तक भारत अपर मिडिल इनकम कैटेगरी वाले देशों में शामिल हो जाएगा। अगले चार वर्षों के दौरान प्रति व्यक्ति आय में करीब 33 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी होने की संभावना है।

भारतीय स्टेट बैंक की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते भारत वर्ष 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। अर्थव्यवस्था में हो रहे सुधार का असर प्रति व्यक्ति आय पर भी दिखाई देगा।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में भारत में प्रति व्यक्ति आय 2.72 लाख रुपये (3000 डॉलर) होगी। अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ लोगों की आय में भी वृद्धि होगी। ऐसे में जब भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा, तब वर्ष 2030 में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 3.62 लाख रुपये (4000 डॉलर) से अधिक हो जाएगी।

भारत ने आजादी के बाद 60 वर्षों में एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का मुकाम हासिल किया था। इसके बाद केवल सात वर्षों में, वर्ष 2014 तक, यह 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बना। फिर अगले सात वर्षों में, यानी वर्ष 2021 तक, भारत 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया। अब महज चार वर्षों में, वर्ष 2025 में, भारत 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है।

अनुमान है कि 2027-28 तक भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि आर्थिक सुधारों की रफ्तार बनी रहती है तो 2047 तक भारत उच्च आय वाला देश बन सकता है, लेकिन इसके लिए निवेश, उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र को और मजबूत करना होगा।

उच्च आय वाले देशों की श्रेणी में शामिल होने के लिए भारत में प्रति व्यक्ति आय 13,936 डॉलर (12.63 लाख रुपये से अधिक) तक पहुंचनी होगी। इसके लिए भारत को प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय में 7.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर हासिल करनी होगी।

आंकड़े बताते हैं कि बीते 23 वर्षों (2001-2024) के दौरान भारत की प्रति व्यक्ति आय में 8.3 प्रतिशत की सीएजीआर से वृद्धि हुई है। इस लिहाज से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उच्च आय वाले देशों की श्रेणी में शामिल होने के लिए भारत के सामने कुछ चुनौतियां होंगी, क्योंकि वर्ष 2047 तक उच्च आय वाले देशों में प्रति व्यक्ति आय का मौजूदा मापदंड 13,936 डॉलर से बढ़ सकता है। यदि यह सीमा आगे चलकर 18,000 डॉलर हो जाती है, तो भारत को अगले दो दशकों, यानी 23 वर्षों तक, प्रति व्यक्ति आय में 8.9 प्रतिशत की सीएजीआर बनाए रखनी होगी।

कुल मिलाकर भारत इस समय हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है और इसी कारण वैश्विक मंच पर अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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