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कांग्रेस से ऊंचा दिखा मुख्यमंत्री के साले का कद !

कांग्रेस से ऊंचा दिखा मुख्यमंत्री के साले का कद !
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विनोद दुबे /स्वदेश वेब डेस्क । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साले संजय सिंह मसानी को शायद भान भी नहीं रहा होगा कि कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय राजधानी से उन्हें इतने ऊंचे कद के साथ प्रचारित करेगी। भाजपा के अदने से कार्यकर्ता और क्षेत्रीय फिल्मों के अभिनेता संजय सिंह को कांग्रेस ने जिस अंदाज में कांग्रेस में शामिल किया। कांग्रेसी नेताओं के उस अंदाज ने मुख्यमंत्री के साले का कद सवा सौ साल से अधिक पुरानी कांग्रेस पार्टी से बड़ा दिखा डाला। चुनावी मौसम में चल रही दल-बदल की बयार में उडक़र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साले संजय सिंह मसानी शनिवार को कांग्रेसी खेमे में शामिल हो गए। संजय सिंह के कांग्रेस पार्टी में प्रवेश को पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने जिस प्रायोजित अंदाज में प्रचारित किया, वह न केवल हास्यास्पद बल्कि देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की गरिमा को गिराने वाला रहा। संजय सिंह के कांग्रेस में शामिल होने को इस तरह प्रचारित करने का प्रयास किया गया जैसे भाजपा के किसी प्रांतीय अथवा राष्ट्रीय पदाधिकारी को भाजपा से अलग कर कांग्रेस में शामिल किया गया हो। इस विषय में कांग्रेसी नेतृत्व की त्वरित प्रक्रिया भी निश्चित ही कांग्रेस को जमीन दिखाने वाली रही। कांग्रेस को यह मंथन करना चाहिए कि भाजपा का एक अदना का कार्यकर्ता, जिसके पास कोई दायित्व नहीं रहा। भाजपा और प्रदेश में उसकी योग्यता और राजनीतिक अनुभव सिर्फ मुख्यमंत्री का रिश्तेदार होना है। 15 सालों तक जिसने मुख्यमंत्री से रिश्तेदारी को प्रचारित कर अपनी जमीन तैयार की। कोई पद, न ही जनाधार,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का साला या उनकी पत्नी साधना सिंह का भाई होना ही उनकी योग्यता और वरिष्ठता रही। भाजपा के इस अदने से कार्यकर्ता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित कर कांग्रेस आखिर क्या पाया। देश या प्रदेश में यह पहली घटना है जब किसी राष्ट्रीय दल के बड़े नेता के रिश्तेदार या परिजन ने विरोधी दल का दामन थामा है। भारतीय राजनीति का इतिहास भरा पड़ा है। कांग्रेस-भाजपा सहित अन्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के कई बड़े नेता अपनी पार्टी छोडक़र विरोधी दलों में शामिल होते रहे हैं। निश्चित ही चुनावी मौसम में कांग्रेस को मनोवैज्ञानिक फायदा होता अगर भाजपा के किसी दायित्ववान पदाधिकारी, भाजपा से जुड़े किसी जनप्रतिनिधि को तोड़ पाने में वह सफल होती। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। दो दिन पहले पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू द्वारा कांगे्रस का दामन छोडक़र भाजपा में शामिल होने से अपमानित महसूस कर रही कांग्रेस ने संजय सिंह को भाजपा से बदले के रूप में प्रचारित किया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने दिल्ली में प्रेसवार्ता आयोजित की। लेकिन प्रेसवार्ता को संबोधित संजय सिंह से कराया। कांगे्रस में शामिल होने के तुरंत बाद संजय सिंह की प्रतिक्रिया सुनकर लगा जैसे कांग्रेसी नेतृत्व द्वारा पहले से तैयार पटकथा का वह अक्षरशह वाचन कर रहे हैं।

संजय सिंह ने कहा कि भाजपा द्वारा उनके जैसे कार्यकर्ता को टिकट जैसे अवसर से वंचित रखने के कारण वह कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। भाजपा पर उन्होंने वंशवाद का आरोप तो लगाया, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व राहुल गांधी और मंच पर मौजूद ज्योतिरादित्य सिंधिया के वंशवाद पर किए जाने वाले सवालों के जवाब देने का समय उन्होंने प्रेस को नहीं दिया। मंच पर मौजूद कांग्रेसी नेतृत्व को स्वयं संजय सिंह ने ही यह कहकर आईना दिखा गए कि वह मुख्यमंत्री के परिजन नहीं बल्कि रिश्तेदारों हैं और भाजपा में टिकट वंशानुगत दिए जा रहे हैं न कि रिश्तेदारों को। उनके उत्तर से लगा जैसे वह कहना चाह रहे हों कि अगर मुख्यमंत्री के रिश्तेदार होने के नाते उन्हें टिकट दिया जाता तो वह भाजपा छोडक़र कांग्रेस में शामिल नहीं होते। संजय सिंह के भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होने से हालांकि भाजपा संगठन को भलें कोई फार्क न पड़े। लेकिन कांग्रेस ने जिस महत्व के साथ संजय सिंह के कांग्रेस में प्रवेश को प्रचारित किया, उसका साफ संदेश है कि विधायक गुड्डू के भाजपा में प्रवेश से आहत कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री के साले के तोड़े जाने से मनोवैज्ञानिक संबल अवश्य मिलेगा। क्या कांग्रेस यह मान रही है कि उसके द्वारा लगाए गए व्यापम या घोटालों के आरोप कोई मुद्दा ही नहीं थे। क्योंकि व्यापम और भ्रष्टाचार के जिन गंभीर आरोपों के साथ वह विगत दो दशक से मुख्यमंत्री और उनके रिश्तेदारों को घेरती रही है। विगत दिवस इंदौर में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के मंच पर पहले मुख्यमंत्री के रिश्तेदार और व्यापम घोटाले के आरोपी गुलाब सिंह किरार को कांग्रेस में शामिल किया गया। विवाद बढऩे पर उन्हें बाहर किया गया। वहीं चुनावी लाभ के लिए कांग्रेस ने अब मुख्यमंत्री के साले संजय सिंह को कांग्रेस का सारथी बना लिया है।

Updated : 2018-11-05T01:56:47+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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