भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौताः भारतीय निर्यात को नई रफ्तार

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौताः भारतीय निर्यात को नई रफ्तार
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हाल ही में भारत ने यूरोपीय संघ के साथ साथ मुक्त व्यापार एवं पारगमन समझौतों पर हस्ताक्षर करके वैश्विक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की है। विशेषज्ञों द्वारा इस समझौते को परिवर्तनकारी एवं ऐतिहासिक बताया जा रहा है। इस समझौते से न केवल देश के बाजारों का विस्तार होगा बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। अगर यह कहा जाए कि समझौता पूरी तरह से विकसित भारत के विजन पर समर्पित है, तो इसमें अतिश्योक्ति नहीं। दो दशक पहले पूर्ववर्ती सरकारों में जहां समझौते जल्दबाजी में किए जाते थे, वहीं अब संबंधो को ठोक बजाकर तह में जाकर किए जाते है.

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का सफल समापन वास्तव में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो यूपीए युग के विपरीत है, जहां समझौते जल्दबाजी में किए गए थे और भारत ने अकसर हासिल करने की तुलना में कहीं अधिक त्याग किया था। यूरोपीय संघ के साथ व्याधार समझौता हमारी अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को मजबूत करेगा और समृद्धि को बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री मोदी के निर्णायक नेतृत्व और रणनीतिक दूरदर्शिता के मार्गदर्शन में हुए समझौते भारत के मूल हितों को प्राथमिकता देते हुए बाजारों का विस्तार करते हैं रोजगारों का सृजित करते हैं और आर्थिक विकास को गति देते हैं।

विपक्ष की तमाम आलोचनाओं की चार को कुद करके पीयूष गोयल ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को दूरदर्शी एवं मील का पत्थर बताया। गोयल ने कहा कि यह समझौता एकतरफा नहीं है, बल्कि पारस्परिक रूप से लाभकारी है जो भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देगा और व्यवसायों एवं नागरिकों के लिए व्यापक अवसर खोलेगा। यह समझौता आर्थिक संबंधों को गहरा करेगा, हमारे लोगों के लिए अवसर पैदा करेंगा और समृद्ध भविष्य के लिए भारत यूरोपिय साझेदारी को मजबूत करेगा आंकड़ों पर गौर करें तो यूरोपीय संघ के साथ यह ऐतिहासिक समझौता, जो भारत का अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है, भारत की 1.4 अरब जनता के लिए महत्वपूर्ण लाभ लेकर आएगा।

इससे हमारे किसानों और लघु उद्योगों के लिए यूरोपीय बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी, विनिर्माण क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे और हमारे सेवा क्षेत्रों के बीच सहयोग मजबूत होगा। अमेरिका इस बात को भलीभांति जानता है कि 'ग्लोबल वर्ल्ड ऑर्डर' बदल रहा है। ऐसे में भारत और यूरोप के बीच ये साझेदारी ऐतिहासिक है। भारत अगर अमेरिका का भरोसेमंद साझेदार उभरा है तो इसके पीछे उसकी बढ़ती अर्थव्यवस्था है। जहां तक भारत ईयू डील का सवाल है तो इससे दो अरब लोगों का सीधे तौर पर फायदा होगा। विश्लेषक मान रहे है कि इस समझौते की सबसे बड़ी वजह मौजूदा वैश्विक राजनीति है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप कारोबार का इस्तेमाल अन्य देशों पर दबाव बनाने के लिए एक कूटनीतिक हथियार की तरह कर रहे हैं। में है भारत और यूरोप, रूस की यूक्रेन वॉर मदद कर रहे हैं। विश्लेषकों का कहना कि अमेरिका की इसी आक्रमकता का जबाव देने के लिए यूरोपिय संघ और भारत तेजी से मुक्त व्यापार समझौते की तरफ बढ़े हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के विरोध को लेकर यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ ट्रेड वॉर तेज करने की धमकी दी और बाद में पीछे हट गए। वहीं रूसी तेल की खरीद का हवाला देकर अमेरिका भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था। कुल मिलाकर ट्रंप प्रशासन भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रखे हैं। ने ने उधर, यूरोपियन कमीशन का कहना है कि भारत यूरोपीय संघ को ऐसे टैरिफ में रियायते देगा जो उसके किसी अन्य व्यापारिक साझेदार को नहीं मिली हैं। उदाहरण के तौर पर, कारों पर टैरिफ को धीरे-धीरे 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत तक किया जाएगा, जबकि कार के पुजों पर पाँच से दस साल में शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। मशीनरी पर 44 प्रतिशत तक, रसायनों पर 22 प्रतिशत तक और दवाओं पर 11 प्रतिशत तक लगने वाले टैरिफ भी ज्यादातर समाप्त कर दिए जाएंगे। इसके अलावा, समझौते से छोटे यूरोपीय व्यवसायों को नए निर्यात अवसरों का पूरा लाभ उठाने में मदद मिलेगी।

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