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...आज खुद थर्राया होगा आतंक की फैक्ट्री का सरगना अजहर!

...आज खुद थर्राया होगा आतंक की फैक्ट्री का सरगना अजहर!
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दिल्ली। पाकिस्तान की सरपरस्ती में भारत को लगातार जख़्म देने वाले आतंकी सरगना मौलाना मसूद अजहर को अभी तक ऐसी चोट नहीं पहुंची होगी जैसी आज पहुंची होगी। भारतीय वायुसेना ने मंगलवार को 'एयर स्ट्राइक' करके तकरीबन असंभव से मिशन को बड़ी सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की कमर उसी के ठिकाने पर जाकर तो इस दौरान उसके करीबी रिश्तेदार से लेकर उसके अहम सहयोगी भी मारे गए। आतंक की फैक्ट्री की तबाही के बाद उसे बखूबी अहसास हो गया होगा कि अब वह ख़ुद भी सुरक्षित नहीं है।

कौन है मौलाना मसूद अजहर

शुरुआत में मदरसे का शिक्षक रहा आतंकी सरगना मौलाना मसूद अजहर इंसानियत का लहू बहाने के लिए जाना जाता है। पाकिस्तान के बहावलपुर में 10 जुलाई 1968 को पैदा हुए मसूद अजहर ने अफगानिस्तान में आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन की सरपरस्ती में आतंक का ककहरा सीखा। वह इस आतंकी संगठन का महासचिव भी रह चुका है। अफगानिस्तान से उसने कश्मीर का रुख़ किया। 10 फरवरी 1994 को भारतीय सुरक्षा बलों ने उसे गिरफ्तार कर लिया। 24 दिसम्बर 1999 को आईसी-814 विमान का अपहरण करके उसे रिहा करवाने के लिए पटकथा लिखी गई। विमान में बंधक बने 180 यात्रियों की सुरक्षित रिहाई के लिए तत्कालीन भारत सरकार को आख़िरकार मसूद अजहर व कई आतंकियों को कंधार ले जाकर छोड़ना करना पड़ा।

रिहाई के बाद हुआ सक्रिय

तकरीबन साढ़े पांच साल से अधिक समय तक भारत में कैद में रहा मसूद अजहर रिहाई के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गया। उसने मार्च 2000 में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की। पाक अधिकृत कश्मीर को उसने अपनी आतंकी गतिविधियों का ठिकाना बनाया। महीने भर बाद ही 20 अप्रैल 2000 को इस संगठन का पहला फिदायीन हमला कश्मीर के बादामी बाग स्थित स्थानीय सेना मुख्यालय में हुआ। इसके बाद अक्टूबर 2001 में पिछले हमले की तरह ही विस्फोटकों से भरी कार फिदायीन हमलावर ने श्रीनगर में विधानसभा भवन से टकरा दी। इस हमले में 38 लोगों की जान चली गई। जैश-ए-मोहम्मद ने दोनों हमलों की जिम्मेदारी ली।

संसद भवन पर हमला

संसद भवन पर हमला कर जैश-ए-मोहम्मद ने पूरे देश को चौंका दिया। 13 दिसम्बर 2001 को जैश के पांच आतंकियों ने संसद पर हमला कर दिया। हमले में पांचों हमलावर मार गिराए गए लेकिन संसद भवन के गार्ड और दिल्ली पुलिस के जवानों सहित 9 शहीद हो गए। इन जवानों ने अपनी शहादत देकर भी हमलावरों के मंसूबों को पूरा नहीं होने दिया। हमलावरों के मदद करने वाले अफजल गुरु को फांसी की सज़ा दी गई।

अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या

मसूद अजहर ने ख़ुद को कुख्यात आतंकी संगठन के सरगना के रूप में स्थापित कराने के लिए नये-नये हमलों को अंजाम देने की तैयारी की। फरवरी 2002 में उसने कराची में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल को अगवा कर निर्मम तरीके से उसकी हत्या कर दी।

इसके साथ ही 24 सितम्बर 2002 को गुजरात के गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर पर लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने हमला कर दिया।

श्रीलंका क्रिकेट टीम पर हमला

पाकिस्तान में जिस घटना से तमाम अंतरराष्ट्रीय टीमों ने पाकिस्तान का दौरा करने से मना कर दिया, उसकी जड़ में अजहर महमूद ही है। आज तक पाकिस्तान क्रिकेट इस घटना से उबर नहीं पाया। 2009 में पाकिस्तान के दौरे पर गई श्रीलंकाई टीम की बस को जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने निशाना बनाया। संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। हालांकि टीम के सदस्यों की जान बच गई लेकिन उसके बाद से किसी भी विदेशी टीम ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया।

जैश को 2014 के बाद फिर किया सक्रिय

लंबे समय तक ख़ामोश रहा आतंकी सरगना मसूद अजहर 2014 के बाद से अचानक सक्रिय हो गया। उसने मुजफ्फराबाद में रैली को संबोधित कर भारत के खिलाफ जहर उगला। उसने अपने संगठन को फिर से पुनर्जीवित करना शुरू कर दिया। नवम्बर 2015 में लश्कर-ए-तैयबा ने आर्मी कैंप पर हमला किया। इसके बाद 2 जनवरी 2016 को पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हमला किया गया। लगभग 65 घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान सभी छह आतंकी मार गिराए गए। इनसे लोहा लेते सात जवान शहीद हो गए।

उड़ी हमला और सर्जिकल स्ट्राइक

इस आतंकी संगठन के चार आतंकियों ने 18 सितम्बर 2016 को जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर स्थित भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर फिदायीन हमला कर दिया जिसमें 18 जवान शहीद हो गए। चारों आतंकियों को मार गिराया गया। इस हमले के बाद भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत करते हुए पाकिस्तान को संदेश दे दिया कि अब और नहीं।

पुलवामा हमला और एयर स्ट्राइक

इस वर्ष 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर आतंकी हमले में 40 जवानों की शहादत से भारत के सब्र का बांध टूट गया। जैश-ए-मोहम्मद ने एकबार फिर हमले की जिम्मेदारी ली। लिहाजा, देशभर से आतंकी ठिकानों को तबाह करने की मांग उठने लगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना को हमले के लिए जगह, समय और तरीके को लेकर खुली छूट दे दी। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने आज तड़के पाकिस्तान में घुसकर जैश सहित दूसरे आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया।

पाबंदी के नाम पर पनाह

जैश-ए-मोहम्मद को भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, यूएई ने आतंकी संगठन की सूची में डाला हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान ने भी उस पर पाबंदी लगाई है। इसके बावजूद जब कभी भारत मौलाना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में वैश्विक आतंकी घोषित करने की मांग करता है, पाकिस्तान से दोस्ती निभाते हुए चीन उसे बचाता रहा है।

Updated : 26 Feb 2019 2:38 PM GMT
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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