कोरियन संस्कृति के मायाजाल में फंस रहे बच्चे व युवा

कोरियन संस्कृति के प्रभाव और डिजिटल खतरे पर बहस तेज
भारत में कोरियन संस्कृति यानी हल्लयू वेव का प्रभाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। के-ड्रामा, के-पॉप, ऑनलाइन गेमिंग, फैशन, ब्यूटी और सोशल मीडिया के माध्यम से कोरियन डिजिटल कंटेंट भारतीय बच्चों और युवाओं के जीवन में गहराई से प्रवेश कर चुका है। यह प्रभाव केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं की सोच, पहनावे, खानपान, भाषा और व्यवहार तक में दिखाई देने लगा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सांस्कृतिक आकर्षण जहां एक और वैश्विक जुड़ाव और नए अनुभवों का रास्ता खोल रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके साथ मानसिक स्वास्थ्य, डिजिटल लत और सामाजिक दूरी जैसे गंभीर खतरे भी सामने आ रहे हैं। अब यह विषय राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुका है कि क्या भारतीय युवा कोरियन संस्कृति को केवल मनोरंजन के रूप में अपना रहे है या धीरे-धीरे उसके मायाजाल में फंसते जा रहे हैं।रही है, वहीं दूसरी ओर यह लत, अपराध और मानसिक संकट का रूप भी लेती जा रही है
मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल कंटेंट की लत से बच्चों और युवाओं में कई मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें प्रमुख है
- नींद न आना
- चिडचिडापन और आक्रामक व्यवहार
- पढ़ाई से दूरी
- वास्तविक दुनिया से कटाव
- कई बार बच्चे कल्पना और
- अवसाद और अकेलेपन की भावना
वास्तविकता के बीच फर्क करना भूत जाते हैं और आभासी दुनिया को ही अपनी असली दुनिया मानने लगते हैं।
सोशल मीडिया बना सांस्कृतिक पुल
रील्स, फैन एडिट्स, म्यूजिक विलप और इन्फ्लुएंसर्स के जरिए कोरियन संस्कृति भारत के घर-घर पहुंच रही है। यह बताता है कि भारत केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का सक्रिय हिस्सा बन चुका है। सोशल मीडिया पर के-ड्रामा के दृश्य, कोरियन गानों की क्लिप और फैशन ट्रेंड्स युवाओं को तेजी से आकर्षित कर रहे हैं। विशेषज्ञा मानते हैं कि यही डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों और किशोरों के लिए 'एंट्री गेट' बन रहे है, जहां से वे धीरे-धीरे पूरी एक आभासी संस्कृति में प्रवेश कर जाते हैं।
ऑनलाइन गेमिंगः मनोरंजन से मानसिक जाल तक
20 हजार करोड़ का नुकसान, 45 करोड़ भारतीय प्रभावित
कई ऑनलाइन गेम अब केवल खेल नहीं रहे, बल्कि भावनात्मक नियंत्रण और मनोवैज्ञानिक प्रभाव का साधन बनते जा रहे हैं। खासतौर पर टास्क बेस्ड और तथाकथित 'लवर गेम्स बच्चों और किशोरों से भावनात्मक रिश्ता बनाते हैं और उन्हें निर्देशों के पालन के लिए मानसिक रूप से बाध्य करते हैं। इन खेती में धीरे-धीरे खिलाड़ी को एक आभासी दुनिया में कैद कर दिया जाता है, जहां उसे अलग पहचान, नया नाम और नई सोच दी जाती है। यह स्थिति बच्चों को वास्तविक जीवन से दूर कर सही है और वे कल्पना तथा हकीकत के बीच का अंत्तर भूलने लगते हैं।
सरकारी आकलन के अनुसार, देश में लगभग 45 करोड भारतीय किसी न किसी रूप में मनी-बेरड और टास्क बेरक ऑनलाइन गेम्स से प्रभावित हो चुके हैं। इन खेलों के कारण अब तक करीब 20 हजार करोड़ रुपए का सामूहिक आर्थिक नुकसान हो चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग कर्ज में डूब गए हैं। कई परिवारों में तनाव और विवाद बढ़े हैं, जबकि कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। यह स्थिति समाज के लिए गभीर चेतावनी मानी जा रही है।
के-ड्रामा और के-पॉपका तूफान
महामारी के दौरान के-ड्रामा की दर्शक संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भावनात्मका, स्ली-बर्न और रिश्तों पर आधारित कहानियों ने भारतीय दर्शकों को बांध लिया। के-पॉप सुनने वालों की संख्या पिछले पाच वर्षों में लगभग ४०० प्रतिशत तक बढ़ी है। बीटीएस, बलैकपिक और एक्सी जैसे कोरियन पीप ग्रुप्स भारत में युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इनके बड़े फैन क्लब बन चुके है। नेटफ्लिक्स, स्पोंटिफाई और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म इस सांस्कृतिक लहर के मुख्य वाहक बन चुके हैं।
फैशन और ब्यूटी में के-एस्थेटिक का प्रभाव
इयूई मेकअप, मल्टी-लेयर रिकनकेयर और मिनिमल लुक को भारतीय युवा तेजी से अपना रहे हैं। कई लोग कोरियन प्रेरित स्किनकेयर, कपडे, स्नैक्स और म्यूजिक मर्चेंडाइज खरीद चुके हैं। स्थानीय ब्रांड भी अब इन्हीं डिजाइनों और रंगों से प्रेरणा ले रहे हैं। यह सांस्कृतिक अपनापन अब केवल देखने तक सीमित नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में उतर चुका है। युवाओं के पहनावे, मेकअप, भाषा और व्यवहार में कोरियन प्रभाव सफ दिखाई देने लगा है।
खानपान, पर्यटन और क्षेत्रीय प्रभाव
कोरियन खानपान जैसे किमची और विविम्बाप अब भारतीय शहरों में लोकप्रिय हो रहे हैं। कोरिया घूमने की इच्छा रखने वाले युवाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। पूर्वोतर भारत के मणिपुर जैसे राज्यों में कोरियन संस्कृति से जुड़ाव वर्षों पुराना है, जहां सांस्कृतिक समानताओं के कारण यह प्रभाव और भी गहरा दिखाई देता है।
ठगी, अपराध-आतंकवाद से जुड़ाव की आशंका
कुछ ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म केवल लत ही नहीं, बल्कि वित्तीय उगी और अवैध लेन देन का जरिया भी बनते जा रहे हैं। इनसे जुड़े खतरे अब इस रूप में सामने आ रहे हैं, इनमें आर्थिक धोखाधड़ी, फर्जी निवेश और सप्झ, अवैध
ट्रांजैक्शन और कुछ मामलों में आतंकी फडिंग से जुड़े नेटवर्क की भी आशंका है। इसी कारण इन प्लेटफॉर्मेंस पर सख्त निगरानी की मांग लगातार बढ़ रही है। बच्चों के मोबाइल फोन और इंटरनेट उपयोग पर नियंत्रण अब बेहद जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए कदम
- बच्चों के स्क्रीन टाइम की सीमा तय करना
- वे कौन से गेम खेल रहे है इसकी जानकारी भी जरुर रखना
- नियमित बातचीत भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखना
नियमन की मांग तेज
- सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों ने सरकार से ऑनलाइन गेमिंग पर सख्त कानून और निगरानी की मांग की है।
- मांग की जा रही है कि नाबालिगों को लक्षित गेम्स पर रोक लगे टास्क-वेस्ड और बेरड नेम्मा की नियमित जांच हो
- हर गेम पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी अनिवार्य की जाए।
- जहां एक ओर कोरियन कल्चर और डिजिटल दुनिया युवाओं को नए अनुभव, नए सपने और नई पहचान दे
