सुहागिन महिलाओं की आस्था का केंद्र सती महारानी मंदिर: जहां मन्नत पूरी होने पर होता है दुरदुरिया भोज

सुहागिन महिलाओं की आस्था का केंद्र सती महारानी मंदिर: जहां मन्नत पूरी होने पर होता है दुरदुरिया भोज
X
अमेठी का सती महारानी मंदिर सुहागिन महिलाओं की आस्था का केंद्र है। मन्नत पूरी होने पर यहां दुरदुरिया भोज की परंपरा निभाई जाती है।

स्वामीनाथ शुक्ल

अमेठी। अमेठी में स्थित सती महारानी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सुहागिन महिलाओं के लिए सुहाग की रक्षा का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि जो भी महिला सच्चे मन से यहां मन्नत मांगती है, उसकी कामना पूरी होती है। मन्नत पूरी होने के बाद महिलाएं परंपरा के अनुसार दुरदुरिया भोज कराती हैं ।गुरुवार को मंदिर परिसर में ऐसा ही दृश्य देखने को मिला जब हजारों सुहागिन महिलाएं दुरदुरिया भोज में शामिल हुईं । मंदिर में आस्था, विश्वास और परंपरा का अद्भुत संगम नजर आया ।

इतिहास से जुड़ी है आस्था

इतिहास के पन्नों में दर्ज एक घटना आज भी इस मंदिर की मान्यता को जीवित रखे हुए है साल 1842 में अमेठी रजवाड़े के राजा विशेश्वर बख्श सिंह का अल्पायु में निधन हो गया था. राजा की मृत्यु के बाद उनकी रानी ने अपने पति का शव गोद में रखकर सती होने का निर्णय लिया । कहा जाता है कि सती होने से पहले रानी ने यह वचन दिया था


अब अमेठी रजवाड़े में कोई रानी विधवा नहीं होगी

तभी से यह विश्वास चला आ रहा है कि सती महारानी का आशीर्वाद अमेठी रजवाड़े और यहां की महिलाओं पर बना हुआ है। डॉ. संजय सिंह से जुड़ा उदाहरण आज भी दिया जाता है स्थानीय लोग इस आस्था को उदाहरणों से जोड़कर देखते हैं अमेठी के मौजूदा राजा डॉ. संजय सिंह का नाम अक्सर श्रद्धालुओं की बातचीत में आता है साल 1989 के विधानसभा चुनाव के दौरान डॉ. संजय सिंह पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गई थीं. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उनकी जान बच गई इलाज लंदन तक चला, लेकिन वे पूरी तरह स्वस्थ होकर लौटे । इसके बाद वे चार बार सांसद बने। लोगों का मानना है कि यह सब सती महारानी की कृपा का ही परिणाम है ।

दुरदुरिया भोज में उमड़ी हजारों महिलाओं की भीड़

गुरुवार को घाऊघार के पूर्व प्रधान नरेंद्र तिवारी के पुत्र पिंटू तिवारी की मन्नत पूरी होने पर दुरदुरिया भोज का आयोजन किया गया भोज में हजारों सुहागिन महिलाएं शामिल हुईं। नरेंद्र तिवारी ने बताया सती महारानी से एक मन्नत मांगी थी वह पूरी हो गई, इसलिए परंपरा के अनुसार दुरदुरिया भोज कराया। भोज के बाद महिलाओं के लिए चटपटी टिक्की और गोलगप्पों की अलग से व्यवस्था की गई थी ।

सुरक्षा और व्यवस्था की खास निगरानी

इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद मंदिर परिसर में किसी तरह की अव्यवस्था नहीं दिखी महिलाओं की सुरक्षा के लिए रियासत से जुड़े जिम्मेदार लोग चप्पे-चप्पे पर तैनात रहे । बताया जाता है कि अमेठी नरेश स्वयं भी पूरे आयोजन पर नजर रखते हैं, ताकि किसी को कोई असुविधा न हो ।

Tags

Next Story