Top
Home > स्वदेश विशेष > अटल चुनौती अखिल विश्व को : स्व. माणिक चंद्र वाजपेयी

अटल चुनौती अखिल विश्व को : स्व. माणिक चंद्र वाजपेयी

स्व. माणिक चंद्र वाजपेयी जी के अनुसार अटल जी तब छरहरे बदन के निरोगी व्यक्ति थे। पैदल चलने में वो अभ्यस्त थे। वे संघ के काम से गाँव गाँव पैदल घूमे।

अटल चुनौती अखिल विश्व को : स्व. माणिक चंद्र वाजपेयी
X

अटल जी का व्यक्तित्व उनके नाम के अनुरूप ही रहा है। अटल जी के साथी स्व. माणिक चंद्र वाजपेयी जी ने स्वदेश प्रकाशन समूह द्वारा प्रकशित अमृत अटल में उनके संस्मरण का उल्लेख किया है। मणिक चंद्र वाजपेयी जी ने 1944 की एक घटना की जानकारी देते हुए लिखा कि अटल जी और मैं संघ शिक्षा वर्ग के तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त करने नागपुर गए थे नागपुर स्टेशन पर उतर कर हम दोनों ने अपना अपना सामान अपने कंधे पर रखा और रेशिमबाग संघ स्थान की ओर चार किलोमीटर का फैसला तय करने पैदल दिए । हम दोनों पैदल अपनी मस्ती में जा रहे थे तभी सामने दिखाई दिया ऊँचे ध्वज स्तम्भ पर फहराता भगवा ध्वज। अटल जी ने तुरंत ध्वज की ओर इशारा कर अपनी काव्यमयी वाणी में कहा - देखो , वो फहरा रहा है स्वर्ण गौरव भगवा ध्वज। यही है रेशिमबाग संघ स्थान जहाँ 40 दिन हमें देश भर के स्वयं सेवक बंधुओं शारीरिक प्रशिक्षण प्राप्त करना है। हम संघ कार्यालय पहुँच गए, और बताये गए स्थान पर सामान रख कर हमने ध्वज प्रणाम किया और अन्य प्रशिक्षणार्थियों में शामिल हो गए।

माणिक चंद्र वाजपेयी जी के अनुसार अटल जी तब छरहरे बदन के निरोगी व्यक्ति थे। पैदल चलने में वो अभ्यस्त थे। वे संघ के काम से गाँव गाँव पैदल घूमे। राष्ट्रधर्म , पाञ्चजन्य ,स्वदेश के संपादक के रूप में 12 -12 घंटे काम किया। ज्वर से पीड़ित होने पर भी काम किया। वे संपादक तो थे लेकिन जेब में फूटी कौड़ी भी नहीं रहती थी। रोजाना समाचार पत्र प्रकाशन के स्थान से अपने निवास तक पैदल जाने के लिए पैसे खर्च करना उन्हें गवारा नहीं था। उनके सामने उसी प्रकार का कष्टमय जीवन जी रहे उनके प्रेरणास्रोत पंडित दीनदयाल उपाध्याय और माननीय भाऊराव देवरस के सामान वरिष्ठजन थे।

नागपुर के संघ शिक्षा वर्ग में आयोजित युद्ध के कार्यक्रम के बारे में बताते हुए माणिक चंद्र वाजपेयी जी ने लिखा कि दोनों दल आमने सामने थे उसमें अटलजी जी जान से जूझे। ग्वालियर के मोतीझील मैदान में आयोजित शीत शिविर में भी निकट की पहाड़ी पर आयोजित 'आक्रमण और प्रतिरक्षा' इस सदण्ड खेल में अटल जी ने रौद्र रूप धारण किया था। उन्होंने लिखा कि अटल जी नाम से ही नहीं काम से भी अटल हैं। अडिग हैं। युवावस्था से ही अडिग रहना उनका स्वाभाव रहा है। कोई प्रलोभन ,कोई आकर्षण उन्हें पथ से विचलित नहीं कर सकता। कोई कष्ट या कठिनाई या संकट उन्हें भयभीत कर विपथगामी नहीं बना सकता।

विस्तृत संस्मरण पढ़ने के लिए देखें स्वदेश द्वारा प्रकाशित "अमृत अटल"

Updated : 2018-08-16T20:52:19+05:30
Tags:    

Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


Next Story
Share it
Top