जहरीले सीरप कांड: डॉ. सोनी और अन्य को हाईकोर्ट से नहीं मिली जमानत

मृत बच्चों के परिजनों और 13 अधिवक्ताओं ने किया जमानत मांगने का विरोध
जहरीले कफ सीरप से मासूम बच्चों की मौत के मामले में विगत 6 अक्टूबर 2025 से छिंदवाड़ा जिला जेल में बंद आरोपी डॉक्टर प्रवीण सोनी को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय से भी जमानत नहीं मिल सकी है। जिला न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने के बाद प्रवीण सोनी ने उच्च न्यायालय की शरण ली थी, लेकिन यहां से भी उसे झटका लगा है। मामले की अगली सुनवाई के लिए अब 20 जनवरी की तारीख तय की गई है.
सुनवाई के दौरान आरोपी डॉक्टर प्रवीण सोनी ने दवा कंपनियों पर जिम्मेदारी डालते हुए खुद को निर्दोष बताने की कोशिश की। 10 नवंबर 2025 को उच्च न्यायालय में दायर जमानत याचिका पर गुरुवार, 15 जनवरी को न्यायाधीश प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में सुनवाई हुई।
जमानत मांगे जाने का विरोध भी दर्ज
इस मामले में जमानत मांगे जाने का विरोध भी उच्च न्यायालय में दर्ज कराया गया है। जहरीले कफ सीरप के शिकार मासूम बच्चों के परिजनों सहित 13 अधिवक्ताओं ने जमानत के खिलाफ आपत्तियां पेश की हैं। इन आपत्तियों में मामले को जनस्वास्थ्य से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील और गंभीर अपराध बताया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने इसकी अगली सुनवाई 20 जनवरी के लिए निर्धारित कर दी है।
गंदे पानी से सींची जा रही सब्जियों पर रोक
शहर के नालों से बह रहे जहरीले और गंदे पानी से सब्जियों की सिंचाई के मामले में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने 12 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायाधीश विनय सराफ की युगलपीठ में सुनवाई के बाद इस विषय पर विस्तृत आदेश शुक्रवार, 16 जनवरी को अपलोड कर दिया.विशेष रूप से, इस विषय पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने इसे आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा मानते हुए नगर निगम जबलपुर की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है।
