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प्रदेश के खनिज मंत्री बोले - मप्र में राजनीतिक संरक्षण से फला-फूला अवैध खनन

धन और बाहुबली नहीं, बेरोजगारों को सौंपेंगे खनिज कारोबार

प्रदेश के खनिज मंत्री बोले - मप्र में राजनीतिक संरक्षण से फला-फूला अवैध खनन
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भोपाल, विनोद दुबे। मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के 15 वर्षों के शासनकाल में राजनीतिक संरक्षण के चलते मध्यप्रदेश में अवैध खनन कारोबार खूब फला-फूला। इससे प्रदेश के राजस्व का नुकसान हुआ और बेरोजगारी भी बढ़ी। हमारी सरकार में खनन कारोबार धनबलियों और बाहुबलियों को नहीं सौंपा जाएगा, बल्कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं खासकर युवाओं को रोजगार देकर एवं खनन कारोबार की संभावनाएं बढ़ाकर अधिक से अधिक राजस्व एकत्रित कर प्रदेश का विकास किया जाएगा।

यह बात मध्यप्रदेश के खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल ने गुरूवार को 'मध्य स्वदेश' से विशेष चर्चा में कही। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के वर्ष 2017-18 के वार्षिक राजस्व प्रतिवेदन में खनिज चोरी का कारण खनिज विभाग में राजस्व अमले की कमी को बताए जाने एवं कांग्रेस सरकार द्वारा इस दिशा में किए जाने वाले प्रयास संबंधी सवाल के जवाब में श्री जायसवाल ने स्वीकार किया कि मप्र में खनिज अमले की कमी है। उन्होंने कहा कि कैग के प्रतिवेदन की भी जांच कराई जाएगी तथा खनिज विभाग की कमियों और अनियमितताओं को दूर किया जाएगा। विगत वर्ष में ई-नीलामी में सफल बोलीदाताओं द्वारा अनुबंध का पालन नहीं करने तथा ऐसे ठेकेदारों को काली सूची में डाले जाने संबंधी 'कैग' के सुझाव पर प्रतिक्रिया देते हुए खनिज मंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि ई-नीलामी प्रक्रिया व्यवहारिक रूप से ठीक नहीं है। इसके कारण स्थानय और प्रदेश के लोगों को काम नहीं मिल पा रहा है। जबकि ई-नीलामी के माध्यम से धनबल और बाहुबल वाले लोग ही लाभ ले पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ठेकेदारी में ई-टेंडरिंग और ई-नीलामी प्रक्रिया को समाप्त किया जाना चाहिए अथवा नहीं, इस बात की सरकार स्तर पर समीक्षा हो रही है। खनिज अथवा रेत ठेकेदारों द्वारा निर्धारित मात्रा से कहीं अधिक खनिज अवैध रूप से निकाले जाने संबंधी सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए खनिज मंत्री ने कहा कि रेत का ठेका जिस स्थान से हुआ है, ठेकेदार वहां से रेत नहीं निकालकर अन्य स्थान से निर्धारित मात्रा से कहीं अधिक रेत निकाल रहे हैं। इसी प्रकार अन्य खानों में भी हो रहा है। इस तरह के अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए विभागों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। श्री जायसवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में पार्टी और परिवार के हिसाब से काम हुए। इससे प्रदेश को राजस्व का नुकसान हुआ और बेरोजगारी बढ़ी। इसको देखते हुए नई रेत नीति, खनिज नीति का प्रावधान कर रहे हैं। इसमें स्थानीय लोगों, युवाओं और जरूरतमंदों को काम मिलेगा। राजस्व और रोजगार बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा खदान चालू करेंगे। खनन कारोबार में स्थानीय नागरिकों खासकर युवाओं और पंचायतों की भागीदारी रहेगी। वहीं खनिज निकालने और बाजार उपलब्ध कराने के लिए बड़े कारोबारियों को शामिल किया जाएगा। खनन कारोबार में ग्रामीण क्षेत्र के कृषि से जुड़े ऐसे ग्रामीणों को भी रोजगार दिया जाएगा, जिनके पास ट्रेक्टर हैं।

'पुखराज' से तय होगी विभागों की जिम्मेदारी

मध्यप्रदेश में अवैध उत्खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए सरकार 'पुखराजÓ नाम से अभियान शुरू करने जा रही है। इसके तहत प्रदेशभर में खनिज के अलावा राजस्व, वन और पुलिस विभाग की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। खनिज मंत्री श्री जायसवाल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वन भूमि में अवैध उत्खनन होगा तो इसे रोकने की जिम्मेदारी भी वन विभाग की होगी। अवैध खनन रोकने के अन्य विभागों से सामंजस्य बनाने का प्रयास चल रहा है। राजस्व, खनिज, वन और पुलिस चारों विभागों के सामंजस्य से हर हाल में अवैध उत्खनन रोका जाएगा। इस प्रक्रिया को पुखराज नाम दिया गया है।

क्रिकेट ने दिलाई प्रसिद्धि, कमलनाथ ने बनाया राजनेता

खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल पेशे से निर्माण ठेकेदार और कृषक हैं। विद्यालय और महाविद्यालय जीवनकाल से वह क्रिकेट के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। प्रदेश स्तर पर खेलने के बाद क्रिकेट में उन्हें प्रसिद्धि मिली। इस दौरान एक सामाजिक संगठन के माध्यम से उन्होंने समाजसेवा आरंभ कर दी। श्री जायसवाल बताते हैं कि उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीतिक नहींं रही, महाविद्यालय में भी छात्रसंघ तक का चुनाव नहीं लड़ा। लेकिन एक समय परस्थतियां ऐसी बनीं कि कुछ स्थानीय राजनेताओं से मनमुटाव के चलते राजनीति में आना पड़ा। गलत लोगों को राजनीति से हटाने का संकल्प लिया और युवक कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में राजनीति का दामन थामा। जनसेवा के माध्यम से संपर्क बढ़ाया और संगठन को मजबूत जनाधार दिया तो कांग्रेस ने बालाघाट जिले के अध्यक्षपद की कमान सौंप दी। लगातार पांच साल कांग्रेस जिलाध्यक्ष रहने के बाद 1998 में कमलनाथ जी ने विधानसभा का टिकट दिलाया। विशाल बहुमत से जीत मिली तो लगातार टिकट मिलता गया और वर्ष 2013 तक विधायक रहे। पूरे पांच साल तक जनता के बीच रहकर मजबूत तैयारी की तो आखिरी समय में कांगे्रस ने टिकट काटकर मुख्यमंत्री के साले संजय मसानी को थमा दिया। संगठन की इस उपेक्षा ने व्यथित किया तो स्थानीय कार्यकर्ताओं के सुझाव पर और मसानी की पराजय के रूप में संगठन की लाज बचाने निर्दलीय चुनाव मैदान में कूंदे और विजय प्राप्त की। मुख्यमंत्री भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं ने समर्थन के लिए संपर्क किया, लेकिन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ के एक फोन पर उन्हें समर्थन देने के लिए तैयार हो गए। श्री जायसवाल का कहना है कि मध्यप्रदेश की जनता इस बार बदलाव चाहती थी, भाजपा को नहीं। इस कारण प्रदेश और विधानसभा क्षेत्र की जनता की भावनाओं का ध्यान रखते हुए उन्होंने कांग्रेस और मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ को समर्थन दिया। श्री जायसवाल कहते हैं कि कांग्रेस को समर्थन के लिए उन्होंने मंत्री बनाने जैसी कोई शर्त नहीं रखी थी। भविष्य में बालाघाट जिले में संजय मसानी को कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में स्वीकारने संबंधी सवाल पर श्री जायसवाल कहते हैं कि उनके क्षेत्र की जनता और कार्यकर्ता ऐसे व्यक्ति को कभी स्वीकार नहीं कर सकते जो सरकार रहते भाजपा का कर्मठ कार्यकर्ता रहा और तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में 15 सालों तक लाभ लेता रहा। भाजपा की सरकार रहते जिसने गोंदिया, महाराष्ट्र और बालाघाट जिले में भी रेत की खदानों को संचालित किया ऐसे व्यक्ति को कांग्रेस के कार्यकर्ता कभी स्वीकार नहीं कर सकते।

Updated : 2019-02-14T15:02:35+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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