भारत भवन में महाभारत: युद्ध से आगे जीवन-दर्शन का अंतरराष्ट्रीय मंच

भारत भवन में महाभारत: युद्ध से आगे जीवन-दर्शन का अंतरराष्ट्रीय मंच
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भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित भारत भवन लंबे समय से कला, साहित्य और संस्कृति का जीवंत केंद्र रहा है। देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित आयोजन यहाँ होते रहे हैं, लेकिन इस बार का आयोजन विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल और वीर भारत न्यास के नेतृत्व में भारत भवन में महाभारत का अंतरराष्ट्रीय मंचन हो रहा है।

इस मंचन का उद्देश्य केवल महाकाव्य का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि महाभारत के उस जीवन-दर्शन को सामने लाना है, जिसे अक्सर युद्ध की कथा तक सीमित कर दिया गया है।

‘महाभारत: युद्ध की कथा नहीं, जीवन का दर्शन’ विषय पर वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव एवं मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिकारी से विशेष बातचीत हुई।

बातचीत के खास अंश:

प्रश्न: भारत भवन में कई बार विवादास्पद विषयों के कारण कार्यक्रम रद्द होते रहे। क्या आपको भी किसी तरह का दबाव झेलना पड़ा?

उत्तर: नहीं, कोई दबाव नहीं है। महाभारत केवल युद्ध की कथा नहीं है, बल्कि जीवन का दर्शन है। इसमें संघर्ष, धर्म और मानवता का संदेश समाहित है। इसका उद्देश्य महाभारत के उन गहरे और महत्वपूर्ण संदेशों को सामने लाना है, जिसे दुनिया यह समझ सके कि हमारी परंपरा में वेद और अन्य अमूल्य ग्रंथ मौजूद हैं।

प्रश्न: इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: महाभारत का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं है। इसके संदर्भ ईरान, इराक, इंडोनेशिया, जापान, चीन, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका तक फैले हैं। यह आयोजन दुनिया को यह दिखाने का प्रयास है कि महाभारत केवल युद्ध की कथा नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और जीवन-दर्शन का अमूल्य संदेश है।

प्रश्न: क्या यह आयोजन भविष्य में एक स्थायी परंपरा का रूप लेगा?

उत्तर: निश्चित रूप से। भविष्य में महाभारत मंचन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर हर वर्ष आयोजित किया जाएगा। इसमें महाभारत के साथ-साथ अन्य पुराणों और प्राचीन ग्रंथों का भी मंचन होगा। संग्रहालय और सांस्कृतिक केंद्रों के माध्यम से इसे स्थायी रूप दिया जाएगा।

प्रश्न: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भूमिका को आप किस रूप में देखते हैं?

उत्तर: मुझे गर्व है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जैसे नेतृत्व के साथ काम करने का अवसर मिला। उनकी सोच स्पष्ट है और वे संस्कृति और मानवता के प्रति संवेदनशील हैं।

प्रश्न: राजनीति और संस्कृति के बीच संतुलन को आप कैसे देखते हैं?

उत्तर: मेरे लिए संस्कृति सर्वोपरि है। महाभारत मंचन का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज को उसके गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ना है।

प्रश्न: रामायण मंचन के बाद राम मंदिर का निर्माण हुआ। क्या महाभारत मंचन को मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से जोड़कर देखा जाना चाहिए?

उत्तर: यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक एकता का प्रतीक है। महाभारत मंचन समाज को उसकी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास है। आने वाले वर्षों में यह परंपरा और अधिक मजबूत होगी और भारत की सांस्कृतिक महिमा को विश्व पटल पर प्रस्तुत करेगी।

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