भोपाल:जहांगीराबाद स्लॉटर हाउस पर सवाल, रोहिंग्या आरोपों से लेकर गायब बालक तक उलझी कड़ियां

भोपाल:जहांगीराबाद स्लॉटर हाउस पर सवाल, रोहिंग्या आरोपों से लेकर गायब बालक तक उलझी कड़ियां
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रोहिंग्या मुसलमान होने के आरोपों को तत्कालीन डीसीपी ने दी थी क्लीन चिट
दिल्ली से लाकर जिंसी में ठहराए गए दो दर्जन से अधिक मुस्लिम परिवार

भोपाल:जहांगीराबाद स्थित स्लॉटर हाउस में काम करने वाले मजदूरों को दिल्ली से लाया गया था। इनके रोहिंग्या मुसलमान होने का दावा करते हुए पुलिस से शिकायत भी की गई थी, लेकिन तत्कालीन डीसीपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें रोहिंग्या मुसलमान मानने से इनकार कर दिया था। हालांकि, इसी महीने एक गायब हुए बालक के सामने आने के बाद अब जहांगीराबाद पुलिस बैकफुट पर नजर आ रही है।

जानकारी के अनुसार, जहांगीराबाद थाने में 5 जनवरी को एक 11 वर्षीय मुस्लिम बालक लापता हो गया था। वह दो दिन बाद विदिशा आरपीएफ के जरिए मिला, जिसके बाद उसे स्थानीय पुलिस के सुपुर्द किया गया।

कर्मचारियों की सूची नहीं सौंपी

बताया जा रहा है कि स्लॉटर हाउस में बाहर से मुस्लिम परिवारों को लाकर काम के लिए झोंका गया था। इस संबंध में पुलिस कमिश्नर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई थी। यह शिकायत अक्टूबर 2025 में प्रीत सिंह की ओर से की गई थी। जांच डीसीपी जोन-1 आशुतोष गुप्ता को सौंपी गई थी। उन्होंने करीब एक पखवाड़े में ही यह कहकर जांच बंद कर दी कि शिकायत करने वाला व्यक्ति उपलब्ध नहीं है।

जांच के दौरान बताया गया कि शिकायतकर्ता प्रीत सिंह का दिया गया पता गलत पाया गया, जिससे उन्हें शिकायतकर्ता नहीं मिल सका। इसी आधार पर यह निष्कर्ष निकाल लिया गया कि रोहिंग्या मुसलमानों को लाकर बसाने की बात निराधार है। जबकि नियमानुसार डीसीपी को जहांगीराबाद थाना पुलिस को आदेश देकर स्लॉटर हाउस का भौतिक सत्यापन कराना था।

लापता बालक ने पहले अपना नाम हिंदू बताया। शंका होने पर उसने बताया कि उसके माता-पिता सहित दो दर्जन से अधिक परिवार दिल्ली से आए हैं और स्लॉटर हाउस में मांस काटने का काम करते हैं। बालक के अनुसार वह रास्ता भटक गया था और गलती से ट्रेन में सवार हो गया। विदिशा पुलिस उसे पहले तलैया थाने लेकर पहुंची।

स्लॉटर हाउस को पीपीपी मोड पर टेका लाइव स्टॉक कंपनी को सौंपा गया था। कंपनी के चार डायरेक्टर हैं, लेकिन जहांगीराबाद थाना पुलिस ने केवल एक डायरेक्टर के खिलाफ ही कार्रवाई की है। वहीं कंपनी के लिए काम करने वाले कर्मचारियों का भौतिक सत्यापन रिपोर्ट भी कंपनी द्वारा थाना पुलिस को नहीं सौंपी गई थी।

इस लापरवाही के मुद्दे पर पुलिस अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। कंपनी को बचाने और जांच में लचर विवेचना करने के आरोपों को लेकर प्रतिक्रिया के लिए थाना प्रभारी मान सिंह चौधरी से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने न तो सरकारी और न ही निजी फोन कॉल उठाया।

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