भोपाल:नई आबकारी नीति में बड़ा बदलाव!, शराब दुकानों की संख्या पर लगेगी लिमिट

प्रदेश में अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। आए दिन अवैध शराब से जुड़े मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे में नई आबकारी नीति में अवैध शराब पर लगाम कसने के लिए जरूरी प्रावधान किए जा सकते हैं। इनमें सबसे बड़ा प्रावधान शराब दुकानों की सीमा तय करने का हो सकता है।
इसका मतलब है कि किसी भी ठेकेदार को एक निर्धारित संख्या से अधिक शराब दुकानों के लाइसेंस नहीं मिलेंगे। इससे नए लोगों को शराब व्यवसाय में उतरने का मौका मिलेगा और साथ ही अवैध शराब की बिक्री पर भी रोक लगेगी। इसके लिए आबकारी अधिनियम में संशोधन किए जाने की संभावना है।
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने हाल ही में शराब नीति को लेकर लिए गए सुझावों पर चर्चा के दौरान इसका संकेत दिया। देवड़ा के अनुसार, 1915 में बना आबकारी अधिनियम संशोधित किया जा सकता है। यह अधिनियम मादक पदार्थों के निर्माण, बिक्री, परिवहन और कब्जे को नियंत्रित करता है। इसमें धारा 54 आबकारी अधिकारियों को बिना वारंट के तलाशी लेने की शक्ति देती है। इसको और अधिक सशक्त बनाने की योजना है।
वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आबकारी अधिनियम की अव्यावहारिक धाराओं को समयानुकूल बनाने के लिए संशोधन प्रारूप तैयार किया जा रहा है। इससे अवैध शराब पर सख्ती से रोक लग सकेगी और राज्य का राजस्व भी बढ़ेगा। 1915 का यह अधिनियम प्रदेश में मादक पदार्थों के हर पहलू को नियंत्रित करने वाला पुराना कानून है, जिसमें समय-समय पर संशोधन किए जाते रहे हैं। इस बार फिर से बड़ा संशोधन होने की संभावना है।
आबादी के हिसाब से कम हैं शराब दुकानें
मध्य प्रदेश में अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए बड़ी जनसंख्या वाले राज्यों जैसे राजस्थान और उत्तर प्रदेश का उदाहरण दिया जाता है, जहां आबादी के अनुसार शराब दुकानों की संख्या अधिक है। वहीं, मध्य प्रदेश में आबादी के हिसाब से दुकानों की संख्या कम है। पिछले लंबे समय से मध्य प्रदेश में नई दुकानों की संख्या बढ़ाई नहीं गई।
नई आबकारी नीति के प्रारूप में शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने का सीधे उल्लेख नहीं है, लेकिन उपदुकान खोलने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल भी ठेकेदारों के लिए शराब दुकानों की सीमा तय की गई थी और इस बार भी उपदुकान खोलने का प्रस्ताव शामिल है।
