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क्या फिर प्रमुख रणनीतिकार साबित होंगे चन्द्रबाबू ?

नीतीश और नवीन को साधने में जुटे हैं, 2019 में गैरभाजपा गठबंधन के सूत्रधार बन सकते हैं।

क्या फिर प्रमुख रणनीतिकार साबित होंगे चन्द्रबाबू ?
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नई दिल्ली। बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व जनता दल, यूनाइटेड (जदयू) में गठबंधन है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों दल राज्य में अपना प्रभाव बढ़ाने का अभियान जारी रखे हुए हैं। इसके लिए दोनों दलों व इनके सहयोगी संगठनों के नेता एक दूसरे पर उसी तरह से आरोप लगा रहे हैं जैसे विरोधी दल वाले करते हैं। इस बीच जदयू प्रमुख नीतीश कुमार गठबंधन में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए अन्य तरीके भी अपना रहे हैं।

इसी रणनीति के तहत उनकी हाल ही में आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री व तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के नेता चन्द्रबाबू नायडू से भी लंबी बातचीत हुई है। इससे भाजपा सतर्क हो गई है। चन्द्र बाबू बीजू जनता दल (बीजद) के नेता व ओड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और तृणमूल कांग्रेस की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी सम्पर्क बनाए हुए हैं। तेदेपा के एक लोकसभा सांसद का कहना है कि चन्द्रबाबू ने भाजपा का साथ छोड़कर बहुत बड़ा जोखिम लिया है। इसके अलावा वह तेलंगाना में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। इस तरह से उन्होंने राज्य व केन्द्र की भावी राजनीति के मद्देनजर अपने को पूरी तरह से बदला है। वह केवल यहीं तक सीमित नहीं रहने वाले हैं। लोकसभा चुनाव के बाद के समीकरण के मद्देनजर अन्य विपक्षी दलों के नेताओं तथा भाजपा के सहयोगी दलों से भी बातचीत कर रहे हैं।

इस बारे में आन्ध्र प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रकांत का कहना है कि भावी राजनीति की चाल भांपने में माहिर चन्द्रबाबू नायडू यह सब यूं ही नहीं कर रहे हैं। उनको लगता है कि कांग्रेस अब बेहतर करती जाएगी। उनकी कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से नहीं बनती थी। लेकिन उनके पुत्र व वर्तमान अध्यक्ष राहुल गांधी से अच्छी बनती है। दोनों की घनिष्ठता अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में दोनों के लिए लाभदायी होगी। यदि चन्द्रबाबू ने कोशिश की तथा राहुल गांधी ने उनको संयोजक मान लिया तब लोकसभा चुनाव के बाद समीकरण कुछ अलग दिख सकता है।

चुनावी पंडित कह रहे हैं कि अगले लोकसभा चुनावों में अगर भाजपा की सीटें 200 से कम आईं तो चन्द्रबाबू नायडू अन्य विपक्षी दलों को एकजुट करके केन्द्र में गैरभाजपा सरकार बनवाने में धुरी बन सकते हैं। इसमें जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की भी पौ बारह हो सकती है। ऐसे में नीतीश कुमार बिहार में लगातार अपनी स्थिति ठीक बनाये रखने, और अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए हर उपक्रम कर रहे हैं। यही वजह है कि नीतीश कुमार जदयू की छात्र ईकाई को पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में भाजपा की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विरूद्ध चुनाव में उतारा है । पटना विश्वविद्यालय में जदयू की जीत से छात्रों, युवाओं में पार्टी की पकड़ और मजबूत होगी। इसी तरह से विधानसभा व संसदीय क्षेत्रों में भी दोनों दल अपने–अपने आधार बढ़ाने के लिए अन्दर–अन्दर एक – दूसरे की घेरेबंदी की कोशिश कर रहे हैं। वरिष्ठ सांसद रवि वर्मा का कहना है कि यदि अगले लोकसभा चुनाव में सपा , जदयू, तेदेपा, बीजद, टीआरएस, टीएमसी, डीएमके व कुछ अन्य दल मिलकर लगभग 75 सीटें जीत लेते हैं, तो सरकार बनाने में चन्द्रबाबू नायडू व नीतीश कुमार की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जायेगी।

Updated : 2018-12-12T21:39:26+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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