सर्वोच्च न्यायालय का सभी राज्यों को कड़ा संदेश, SIR में बर्दाश्त नहीं होगी कोई रुकावट

बंगाल में एसआईआर डेटा को अंतिम रूप देने की समय सीमा एक सप्ताह बढ़ी
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों को कड़ा संदेश दिया है कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर चिंता जताए जाने के बाद अदालत ने एसआईआर डेटा को अंतिम रूप देने की समय सीमा एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी है।
पश्चिम बंगाल में विशेष जांच रिपोर्ट (एसआईआर) को लेकर हुई सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय एसआईआर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं आने देगा। उन्होंने कहा कि जहां भी सुधार की आवश्यकता होगी, वहां आवश्यक आदेश जारी किए जाएंगे, लेकिन किसी भी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी।
सीजेआई ने टिप्पणी की कि सभी राज्यों को यह समझना चाहिए कि एसआईआर जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में सहयोग अनिवार्य है।
डीजीपी से मांगा हलफनामा
इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। न्यायालय ने डीजीपी को एसआईआर ड्यूटी में लगे अधिकारियों के खिलाफ कथित धमकियों और हिंसा के मामलों को लेकर चुनाव आयोग द्वारा दाखिल हलफनामे पर जवाब देने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
सोमवार को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में दस्तावेजों के सत्यापन और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की 14 फरवरी की समय सीमा को एक सप्ताह बढ़ाकर 21 फरवरी कर दिया।
इससे पहले की सुनवाई में निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (ईआरओ) और सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (एईआरओ) की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए थे। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 292 ईआरओ की सूची चुनाव आयोग को भेजी जा चुकी है, जबकि हजारों सहायक अधिकारी भी तैनात किए गए हैं।
चुनाव आयोग ने प्रशिक्षित और अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति पर जोर दिया था। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो अनुपयुक्त अधिकारियों को हटाकर योग्य अधिकारियों की नियुक्ति की जा सकती है।
मंत्री विजय शाह मामले की सुनवाई टली
भोपाल। ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी का उल्लेख करते हुए विवादित टिप्पणी करने के मामले में मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह की सुनवाई सोमवार, 9 फरवरी को सर्वोच्च न्यायालय में नहीं हो सकी।
विजय शाह मामले की सुनवाई का क्रम आते ही न्यायालय का समय समाप्त हो गया। अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए नई तिथि तय की जाएगी। माना जा रहा था कि शाह द्वारा माफी मांगे जाने के बाद उन्हें न्यायालय से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन चार बार माफी के बावजूद न्यायालय का रुख अब भी सख्त बना हुआ है।
