संवेदनशीलता हर माता का गुणः भैय्याजी जोशी

विश्वमांगल्य सभा का उज्जैन में प्रथम अधिवेशन प्रारंभ
उज्जैन:विश्वमांगल्य सभा का मालवा प्रांत का पहला अधिवेशन शनिवार से उज्जैन में प्रारंभ हो गया। शिप्रा तट स्थित झालरिया मठ में आयोजित दो दिवसीय आवासीय अधिवेशन में मालवा प्रांत के 10 जिलों से करीब 1200 मातृशक्तियां शामिल हुई हैं। शनिवार को उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भैय्याजी जोशी थे।
कार्यक्रम में भैय्याजी जोशी ने कहा कि संवेदनशीलता हर माता का गुण है। उन्होंने बताया कि यदि चिकित्सा की बात करें तो चिकित्सालयों में परिचारिका की भूमिका महिला की होती है। प्रकृति जानती है कि वही सही देखभाल कर सकती है। मातृ शक्ति ज्ञान और शिक्षा को बच्चों में संचारित करती है, जबकि पुरुष ज्ञान का भंडार प्रदान करता है। मां संस्कार देती है और पुरुष पुस्तकरूपी ज्ञान। इसलिए महिला जहां ऊर्जा का केंद्र है, वहीं यह प्रकृति की विशेष देन भी है। व्यवहार एक भावना है, जबकि सेवा संस्कारों की प्रतिपूर्ति है। समाज और जीवन के हर क्षेत्र में माता की भूमिका कमतर नहीं है। जो काम महिला कर सकती है, वह पुरुष नहीं कर सकता।
राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित कई लोगों का संबोधन
कार्यक्रम को विश्वमांगल्य स्वनाथ परिषद की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पायल कनोड़िया, विकास फाउंडेशन ट्रस्ट की चेयरपर्सन डॉ. मृदुला धर्मेंद्र प्रधान, और सभा के केंद्रीय परामर्शदाता प्रशांत हरतालकर ने भी संबोधित किया। मंच पर महर्षि आदित्य वल्लभाचार्य, सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रेखा खंडेलवाल, राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. वृषाली जोशी, मध्यप्रदेश की अध्यक्ष सूरज गुमानसिंह डामोर तथा उज्जैन संरक्षक संध्या फिरोजिया भी उपस्थित थीं। स्वागत भाषण विश्वमांगल्य सभा की मध्य क्षेत्र की क्षेत्र प्रचारक पूजा पाठक ने दिया।
भैय्याजी जोशी ने आगे कहा कि महिलाओं को ऐसी प्रवृत्ति नहीं अपनानी चाहिए जो उन्हें पीछे खींचती हो। जो काम बुरे हैं, उन्हें छोड़ दें; तब महिलाएं वह सब कर सकती हैं जो पुरुष करते हैं। यह दृष्टिकोण शक्ति का सशक्त प्रकटीकरण है।
