डोनाल्ड ट्रंप की दादागिरी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला पर हमले के बाद विश्व के देशों के संभावित प्रहार से बचने के लिए एक नई चाल चली गई है। हालांकि यह चाल अब नई नहीं रह गई है, क्योंकि जब से ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति बने हैं, तब से ही वे किसी न किसी फैसले को लेकर विवादों में घिरे रहे हैं। शांति का नोबेल पुरस्कार पाने की हसरत के बीच वेनेजुएला पर हमला कर ट्रंप एक तानाशाह के रूप में उभरे हैं। इस मामले को तूल पकड़ने से रोकने के लिए उन्होंने अपने तरकश से यह तीर निकाला है, ताकि उसकी गीदड़ भभकी से डरकर कोई देश विरोध न करे।
ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। यदि अमेरिकी संसद इस विधेयक को पास करती है, तो नए टैरिफ की चपेट में भारत और चीन के साथ-साथ यूरोपीय संघ के देश भी आ सकते हैं। दरअसल, बड़ा देश और बड़ा व्यापारी होने के नाते अमेरिका अक्सर अपनी कूटनीति थोपने से बाज नहीं आता।
इसी कड़ी में उसने रूस से पेट्रोलियम आयात करने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की अनुमति देने वाले नए विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिससे दुनिया में खलबली मच गई है। यह कदम सिर्फ भारत और चीन की नींद उड़ाने वाला नहीं है, बल्कि यूरोपीय संघ के लिए भी एक बड़े अलार्म के रूप में देखा जा रहा है। आमतौर पर माना जाता है कि अमेरिकी प्रतिबंधों का निशाना उसके प्रतिद्वंद्वी देश होते हैं, लेकिन यह नया विधेयक एक अलग ही कहानी बयां कर रहा है।
भले ही यूरोपीय संघ ने यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर मास्को की कड़ी निंदा की हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अब भी रूसी संसाधनों पर निर्भर है। नई कूटनीतिक चालों में निपुण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया है। वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई के बाद अब ट्रंप भारत, ब्राजील और चीन पर फिर से टैरिफ का चाबुक चलाने की तैयारी कर रहे हैं।
इस योजना के तहत 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की तैयारी की गई है। यदि ऐसा होता है, तो इन तीनों देशों को अमेरिकी निर्यात पर 500 प्रतिशत तक अतिरिक्त कर चुकाना होगा। वर्तमान में भारत पर अमेरिका 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा चुका है। अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को हरी झंडी दे दी है।
लिंडसे ग्राहम के अनुसार, रूस से कम कीमत पर कच्चा तेल खरीदकर ये देश राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन दे रहे हैं। अमेरिका ने इन देशों को दंडित करने के लिए यह विधेयक प्रस्तावित किया है। हालांकि ट्रंप ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है, लेकिन यह अभी तक अमेरिकी संसद में पारित नहीं हुआ है। इस पर अगले सप्ताह मतदान होने की संभावना है।
इस विधेयक को सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर तैयार किया है। इसमें रूस के तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य निर्यात खरीदने वाले देशों पर टैरिफ और सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है, ताकि रूस की सैन्य कार्रवाइयों के लिए वित्तीय स्रोतों को बंद किया जा सके।
दरअसल, ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान यूक्रेन-रूस युद्ध को अपने कार्यकाल के पहले ही दिन समाप्त करने का वादा किया था, लेकिन एक वर्ष गुजरने के बाद भी युद्ध जारी है। वर्तमान में उनकी सरकार शांति वार्ता के प्रयासों में जुटी है, जिसमें विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जैरेड कुश्नर प्रमुख वार्ताकार हैं। पहले यह विधेयक कांग्रेस में अटका हुआ था, क्योंकि ट्रंप कूटनीतिक प्रयासों से शांति समझौता चाहते थे, लेकिन अब उनके समर्थन से इसके जल्द पारित होने की संभावना जताई जा रही है।
