भोजशाला मुक्ति यज्ञः उनके पास तो 24 मस्जिदें, हमारे पास सिर्फ भोजशाला

सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्विघ्न हवन-पूजन पर अडिग हिन्दू समाज…
धार भोजशाला में वसंतोत्सव के लिए हिन्दू समाज में इस बार अलग ही एकजुट, स्वस्फूर्त और गौरवान्वित करने वाला उत्साह नजर आ रहा है। भले ही 23 जनवरी को बसंत पंचमी के साथ शुक्रवार का संयोग बैठ रहा हो, लेकिन भोजशाला मुक्ति यज्ञ से जुड़े प्रमुखजन एवं महाराजा भोज वसंत उत्सव समिति सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्विघ्न हवन-पूजन भोजशाला में करने का संकल्प दोहरा रही है।
आयोजकों का कहना है कि उनके पास (नमाजियों के) धार शहर में नमाज अदा करने के लिए 24 मस्जिदें हैं, लेकिन हिन्दुओं के पास वसंतोत्सव और वाग्देवी आराधना के लिए सिर्फ भोजशाला ही है। इसलिए इस बार भोजशाला में निर्बाध हवन-पूजन को कोई रोक नहीं सकता।
भोजशाला को लेकर धार में वर्ष 1952 से हिन्दू समाज को जाग्रत और संगठित किया जा रहा है। भोजशाला से जुड़े जानकारों का स्पष्ट मत है कि आस्था पर कानून भारी नहीं हो सकता, हालांकि कानूनी नियमों का पालन भी किया गया है। उनका कहना है कि नमाज का विरोध नहीं है, लेकिन भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्विघ्न पूजन-हवन का संकल्प पूर्ण होगा।
आयोजकों ने कहा कि जिन्हें लगता है कि भोजशाला में ही उनकी नमाज स्वीकार हो सकती है, तो उनका भी स्वागत है, लेकिन वे तिलक लगवाकर और भगवा दुपट्टा धारण कर आएं, इसमें कोई परहेज नहीं है। उनका तर्क है कि 1935-38 में भोजशाला को लेकर जब मुस्लिमों ने विवाद किया था, तब धार के राजा बख्तावरसिंह ने 1942 में बख्तावर मार्ग पर सहमति से मस्जिद प्रदान की थी। तब से वहीं नमाज होती रही है।
आरोप लगाया गया कि 1980 में जब कमेटी सदर निसार अहमद नगर पालिका अध्यक्ष बने, तब मुस्लिम समाज को फिर भोजशाला की ओर मोड़ने का प्रयास किया गया। भोजशाला को बंधनों से मुक्त करने और उसके गौरव की पुनर्स्थापना के लिए 1952 से भोजशाला मुक्ति पथ के तहत सतत सत्याग्रह और संघर्ष चल रहा है।
इस वर्ष वसंतोत्सव को लेकर धार नगर के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में भी व्यापक जनसंपर्क किया गया है। वसंत पंचमी और शुक्रवार के संयोग को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा और कानून व्यवस्था के मद्देनजर व्यापक तैयारियां की हैं। सप्ताहभर से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। बुधवार को निकली मातृशक्ति कलश यात्रा में नारी शक्ति की अपार उपस्थिति ने भोजशाला मुक्ति के संकल्प को और अधिक दृढ़ता प्रदान की।
10 वर्ष में 1 शुक्रवार कुर्बान क्यों नहीं…?
वसंत पंचमी और शुक्रवार के संयोग तथा भोजशाला में संभावित टकराव को लेकर एक वरिष्ठजन का कहना है कि हिन्दू-मुस्लिम सौहार्द की बात केवल भाषणों तक क्यों सीमित रहती है। हर बार सौहार्द और शांति के नाम पर हिन्दू समाज से ही त्याग की अपेक्षा क्यों की जाती है।
उन्होंने कहा कि भोजशाला में मुस्लिम समाज प्रत्येक शुक्रवार नमाज अदा करता है और हिन्दू समाज इसका विरोध नहीं करता। वर्ष में 48 से 52 शुक्रवार नमाज के लिए दिए जाते हैं। वर्ष 2016 के बाद अब 2026 में फिर वसंत पंचमी और शुक्रवार का संयोग आया है। दस वर्षों में लगभग 520 शुक्रवार होते हैं, तो क्या मुस्लिम समाज वर्ष में एक या दस वर्षों में एक शुक्रवार हिन्दुओं के लिए छोड़कर राष्ट्रीय सौहार्द की मिसाल पेश नहीं कर सकता।
उनका प्रश्न है कि जब मुस्लिम समाज स्वयं को भारतीय नागरिक मानता है और संविधान के पालन की बात करता है, तब क्या भोजशाला जैसे मामलों में पहल की जिम्मेदारी उनकी नहीं बनती। क्या राजाभोज की नगरी धार में ऐसा कोई मुस्लिम नागरिक नहीं है जो खुले तौर पर कह सके कि हिन्दुओं की आस्था-अस्मिता के लिए दस वर्ष में एक शुक्रवार की कुर्बानी स्वीकार है।
कलश यात्रा ने बनाया इतिहास
वसंतोत्सव के लिए मातृशक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। भोज उत्सव समिति के आह्वान पर बुधवार को धार में मातृशक्ति संकल्प अक्षत कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। लालबाग, उदाजी राव चौराहा सहित नगर के प्रमुख मार्गों से निकली यात्रा ने ऐतिहासिक दृश्य प्रस्तुत किया।
पूरे मार्ग में भगवा झंडे और बैनर लगे रहे। मां वाग्देवी और श्रीराम के जयकारों से धार नगरी गूंज उठी। भोजशाला मां वाग्देवी सरस्वती मंदिर तक यात्रा का 35 से अधिक मंचों से स्वागत किया गया। केसरिया साफा बांधे, हाथों में भगवा पताकाएं लिए हजारों महिलाएं अखंड पूजन के संकल्प के नारे लगाती नजर आईं।
मैं स्वयं हवन कुंड पर सपत्नीक बैठूंगा…
भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि नमाजियों के पास विकल्प हैं। धार नगर में 24 से अधिक छोटी-बड़ी मस्जिदें हैं। बख्तावर मार्ग की रहमत मस्जिद भी भोजशाला के विकल्प के रूप में ही दी गई थी। हमारे पास वाग्देवी आराधना के लिए केवल भोजशाला है।
उन्होंने कहा कि इस बार भोजशाला में वसंतोत्सव को कोई रोक नहीं सकता। कोर्ट क्या व्यवस्था देगा, इससे हमारा कोई वास्ता नहीं है। हम सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्विघ्न हवन-पूजन के संकल्प पर अडिग हैं। मैं स्वयं सपत्नीक हवन कुंड पर बैठूंगा।
सच्चाई अब उन्हें समझना है, हमें नहीं…
भोजशाला सत्याग्रह के वरिष्ठ नेतृत्वकर्ता अशोक जैन का कहना है कि वसंत पंचमी पर अखंड पूजन को कोई नहीं रोक सकता। एएसआई की व्यवस्था में कहीं नहीं लिखा है कि पूजन-हवन के बीच नमाज कराई जाए। वैसे भी हवन-पूजन निश्चित स्थान पर होता है, जबकि नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि यह सभी जानते हैं कि भोजशाला राजा भोज ने बनवाई थी। उसका प्रत्येक स्तंभ इसकी गवाही देता है। अब मामला कमाल मौलाना परिसर के नीचे शिव मंदिर और अक्कलकुई में शिवलिंग की दावेदारी तक पहुंच गया है। धार ने बड़े-छोटे भाई का तकिया कलाम बहुत सहन कर लिया है। अब सच्चाई समझने की जिम्मेदारी नमाजियों की है, हिन्दुओं की नहीं।
प्रशासन ने तीन जगह लगाए शामियाने
भोजशाला मामले के दशकों से प्रत्यक्षदर्शी वरिष्ठ पत्रकार अशोक मित्तल का कहना है कि इस बार अखंड पूजा होना तय है। कोर्ट का आदेश आए या न आए, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, हालांकि उम्मीद है कि फैसला हिन्दुओं के पक्ष में आएगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के पास मोहल्ला मस्जिदें और रहमत मस्जिद का विकल्प मौजूद है।
उन्होंने बताया कि प्रशासन ने भोजशाला की छत पर तीन स्थानों पर शामियाने लगाए हैं एक कमाल मौलाना परिसर की ओर, दूसरा भोजशाला गर्भगृह पर और तीसरा भोजशाला चढ़ाव की ओर। इससे लगता है कि प्रशासन अपनी औपचारिक तैयारी कर चुका है।
दिनभर पूजन की मांग, आज सुप्रीम सुनवाई
भोजशाला में वसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड हवन-पूजन और सरस्वती पूजा की अनुमति के लिए हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर याचिका पर गुरुवार 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
