Top
Home > स्वदेश विशेष > राहुल गांधी के उत्तर-दक्षिण भारत वाले बयान पर गरमाती राजनीति

राहुल गांधी के उत्तर-दक्षिण भारत वाले बयान पर गरमाती राजनीति

सियाराम पांडेय 'शांत'

राहुल गांधी के उत्तर-दक्षिण भारत वाले बयान पर गरमाती राजनीति
X

हाल के दिनों में सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्रियों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां हुई हैं। उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। इसपर विमर्श होना चाहिए कि अचानक राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं और उनसे जुड़े लोगों पर संदेह क्यों होने लगा? यह सच है कि आजादी के बाद से आजतक राष्ट्रपति और राज्यपाल सत्तारूढ़ दल से ही चुने जाते रहे हैं। होना तो यह चाहिए कि इन पदों पर किसी व्यक्ति को बिठाने के पहले यह सुनिश्चित कर लिया जाता कि वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े न हों। उनका किसी राजनीतिक दल के प्रति झुकाव न हो। वे समाजसेवा, चिकित्सा, साहित्य, विज्ञान और कला आदि के क्षेत्र से चुने जा सकते हैं। यह जबतक नहीं होगा तब तक उसकी भूमिका संदेह के कठघरे में खड़ी की जाती रहेगी।

संवैधानिक महत्व के पदों पर बैठे लोगों को भी अपने आचरण से इस बात का अहसास हरगिज नहीं होने देना चाहिए जिससे यह लगे कि उनका किसी दल विशेष के प्रति झुकाव है। राज्यपालों और सरकारों के झगड़े इस बात के संकेत नहीं देते कि वहां सबकुछ ठीक चल रहा है। कोई मुख्यमंत्री अगर राज्यपाल को सरकारी विमान से उतरवा देता है और उसे कढ़ी-पत्ते की उपमा से विभूषित करता है तो राज्य और केंद्र के संबंधों पर सवाल उठना लाजिमी है। राजनीतिक दलों के लोग जहां जाते हैं, उस क्षेत्र की इतनी प्रशंसा कर देते हैं कि दूसरे क्षेत्र के लोग हीन भावना का शिकार होने के लिए अभिशप्त हो जाते हैं। जब जैसा तब तैसा का व्यवहार किसी लिहाज से ठीक नहीं। इस प्रवृत्ति से बचना चाहिए।

राहुल गांधी के केरल और अमेठी को लेकर दिए गए बयान को लेकर देश भर में राजनीति का बाजार गर्म हो गया है। उन्हें उत्तर और दक्षिण की, पूरब और पश्चिम की राजनीति करनी चाहिए या नहीं, इसे लेकर राजनीतिक बहस-मुबाहिसों का सिलसिला तेज हो गया है। इसमें संदेह नहीं कि देश या प्रदेश किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है। किसी दल विशेष का नहीं है। किसी जाति और धर्म विशेष का नहीं है। सबका है। देश सुचारु ढंग से चले, इसके लिए देश का अपना संविधान है। न्यापालिका, कार्यपालिका और विधायिका है। सबके अपने दायित्व हैं। कोई किसी के कार्यक्षेत्र में दखल नहीं देता। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है लेकिन लगता है कि इन दिनों इस सुंदरता को राजनीति का ग्रहण लग गया है। लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर क्या कुछ नहीं बोल रहे हैं। इससे दुनिया भर में भारत की छवि खराब हो रही है। असहमति का अर्थ यह नहीं कि विवेक और देशहित की भावना को ताक पर रख दिया जाए। विरोध के लिए विरोध को किसी भी स्वरूप में सराहा नहीं जा सकता।

देश सेवा करने के लिए उच्च पदों पर होना ही जरूरी नहीं, सत्ता में बने रहना ही जरूरी नहीं। व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज और गांव बनता है। गांव से ब्लाॅक-तहसील, जिला और प्रदेश बनता है और जब कई प्रदेश मिलते हैं तो देश बनता है। कई देशों के मिलने से दुनिया बनती है। मतलब व्यक्ति अहम है, उतना ही जितना कि देश और दुनिया अहम है। एक व्यक्ति की गलती का खामियाजा कभी-कभी देश और दुनिया को भुगतना पड़ता है। दुर्योधन की एक गलती के चलते महाभारत जैसा विनाशकारी युद्ध हुआ था। इस बात को इस देश के राजनीतिज्ञों को बखूबी समझना चाहिए। देश का अपना भूगोल है। उसके एक भी हिस्से को अलग कर दिया जाए तो नक्शा बदल जाता है। यह बात सबको समझनी चाहिए। किसी को भी ऐसी बात नहीं करनी चाहिए जिससे उत्तर और दक्षिण का, पूरब और पश्चिम का बोध हो। क्षेत्रीयता की भावना विकसित हो। विडंबना इस बात की है कि पिछले कुछ समय से विधायिका और कार्यपालिका को अलग-अलग चश्मे से देखने का चलन आरंभ हो गया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवाद है। आपस में सहमति और असहमति हो सकती है, लेकिन संवाद का सिलसिला बना रहना चाहिए। राज्यपाल का अभिभाषण विधानमंडल के लिए सरकार का एक दस्तावेज होता है। योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा है कि सांविधानिक प्रतीकों और प्रमुखों का सम्मान चुने गए जनप्रतिनिधियों का दायित्व होना चाहिए, लेकिन इस मामले में हमलोग चूक कर जाते हैं। योगी आदित्यनाथ ने नाम लिए बिना राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्हें यूपी के लोगों ने सांसद बनाया वह केरल जाकर यूपी के लोगों की खिल्ली उड़ा रहे हैं। इसके बाद सदन में कांग्रेस ने सीएम के बयान पर हंगामा शुरू कर दिया। हमने किसी का नाम नहीं लिया, चोर की दाढ़ी में तिनका। यूपी और अमेठी के लोगों को कौन अपमानित कर रहा है। केरल सनातनी धरती है। आदिशंकराचार्य केरल में ही जन्मे थे। सीएम ने प्रियंका गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपी आएंगे तो मंदिर भी याद आने लगता है। जब सेना बॉर्डर पर दुश्मनों को जवाब देती है तो सेना को हतोत्साहित किया जाता है। उनके पास इटली जाने का समय था, अमेठी आने का नहीं। ये मानसिकता हम सबको चिंता में डालती है।

हाल ही में वायनाड के सांसद राहुल गांधी ने कहा कि पहले 15 साल तक मैं उत्तर प्रदेश की सीट से सांसद था। मुझे एक अलग तरह की राजनीति की आदत हो गई थी। मेरे लिए केरल आना बहुत नया था क्योंकि मुझे अचानक लगा कि यहां के लोग मुद्दों पर दिलचस्पी रखते हैं और न केवल सतही रूप से बल्कि मुद्दों को विस्तार से जानने वाले हैं। उनके इस बयान पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तीखा हमला करते हुए कहा कि भारत एक है, इसको रीजन में मत बांटिए। केंद्रीय मंत्री और अमेठी से सांसद स्‍मृति ईरानी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है -एहसान फरामोश! इनके बारे में तो दुनिया कहती है- थोथा चना बाजे घना। योगी आदित्यनाथ ने भी कहा है कि राहुल जी, आप इसे अपनी ओछी राजनीति की पूर्ति के लिए क्षेत्रवाद की तलवार से काटने का कुत्सित प्रयास न करें। भारत एक था, एक है, एक ही रहेगा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी कहा है कि कुछ दिनों पहले राहुल गांधी पूर्वोत्तर में थे तो पश्चिमी हिस्से के लिए जहर उगल रहे थे, आज दक्षिण में हैं तो उत्तर के लिए जहर उगल रहे हैं। फूट डालो और राजनीति से काम नहीं चलता।

इसमें संदेह नहीं कि राहुल गांधी के बयान स्वागत योग्य नहीं हैं। उनके पूर्व संसदीय क्षेत्र का अपमान करने वाले हैं लेकिन उनके विरोध में जिस तरह के शब्दों का व्यवहार हो रहा है, उसे भी उचित नहीं कहा जा सकता। विरोध करते वक्त सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों को शब्दों पर नियंत्रण रखना चाहिए। सम्मान की फसल काटनी है तो सम्मान को बोना पड़ेगा। सम्मान देकर ही सम्मान पाया जा सकता है। जबतक इस बात को सलीके से समझा न जाएगा, इसी तरह के राजनीतिक विवाद होते रहेंगे। यह समय आरोपों-प्रत्यारोपों में समय गंवाने का नहीं, अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से देश के विकास रथ को आगे ले जाने का है। कौन देश को बांटने और बेचने वाला है, इसपर समय खराब करने से बेहतर यह होगा कि यह सोचा जाए कि हम क्या कर रहे हैं और देश के लिए हमारा बेहतर योगदान क्या हो सकता है।

(लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)

Updated : 2021-02-26T13:13:50+05:30
Tags:    

Swadesh News

Swadesh Digital contributor help bring you the latest article around you


Next Story
Share it
Top