तेल के महासागर पर खड़ा, भुखमरी से जूझता देश

तेल के महासागर पर खड़ा, भुखमरी से जूझता देश
X
अनुराग तागड़े

वेनेजुएला से भारत तक ऊर्जा, सत्ता और सभ्यता की सबसे बड़ी परीक्षा

कराकास से नई दिल्ली तक फैला वेनेजुएला संकट अब केवल एक भूभाग या सरकार की कहानी नहीं रहा। यह उस वैश्विक व्यवस्था का प्रतीक बन गया है, जहाँ तेल केवल ऊर्जा नहीं, बल्कि राजनीति का हथियार और सत्ता का सिक्का बन चुका है। जिस वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार है, वही देश आज भूख, बीमारी, पलायन और हिंसा से जूझ रहा है।

303 अरब बैरल तेल इतनी संपदा कि कई महाद्वीप वर्षों तक चल सकें फिर भी संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 80 लाख से अधिक लोग देश छोड़ने को मजबूर हुए हैं। यह आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण पलायन है। तेल के सागर पर खड़ा यह देश आज भुखमरी के दलदल में फँस गया है।

तेल ने ही बनाया और मिटाया भी

वेनेजुएला की समस्याओं की जड़ में तेल ही है। तेल की अपार आय पर टिकी सरकारों ने उद्योग, कृषि, शिक्षा और तकनीक की उपेक्षा की। जब वैश्विक तेल कीमतें गिरीं और निवेश सूखा, तो पूरी अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह गई। महंगाई हजारों प्रतिशत तक पहुँच गई। लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ हफ्तों में बेकार हो गई। दूध, दवा और भोजन दुर्लभ हो गए।

एक देश, दो हिस्से

राष्ट्रपति मादुरो पर आरोप है कि उन्होंने लोकतंत्र को कुचलकर सत्ता को बल और तंत्र के सहारे थामे रखा। विपक्ष को दबाया गया, मीडिया पर शिकंजा कसा गया और चुनावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते गए। एक ओर सड़कों पर भूखी जनता थी, दूसरी ओर सत्ता के गलियारों में सशस्त्र बल। यहीं से वेनेजुएला केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी टूटने लगा।

तेल के आंकड़े क्या कहते हैं

वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल का प्रमाणित तेल भंडार है, जो वैश्विक भंडार का लगभग 17 प्रतिशत है। लेकिन उत्पादन कभी के 35 लाख बैरल प्रतिदिन से गिरकर अब लगभग 9 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। यानी खजाना मौजूद है, लेकिन उसकी चाबी खो चुकी है। तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन को जाता है, जबकि अमेरिका को सीमित मात्रा में आपूर्ति होती है।

संकट की लपटें भारत तक

यह संकट भारत तक भी पहुंचता है। भारत अपनी 85 प्रतिशत तेल जरूरत आयात से पूरी करता है। वैश्विक बाजार में थोड़ी सी अस्थिरता भी भारत की महंगाई, परिवहन और रसोई को प्रभावित करती है। यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा, तो पेट्रोल, डीजल, गैस और रोजमर्रा की वस्तुएँ महंगी होंगी। तेल केवल ईंधन नहीं, बल्कि मुद्रास्फीति की चिंगारी है।

हालाँकि, इस उथल-पुथल में भारत के लिए अवसर भी छिपा है। वेनेजुएला में भारतीय तेल कंपनियों के लगभग एक अरब डॉलर फँसे हैं। यदि वहाँ स्थिरता आती है, तो यह निवेश वापस मिल सकता है और नए अवसर भी खुल सकते हैं। लेकिन यह तभी संभव है, जब दुनिया युद्ध नहीं, संतुलन का रास्ता चुने।

Next Story