सभी का दुख दूर करना भारत का स्वभाव: डॉ. भागवत

सभी का दुख दूर करना भारत का स्वभाव: डॉ. भागवत
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श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में आयोजित ‘मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ विषय पर सरसंघचालक का बौद्धिक

इंदौर/कसरावद:सभी परमेश्वर के स्वरूप हैं, अतः उपकार नहीं, सेवा करना हमारा धर्म है। हमारे यहां चैरिटी नहीं, बल्कि सेवा की परंपरा है। जीवन में सेवा के जो भी अवसर मिलें, उनमें सेवा करनी चाहिए। सेवा से हमारी शुद्धि होती है। जिसके पास जो है, उसे वही देना चाहिए।उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने बुधवार को कसरावद के लेपा स्थित श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में आयोजित ‘मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ विषय पर व्यक्त किए।

डॉ. भागवत ने कहा कि मनुष्य देखकर ही सीखता है, केवल सुनकर या बोलकर नहीं। भारत की यात्रा में यह सत्य सिद्ध हुआ है कि सुख बाहर नहीं, बल्कि मनुष्य के अंदर ही है। भारत में मनुष्य के भीतर की खोज की यात्रा प्रारंभ हुई। अंदर की इस यात्रा से ही शाश्वत सुख प्राप्त होता है। हमारे पूर्वजों ने अनुभव के आधार पर बताया कि माया का आधार अध्यात्म होना चाहिए। ईश्वर ने मनुष्य को संवेदना प्रदान की है।

मनुष्य की संवेदना दूसरे के सुख-दुःख को समझती है। किसी की उपेक्षा करके सुख भोगना मनुष्य की संवेदना के अनुरूप नहीं है। जीवन मूल्यों की स्थापना के लिए शिक्षा और शुचिता आवश्यक है। मनुष्य को शिक्षा इसलिए चाहिए कि वह अपना दुःख दूर करने के साथ-साथ समाज और देश का दुःख भी दूर कर सके। सभी का दुःख दूर करना भारत का स्वभाव है।

भारत का अर्थ स्वभाव है

भारतीय संदर्भों में शिक्षा पर बोलते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि जन्मांतर का ज्ञान मनुष्य के मस्तिष्क में विद्यमान होता है, इसलिए जो ज्ञान भीतर है, उसे बाहर लाना चाहिए। टंट्या मामा और गाडगे महाराज जैसे महापुरुषों ने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली, फिर भी आज उनका सम्मान होता है।

हमारे भीतर दैवीय गुण निहित हैं, उन्हें बाहर निकालने का ज्ञान प्राप्त करना होगा। मनुष्य को विश्व मानवता का बोध कराने वाली, आत्मनिर्भर बनाने वाली और श्रम की प्रतिष्ठा करने वाली शिक्षा ही वास्तविक शिक्षा है। व्यक्ति की बजाय कर्म की मान्यता और परिणाम की बजाय प्रामाणिक व उत्कृष्ट कार्य करना भारत का स्वभाव है।

डॉ. भागवत ने कहा कि भारत का अर्थ केवल भूगोल नहीं, बल्कि स्वभाव है। भारत की उन्नति का मतलब जल, जंगल, नदी, पहाड़, पशु और मनुष्य सभी की उन्नति है। मंच पर भारती ताई ठाकुर, संस्था के उपाध्यक्ष महेश डाबक एवं संस्था के अध्यक्ष नीतिन करमलकर उपस्थित थे। कार्यक्रम में ‘गोष्ट-नर्मदालयाची’ ऑडियोबुक का विमोचन भी किया गया।

ऐसा धर्म जब हमने दुनिया को दिया, तब भारत बना। परतंत्रता में भी हमारा स्वाभाव नहीं बदला।

संस्थान 15 वर्षों से शिक्षा व कौशल विकास क्षेत्र में कार्य कर रहा- यह संस्थान पिछले 15 वर्षों से शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में कार्यरत है। श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 17-20 जनवरी को संपन्न हुआ, तत्पश्चात निकेतन और प्रकल्प के दर्शनार्थ पूजनीय सरसंघचालकजी का प्रवास लेपा में हो रहा है। संस्थान वनवासी क्षेत्रों के कुपोषित बच्चों को शिक्षा एवं कौशल विकास के कार्य करती है।

निमाड़ अभ्युदय विद्यालय में 800 बच्चे अध्ययनरत संस्थान वनवासी बच्चों के लिए कक्षा दसवीं तक एवं बेसिक रूरल टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा शिक्षा का प्रबंध कर रहा है। निमाड़ अभ्युदय के विद्यालयों में लगभग आठ सौ बच्चे अध्ययनरत है। अपनी नर्मदा परिक्रमा में वनवासी बच्चों का शिक्षा का संकल्प करने पर सुश्री भारती ठाकुर दीदी ने यह संस्थान प्रारंभकिया। रक्षा मंत्रालय की नौकरी छोड़ कर सुश्री भारती ठाकुर दीदी ने यह प्रकल्प प्रारंभ किया। दीदी को नागा साधु को पुनर्वास में मिला आश्रम दान में प्राप्त जहां गौशाला सहित ये प्रकल्प चल रहा है।

डॉ. भागवत ने संस्थान के परिसर का भ्रमण किया- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत बुधवार को संस्था निमाड़ अभ्युदय के प्रवास पर पधारे। संस्था परिसर में आगमन पर सर्वप्रथम उन्होंने मंदिर में दर्शन किया। इसके उपरांत उन्होंने संस्था द्वारा संचालित विविध सामाजिक, शैक्षणिक एवं सेवा गतिविधियों का विस्तारपूर्वक अवलोकन किया। इस क्रम में डॉ. मोहन भागवत ने संस्था द्वारा संचालित व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र 'विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल टेक्नोलॉजी' का भ्रमण किया। यहाँ उन्होंने ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु संचालित विभिन्न तकनीकी एवं कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी ली तथा इन प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संस्थान ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ. भागवत ने बच्चों द्वारा लगाई गई विज्ञान प्रदर्शनी में उनके द्वारा बनाए गए हुए विज्ञान के मॉडल देखे व उनके साथ चर्चा की।

यह थे उपस्थित- इस गरिमामय अवसर पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा ताई महाजन, प.पू. प्रतापे महाराज, भारती दीदी, मेवालाल पाटीदार, नितिन करमलकर, महेश दाबक, पद्मश्री महेश शर्मा, प्रांत प्रचारक राजमोहन तथा क्षेत्र प्रचारक स्वप्निल कुलकर्णी, प्रांत संघचालक डॉ. शास्त्री, प्रांत कार्यवाह विनित नवाथे, श्रीनाथ गुप्ता, राकेश भावसार, विकास दवे सहित कार्यक्रम में अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी एवं खरगोन जिलों से लगभग 300 गणमान्य अतिथि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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