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कालनेमि की रामधुन

कालनेमि की रामधुन

हनुमान स्वरूप राष्ट्रीय चेतना के ज्वार यह समय थोड़ी और सावधानी का है। कालनेमि की रामधुन शुरू हो गई है। आसुरी रावणी रूपी अ राष्ट्रीय शक्तियां यह समझ चुकी हैं कि शांति एवं समृद्धि की सीता को अब और अपहृत नहीं रखा जा सकता और उसका कुल के साथ विनाश सुनिश्चित है।यह देख कर देश में इन दिनों कालनेमी की रामधुन दिखाई भी दे रही है और गला फाड़ कर गाई भी जा रही है। यह धुन गा वहीं रहे हैं जिनके लिए राम अस्तित्व विहीन थे ,कल्पना थे।ये वही राष्ट्र घाती शक्तियां हैं जो कभी रामभक्त क़ार सेवको पर गोली चलाती हैं तो कभी अदम्य पुर्षार्थ और प्रेम के अमर प्रतीक राम सेतु को तोड़ने का अक्षम्य अपराध करने का भी असफल उपक्रम करती है। आज जब वह समझ रही हैं कि पराजय अब दस्तक दे रही हैं कारण राष्ट्रीय चेतना रूपी हनुमान अब संजीवनी लेने उड़ान भर चुके हैं और निष्क्रिय सज्जन शक्ति जो अज्ञान की शक्ति से मूर्छित है उसे जीवन देने की आज आवश्यकता है तो यह कालनेमि राम धुन का राग गा कर निर्णायक युद्ध में माया जाल रचा जा रहा है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत ने इसी ओर सामयिक आव्हान एवं संकेत राम मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर अयोध्या में किया है।उन्होंने कहा कि यह संघर्ष सैकड़ों मंदिरो की गिनती में एक ओर मंदिर बनाने का है ही नहीं और था भी नहीं।मंदिर तो अभियंता निर्माण समिति के निर्देशन में करेंगे ही और यह तीन साल में हों जाएगा।पर इन तीन सालों में देश को अपने मन मंदिर को अयोध्या बनाना है और यह होगा राम मय होकर। सिया राम मय सब जग जानी का अर्थ सिर्फ राम स्तुति या वंदना नहीं है।यह है सब में राम और राम में सब देखने की दृष्टि ।डॉक्टर भागवत ने एक और महत्वपर्ण बात कही कि हम अपने आत्म भान को जागृत करे और आत्म निर्भर बने। बेहद संजीदगी से देश के मनीषी ने देश के समक्ष आने वाली चुनौतियों के बीच देश वासियों के क्या राष्ट्रीय कर्तव्य है इस ओर ध्यान दिलाया है जो वास्तव में समृद्ध भारत का रोड मैप है और यह भारत का ही नहीं विश्व का है कारण विश्व स्वयं भयाक्रांत है।विकास के दोनों रास्तों पर भागते भागते आज वह ऐसे चौराहे पर हैं जिसमे एक ओर आतंक हैं तो दूसरी ओर आर्थिक असामनता तो तीसरी और एक मच्छर जिसने आज सबको हिला दिया है।दुनिया समझ चुकी है कि अब मार्ग एक ही है और वह मार्ग भारत के पास ही है।महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के शब्दों में कहें तो हां मै भारत की चिंता करता हू और मै भारत की चिंता इसलिए करता हू कि विश्व कल्याण का मार्ग यही से निकलेगा।यही बात स्वामी विवेकानंद ने कहीं थी कि मै देख रहा हूं कि विश्व गुरु के सिंहासन पर आरूढ़ भारत माता पूरी दुनिया को अभय दे रही है।

जाहिर है कि शुभ घड़ी में अब विलंब नहीं है पर इस से पहले का काल अंतिम युद्ध का है और ऐसे में अपनी पूरी ताकत के साथ मायावी प्रपंच और षडयंत्र से हम सब को सचेत रहना है और इसके लिए राम नीति भय बिनु होए न प्रीति का भी स्मरण रखना है जिसका संकेत प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी किया है और तब तक हम सब के लिए राम काजू कीजे बिना मोहि कहां विश्राम यह हमे ध्यान रखते हुए मन की अयोध्या को सज्ज करना है।

राष्ट्र मन्दिर का शिलान्यास हो चुका है और यह अगर इन अर्थो में हिन्दू राष्ट्र मंदिर का शिलान्यास है तो यह भी सही कारण भारत में राष्ट्र की आत्मा हिंदुत्व है और रहेगी,अब इस से किसी को तकलीफ है तो बनी रहे।

Updated : 10 Aug 2020 12:10 PM GMT
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Atul Tare

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