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बंद बोतल से बाहर झीरमघाटी का जिन्न

भूपेश बघेल ने बस्तर के आईजी के नेतृत्व में बिठाई एसआईटी

बंद बोतल से बाहर झीरमघाटी का जिन्न

नई दिल्ली/विशेष संवाददाता। पांच साल पहले बस्तर के घने जंगलों में स्थित झीरमघाटी में एक वीभत्स हत्याकांड ने देश को दहला दिया था। बहुचर्चित इस नक्सली हमले में नक्सलियों ने अंजाम दिया था, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व मंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नन्द कुमार पटेल, उनके पुत्र कांग्रेस नेता महेन्द्र कर्मा व सुरक्षा कर्मियों सहित 29 लोंगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। कांग्रेस पार्टी शुरू से ही इस हमले को राजनीतिक साजिश होने का आरोप लगाती रही है। छत्तीसगढ़ मे कांग्रेस की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सबसे पहले झीरम घाटी नक्सली हमले की जांच के लिए बस्तर आई जी के नेतृत्व में एक दस सदस्यीय एसआईटी टीम गठित कर दी गई है। उधर, सोमवार को उच्च न्यायालय ने कांग्रेस की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को झीरमघाटी न्यायिक आयोग के समक्ष गवाही देने तलब करने की मांग की थी। हालांकि इस घटना की जांच राष्ट्रीय जांच एजेन्सी एनआईए द्वारा की जा चुकी है, जिसमें इस घटना के किसी राजनीतिक षड्यंत्र की सम्भावना से नहीं जोड़ा जा सका है। कांग्रेस हमेशा से इस घटना की जांच सीबीआई से कराने की मांग करती रही है लेकिन, अब राज्य में उसकी सरकार बनने के बाद कांग्रेस सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश न करते हुए स्थानीय पुलिस से एसआईटी बनाकर जांच कराई है।

इधर, राजनीतिक हलकों मे यह सवाल भी किया जा रहा है कि इस एसआईटी का गठन किसी राजनीतिक विद्वेश के लिहाज से तो नहीं बनाई गई? देश की एनआईए जैसी विश्वसनीय एजेन्सी की सूक्ष्म जांच के बाद भी नव गठित एसआईटी इस मामले में कौन सा नया अध्याय जोड़ेगी, यह भविष्य के गर्त में है। बहरहाल, देश इस मामले की सच्चाई जानना चाहता है। देखना है कि इस घटना का वास्तविक सच निकलकर आता है या वो सब बाहर आता है, जिसे कांग्रेस देखना चाहती है।

Updated : 8 Jan 2019 8:00 AM GMT
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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