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बहन से तिलक लगवा उसकी रक्षा का लें संकल्प, इस..शुभ मुहूर्त में मनाएं भाईदूज

बहन से तिलक लगवा उसकी रक्षा का लें संकल्प, इस..शुभ मुहूर्त में मनाएं भाईदूज
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वेबडेस्क। दीपावली के दूसरे दिन भाई दूज या भाईबीज मनाया जाता है। दुनिया के पहले ग्रंथ ऋग्वेद में यम-यमी सूक्त यानि भाई बहन के इस पवित्र रिश्ते के विधान की कथा का उल्लेख है। श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय निंबाहेडा के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी ने बताया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथ से तिलक लगवाते है और बहन के यहां भोजन करते हैं उनको यम की यातना से मुक्ति मिलती है।

सूर्यपुत्र शनिदेव का जन्म ताप्ती नदी के साथ जुड़वा रूप में हुआ था, इसके अतिरिक्त अश्विनी कुमारों का जुड़वा स्वरूप भी पुत्र रूप में जन्म हुआ तथा सूर्य देव की पत्नी छाया की कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। इस दिन भाई को अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए और उन्हें उपहार देना शुभ और पुण्यदायक माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भाईदूज के दिन जब बहन अपने भाई को तिलक लगाती है तो भाई के जीवन पर आने वाले हर प्रकार के संकट का नाश हो जाता है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन भाई को बहन के घर भोजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथा-

यमुना ने एक बार अपने भाई यमराज से घर आकर भोजन करने का आग्रह किया लेकिन यमराज अपनी व्यस्तता के कारण यमुना की बात को टाल जाते थे । एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अपनी बहिन के घर जा पहुंचे। यमुना अपने द्वार पर अचानक अपने भाई यमराज को खड़ा देखकर प्रसन्नचित्त हो गई। उसने अपने भाई का स्वागत-सत्कार कर भोजन करवाया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से वर मांगने को कहा। तब बहन ने भाई से कहा कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे यहां भोजन करने आया करेंगे तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका करके भोजन खिलाए उसे आपका भय न रहे। यमराज तथास्तु कहकर यमपुरी चले गए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भाई आज के दिन यमुना में स्नान करके पूरी श्रद्धा से बहनों के आतिथ्य को स्वीकार करते हैं, उन्हें तथा उनकी बहन को यम का भय नहीं रहता। भाई बहन को यमुना में स्नान कर दीप दान करने का भी महत्व बताया गया है ।

विधि -

पहले पूजा की थाली, फल, फूल, दीपक, अक्षत, मिठाई, सुपारी इत्यादि वस्तुओं से सजा लें। इसके बाद आटे के दीपक में देसी घी डालकर दीपक जलाकर भाई की आरती करें और बताये गए शुभ मुहूर्त के अनुसार तिलक लगाएं। भाई की रक्षा, दीर्घायु व उज्जवल भविष्य की मनोकामना करें एवं चावल लगाएं तथा आरती करें। तिलक लगाने के बाद भाई का मुंह मीठा मिठाई इत्यादि खिलाकर करवाएं।

शुभ मुहूर्त-

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 6 नवंबर, 2021 शनिवार को है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल भाई को तिलक लगाने का शुभ चौघड़िया मुहूर्त सुबह 7:58 से 9:20 तक और दूसरा मुहूर्त दोपहर 1:34 से 3:10 तक स्थिर लग्न मुहूर्त में है।

Updated : 2021-11-09T14:28:30+05:30
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स्वदेश वेब डेस्क

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