एपस्टीन फाइल्स पर पंडित शास्त्री का बड़ा बयान

बागेश्वर धाम से एक बार फिर सामाजिक चेतावनी की आवाज गूंजी है. कथा के दौरान पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दुनिया भर में चर्चित एपस्टीन फाइल्स का जिक्र करते हुए मानव तस्करी और बच्चों के शोषण जैसे गंभीर मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा अब सिर्फ परिवार की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी बन चुकी है।
“जितने गोरे चेहरे, उतने काले कारनामे”
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कथा में कहा कि एपस्टीन फाइल्स में दर्ज खुलासे पूरी दुनिया को झकझोरने वाले हैं। उन्होंने बिल गेट्स और डोनाल्ड ट्रंप जैसे नामों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन फाइल्स में बड़े-बड़े लोगों के ऐसे कृत्य सामने आए हैं, जिनकी कल्पना करना भी कठिन है।
उन्होंने कहा कि करीब 35 हजार पन्नों के दस्तावेजों में यह दर्ज है कि कैसे नाबालिग बच्चियों को नशे का आदी बनाकर जेफ्री एपस्टीन के निजी आइलैंड तक ले जाया गया। बाबा ने कहा, “यह केवल अपराध नहीं, मानवता पर धब्बा है।”
बेटियों को नहीं बख्शा गया
शास्त्री ने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि आरोपों के मुताबिक आठ-आठ साल की बच्चियों तक को नहीं छोड़ा गया। उन्होंने इसे सभ्यता के नाम पर चल रही दरिंदगी बताया और कहा कि आज ये सच दुनिया के सामने आ चुके हैं, इसलिए आंख मूंदकर चुप रहना अब अपराध के बराबर है।
भारत का जिक्र, दिल्ली का उदाहरण
कथा के दौरान बाबा बागेश्वर ने भारत की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि राजधानी में रोज़ाना औसतन 800 से ज्यादा लोग लापता हो रहे हैं और कई मामलों में उनका कोई सुराग तक नहीं मिलता.उन्होंने कहा कि ये आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि टूटते परिवारों और बिखरते भविष्य की कहानी कहते हैं।
शिष्य की बहन की घटना सुनाई
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कथा में अपने एक शिष्य की बहन से जुड़ी घटना भी साझा की। उन्होंने बताया कि लड़की को मॉडलिंग और टीवी में नाम कमाने का लालच दिया गया। धीरे-धीरे उसे नशे का आदी बना दिया गया और फिर एक जहाज में बंद कर दिया गया.बाबा के अनुसार, उसे दुबई भेजने के बहाने गोवा के रास्ते बेचने की तैयारी थी, लेकिन समय रहते गिरोह पकड़ा गया और लड़की को बचा लिया गया।
“समाज को जागना होगा”
कथा के अंत में बाबा बागेश्वर ने कहा कि ऐसे गिरोह समाज में छिपे रहते हैं और भोले-भाले परिवारों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे बच्चों के सपनों के साथ-साथ उनकी सुरक्षा पर भी बराबर नजर रखें.बागेश्वर धाम से उठी यह पुकार सिर्फ कथा का हिस्सा नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज करना अब आसान नहीं रहा।
