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पादरी कुरियाकोस की हत्या या साजिश?

पादरी कुरियाकोस की हत्या या साजिश?
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नई दिल्ली। केरल में नन बलात्कार मामले में बिशप फ्रेंको मुलक्कल के खिलाफ गवाही देने वाले 63 वर्षीय कैथेलिक पादरी कुरियाकोस कट्टूथारा पंजाब के होशियारपुर जिले में संदिग्ध हालत में मृत पाए गए। पादरी की मृत्यु हुई या हत्या यह जांच का विषय है। पुलिस को शक है कि पादरी की हत्या की गई। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले ही पादरी को जान से मारने की धमकी मिली थी। बिशप मुलक्कल पर वर्ष 2014 से 2016 के बीच नन से 13 बार बलात्कार का आरोप लगा है। मृतक पादरी के बड़े भाई जोस कुरियाकोस ने पुलिस के समक्ष अपने बयान में साफतौर पर कहा कि बिशप ने ही पादरी की हत्या की है। कुल मिलाकर पादरी की हत्या के बाद मामला कई कडिय़ों में विभक्त होता नजर आ रहा है। पुलिस तपतीश में जुट गई है, अलग-अलग कडिय़ां सुलझने के बाद ही पुलिस मुख्य आरोपी तक पहुंच पाएगी। कानून में एक कहावत है, अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो कोई न कोई न कोई सुराग छोड़ जाता है। ऐसे में देखना होगा कि पादरी की कथित हत्या क्या मोड़ लेती है? अगर यह मामला बिशप के विरोध में गवाही देने से जुड़ता है तो उम्मीद की जानी चाहिए कि पुलिस जल्द ही मुख्य आरेापी तक पहुंच जाएगी। सवाल यहां पादरी की हत्या को लेकर है तो उससे भी बढ़कर चिंतन व्यवस्था को लेकर है। आस्था के साथ खिलवाड़ का है, विश्वास का है, भरोसे का है। 'मी-टूÓ अभियान में महिला पत्रकारों द्वारा 20 साल पुरानी कथनी-कहनी के आधार पर ताकतवर केंद्र सरकार के मंत्री को इस्तीफा देना पड़ गया वहीं 11 बार नन का बलात्कार करने वाला आरोपी के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठ रही। न राजनीतिक दल और न ही सामाजिक कार्यकर्ता। कोई भी इस आरोपी बिशप के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत क्यों नहीं कर पा रहा? कहीं हिन्दू समाज का कोई साधू-संत होता तब देश में कितना हो-हल्ला बनता, बताने की जरूरत नहीं। दिन भर चैनल अपनी टीआरपी बढ़ा रहे होते, सामाजिक व मानवाधिकार कार्यकर्ता टीवी पर बहस का हिस्सा बन रहे होते। लेकिन, बिशप के खिलाफ कोई आवाज नहीं, सब मौन। सवाल व्यवस्था का है तो देश में कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए। नन को अब तक न्याय मिलना चाहिए। नन के बार-बार कहने-चिल्लाने के बावजूद बिशप आजाद है, अपने धार्मिक पद पर बरकरार है। पूरा समुदाय बिशप को बचाने के रास्ते खोज रहा है। क्या पादरी की हत्या भी कहीं इस बचाव के रास्ते की सोच तो नहीं? बहरहाल, यह जांच के बाद पता चलेगा लेकिन देश में जिस तरह केवल हिन्दुओं के विरोध में हो-हल्ला मचाया जाता है, वैसा किसी और धर्म के खिलाफ क्यों नहीं?

Updated : 2018-10-23T02:35:45+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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