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रिहाई के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर असर ?

रिहाई के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर असर ?
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नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के पायलट अभिनंदन को रिहा तो कर दिया। पर इस कदम के बाद दोनों देशों के रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ेंगे? अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया है। उसके पास अब ज्यादा विकल्प नही बचे हैं। पुलवामा आतंकी हमले के बाद अभिनंदन की रिहाई तक भारत ने पूरे मामले में कूटनीतिक बढ़त ले ली है। और पाकिस्तान के हाथों से तोते उड़ गए हैं। अभिनंदन की रिहाई के पीछे गहरे और कूटनीतिक अर्थ छिपे हैं। लेकिन पाकिस्तान के रवैये को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ तो भारतीय पायलट को छोड़कर वह शांति का पैगाम देता है और दूसरी तरफ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का विरोध। ऐसे विरोधाभासी रूख का क्या मतलब माना जाए?

मौजूदा परिवेश में देखा जाए तो फिलहाल रिश्ते खराब हैं। जल्द ही बातचीत का दौर शुरू होगा। व्यापारिक समर्थक देश यूएई, सउदी अरब या दूसरे अरबिया देश अब भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति को निवेश के दृष्टिकोण से देखने लगे हैं। इन देशों के लिए भारत पाकिस्तान के मुकाबले बड़ा सप्लायर देश बन गया है। वे भारत में निवेश की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस लिहाज से भारत महत्वपूर्ण बन गया है। पाकिस्तान को पहले ये देश बढ़ावा देते थे हालात अब वैसे नहीं रहे। इसका ताजा उदाहरण है अबूधावी में भारत की उपस्थिति।

आबूधावी में इस्लामिक संगठन की बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बतौर मुख्य अतिथि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपना पक्ष रख रही थीं तो पाकिस्तान इस मंच से दूरियां बनाने का निर्णय कर रहा था। पाकिस्तान की विदेश नीति में भटकाव साफ नजर आ रहा है। उसको उम्मीद नहीं थी कि सउदी अरब, अमेरिका, यूएई आदि उनके साथ खड़े नहीं होंगे। उसे यह उम्मीद जरूर थी कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद हमला होता है तो अमेरिका साथ देगा लेकिन ऐसा नही हुआ। उसका सोचा हुआ हर दांव उल्टा पड़ गया। हालांकि अमेरिका पाकिस्तान को कभी भी अकेला नहीं छोड़ेगा क्योंकि सामरिक मामले में पाकिस्तान की उसे जरूरत है।

Updated : 2 March 2019 4:53 AM GMT
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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