ED action: फर्जी बिलों से 20.47 करोड़ के गबन पर बीईओ को नोटिस

ED action: फर्जी बिलों से 20.47 करोड़ के गबन पर बीईओ को नोटिस
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सरकारी खजाने पर हाथ साफ करने वालों पर ईडी का शिकंजा

इंदौर: सरकारी पैसों के दुरुपयोग के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सख्त रुख अपनाते हुए दो अलग-अलग प्रकरणों में कार्रवाई तेज कर दी है। एक तरफ अलीराजपुर जिले के ब्लॉक शिक्षा कार्यालय से जुड़े 20 करोड़ से ज्यादा के गबन का मामला है, तो दूसरी ओर नगरीय प्रशासन विभाग और नगर निगम से जुड़े अधिकारियों पर अवैध संपत्ति जुटाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

फर्जी बिलों से 20.47 करोड़ का गबन

ईडी, इंदौर ने पुलिस की कार्रवाई के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत केस दर्ज किया है। मामला ब्लॉक शिक्षा कार्यालय, कट्टीवाड़ा (जिला अलीराजपुर) से जुड़ा है, जहां सरकारी फंड से 20.47 करोड़ रुपये के फर्जी बिल पास कर धोखाधड़ी और गबन किया गया. इस मामले में तत्कालीन बीईओ कमल राठौर और पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायाधीश (PMLA) इंदौर की अदालत में अभियोजन शिकायत दायर की गई है। 6 जनवरी 2026 को कोर्ट ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर दिए हैं।

पुलिस एफआईआर के बाद ईडी की एंट्री

ईडी ने यह जांच पुलिस थाना कठीवाड़ा, जिला अलीराजपुर में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। इसके बाद भारतीय दंड संहिता, आईटी एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं में चार्जशीट दाखिल की गई. जांच में सामने आया कि अप्रैल 2018 से जुलाई 2023 के बीच शैक्षणिक कार्यक्रमों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटित सरकारी राशि का योजनाबद्ध तरीके से गबन किया गया। आरोप है कि कमल राठौर और अन्य आरोपियों ने करीब पांच साल में करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा किया।

छापे, जब्ती और गिरफ्तारी

पीएमएलए 2002 की धारा 17 के तहत ईडी ने तलाशी अभियान भी चलाया। इस दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए और 25 लाख रुपये फ्रीज किए गए। मुख्य आरोपी कमल राठौर को ईडी ने 7 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया था. आगे की जांच में यह भी पता चला कि घोटाले की रकम से कई अचल संपत्तियां खरीदी गईं। ईडी ने 4.3 करोड़ रुपये मूल्य की 14 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।

अनुपातहीन संपत्ति के दो और मामले

ईडी, इंदौर ने लोकायुक्त पुलिस उज्जैन द्वारा दर्ज एफआईआर और आरोप पत्र के आधार पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संभागीय उप निदेशक अशोक शर्मा के खिलाफ भी अभियोजन शिकायत दायर की है.जांच में सामने आया कि वर्ष 1998 से 2010 के बीच अशोक शर्मा ने अपने पद का दुरुपयोग कर 1.64 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की। आरोप है कि इस अवैध धन को परिवार के सदस्यों के बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और अचल संपत्तियों में निवेश कर उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई। ईडी ने इससे पहले 25 मार्च 2025 को परिजनों के नाम की 95 लाख रुपये की तीन संपत्तियां कुर्क की थीं।

नगर निगम अधिकारी पर भी कार्रवाई

इंदौर नगर निगम के तत्कालीन सहायक स्वास्थ्य अधिकारी राजेश कोठारी के खिलाफ भी ईडी ने विशेष न्यायालय में अभियोजन शिकायत दर्ज की है। यह कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस उज्जैन की एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर की गई.चार्जशीट में कोठारी और उनके परिजनों के नाम पर 2.51 करोड़ रुपये से ज्यादा की अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा हुआ था। ईडी की जांच में सामने आई 1.30 करोड़ रुपये मूल्य की दो संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है।

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