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चुनाव नहीं, समाज को जोड़ना मेरा लक्ष्य : अनुभव चक

भेदभाव छोड़ो, भारत जोड़ो अभियान की नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय चिंतक अनुभव चक जी से विशेष बातचीत

चुनाव नहीं, समाज को जोड़ना मेरा लक्ष्य : अनुभव चक
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ग्वालियर/राजलखन सिंह। श्री अनुभव चक मूलतः कानपुर के निवासी हैं।बहुजन समाज पार्टी से एक समय चुनाव लड़ चुके श्री अनुभव आज उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय विचार के नामी चेहरे हैं।विभिन्न चैनल एवं आलेख के माध्यम से आपकी एक चिंतक की छवि भी है।उत्तर प्रदेश में सामाजिक समरसता के लिए भेदभाव भारत छोड़ो,भारत जोड़ो यात्रा से आप सुर्खियों में है।यह यात्रा 21 अक्टूबर को ग्वालियर में भी निकाली जाएगी।इसी सिलसिले में आज आप ग्वालियर आये थे।इस अवसर पर स्वदेश से आपने विशेष बातचीत की।


प्रश्न:- भेदभाव छोड़ो, भारत जोड़ो अभियान का उद्देश्य क्या है?

अनुभव चक:-सामाजिक समरसता एवं विश्व बंधुत्व का संदेश देने के लिए भेदभाव छोड़ो, भारत जोड़ो अभियान चलाया जा रहा है। इसकी शुरुआत कानपुर से 20 अगस्त को हुई और दूसरी यात्रा रानी लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि झांसी से निकाली गई और तीसरी यात्रा की शुरुआत ग्वालियर में 21 अक्टूबर को होगी। जहां सभी को बराबरी की बात कही गई थी, कुछेक लोगों के कारण पूरे समाज को कटघरे में खड़ा करना कतई उचित नहीं है। समाज विरोधी ताकतें अपने मकसद में थोड़ा बहुत सफल इसलिए हो जाती हैं कि वे सड़क पर उतरकर व सोशल मीडिया पर हल्ला-गुल्ला करते हैं। सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का प्रयास करते हैं और समरसता की सोच रखने वाले करोड़ों लोग जो घरों में रहते हैं, उनकी आवाज पता नहीं लगती। उस आवाज को बुलंद करने के लिए हम लोगों ने सड़क पर उतरने का काम शुरू कर दिया है।

प्रश्न:- यह यात्रा कहां-कहां से निकाली जा रही है और इसका समापन कब होगा?

अनुभव चक:- तीसरे चरण के बाद चौथे चरण की यात्रा वाराणसी से शुरू होगी। पांचवी यात्रा गौतम नगर और फिर लखनऊ में यह यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा के माध्यम से सामाजिक समसरता को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

प्रश्न:- 28 साल में बसपा में रहने के बाद अचानक पार्टी क्यों छोडऩी पड़ी।

अनुभव चक:- मैं जब 2004 में कानपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा था तब मैं देश का तीसरा युवा प्रत्याशी था और सुश्री मायावती ने मुझे बुलाकर टिकट दिया था। उस समय मायावती का नारा था सर्वजन हिताय, सबजन सुखाय का, इसी से प्रेरित होकर मैं पार्टी से जुड़ा। फिर देखने में आया कि मायावती और सतीशचन्द्र मिश्रा का परिवारवाद पार्टी में हावी हो गया। मिश्रा ने अपने परिवार के 22 लोगों को लालबत्ती दिलवाई। जिस विचारधारा से हम लोग जुड़े थे वह सब किनारे हो गई। जनाधार वाले लोगों को किनारे लगा दिया गया और पार्टी मिश्रा तक सीमित रह गई। मुझसे कार्यकर्ताओं की पीड़ा नहीं देखी गई तो मैने पार्टी छोड़ दी। पहली बार मायावती का घर घेरा गया। पार्टी छोड़कर बड़ा संदेश देने का काम किया।

प्रश्न:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कौन सी योजनाएं समाज को प्रेरित करती हैं?

अनुभव चक:- जब सरकारें आती हैं तो कई योजनाएं बनाती हैं। उन्हें अमलीजामा पहनाने का काम नौकरशाह करते हें। योगी सरकार ने आम जनता को माफिया और गुंडाराज से मुक्ति दिलाई है। आज मुखतार अंसारी, अतीक अहमद जैसे गुंडे व माफिया सलाखों के पीछे हैं। आज बड़े-बड़े मंचों पर माफिया नहीं दिखते। प्रदेश की जनता आज चैन-सुकून से रह सकती है।

प्रश्न:- योगी सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह माफिया के नाम पर आमजन को भी परेशान कर रही है?

अनुभव चक:- जब बड़े-बड़े माफिया पर सरकार नकेल कसती है तो इस तरह की क्षणिक धटनाएं हो जाती हैं, जिसके लिए कहीं न कहीं छोटे पुलिस अधिकारी जिम्मेदार होते हैं। यह घटनाएं निश्चित रूप से निंदनीय है। पुलिस-प्रशासन को भी इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

प्रश्न:- उत्तर प्रदेश में 2022 में भाजपा किन मुद्दों को लेकर चुनाव लडऩे जा रही है?

अनुभव चक:- आज प्रदेश माफिया और गुंडाराज से मुक्त है और जनता चैन और सुकून में है। उत्तरप्रदेश अपराधमुक्त राज्य हो गया, जो एक बड़ा उदाहरण है। मुझे याद है कि 2012 में जब अखिलेश की सरकार थी तो उन्होंने थानों में जन्माष्टमी मनाने से मना कर दिया था। लेकिन आज ऐसा नहीं है। मुख्यमंत्री आदित्य योगीनाथ सबका साथ, सबका विकास के ध्येक को लेकर काम कर रहे हैं और आगामी चुनाव में भी यह मुद्दा रहेगा।

प्रश्न:- क्या आप 2022 में विधानसभा चुनाव लड़ेंगे?

अनुभव चक:- मैं कोई चुनाव लडऩे नहीं जा रहा। मैं समाज में सामाजिक समरसता का भाव लेकर यह अभियान चला रहा

Updated : 2021-10-12T15:37:02+05:30
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स्वदेश वेब डेस्क

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