भोजशाला मुक्ति यज्ञ: कड़ी सुरक्षा में फिर ‘तलवार की धार’ पर 23 जनवरी

भोजशाला को बंधनों से मुक्त करवाने और उसके गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए हजारों वर्षों से चले आ रहे सतत संघर्ष का सुफल सनातन हिन्दू समाज को कब गौरवान्वित करेगा, यह तो आने वाला समय ही निर्धारित करेगा। लेकिन भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि भोजशाला को लेकर उसके वर्तमान संरक्षक कहें या मालिक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ही भ्रम के तिहरे भंवर से उभरने का मानस नहीं बना पा रहा है। जब तक एएसआई इस भ्रम के भंवर से मुक्त नहीं होगा, तब तक भोजशाला मुक्ति यज्ञ में सतत संघर्ष की आहुतियां साक्ष्यों के साथ डाली जाती रहेंगी।
क्योंकि 23 जनवरी को एक बार फिर भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्विघ्न हवन-पूजन का संकल्प हिन्दू समाज दोहरा रहा है।
भोजशाला मुक्ति यज्ञ की सिंह गर्जना
भोजशाला में वसंतोत्सव से पूर्व मंगलवार को 40 वर्षों से चल रहा परंपरागत सत्याग्रह होगा, जो प्रातः 8.55 बजे से 9.25 बजे तक चलेगा। इसके बाद दर्शन का सिलसिला रहेगा। युवाओं की वाहन रैली, समाजजनों के ज्ञापन, नौनिहालों की बाल मनुहार के बाद बुधवार को मातृशक्ति की कलश यात्रा और 22 जनवरी को संतों का नगर भ्रमण, हिन्दू समाज को भोजशाला में निर्विघ्न हवन-पूजन के लिए आश्वस्त करते हुए संकल्पित करेगा।
- गोपाल शर्मा, संयोजक, भोजशाला मुक्ति यज्ञ, धार
यह सिंह गर्जना न केवल धार, बल्कि संपूर्ण प्रदेश और देश में सुनाई दे रही है। आगामी 23 जनवरी 2026 को भोजशाला में समग्र हिन्दू समाज निर्विघ्न हवन-पूजन के लिए प्रतिबद्ध है। एक ओर ‘बाल मनुहार रैली’ के साथ-साथ आसपास के शहरी और ग्रामीण अंचलों में पिछले एक माह से जनजागरण चल रहा है, तो दूसरी ओर पुलिस-प्रशासन चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के साथ धार को एक बार फिर ‘तलवार की धार’ पर चलाने की रणनीति बनाता नजर आ रहा है।
क्योंकि 2006, 2013, 2016 और अब 2026 में चौथी बार स्थिति यह बन रही है कि वसंत पंचमी के दिन शुक्रवार भी पड़ रहा है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन के माथे पर तनाव की सलवटें दिखना स्वाभाविक है। निर्विघ्न हवन-पूजन के बीच जुमे की नमाज की रस्मअदायगी आसान नहीं है।
एएसआई का वर्षों पुराना फैसला भ्रमित करने वाला है। इसी कारण हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया गया है कि भोजशाला में वसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्विघ्न हवन-पूजन का स्पष्ट आदेश दिया जाए। यानी 23 जनवरी को भोजशाला में हवन-पूजन के अलावा कुछ भी नहीं होना चाहिए।
कोर्ट क्या फैसला देगा इससे महत्वपूर्ण यह है कि जब एएसआई के सर्वे में ही भोजशाला हिन्दू मंदिर एवं धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र है, इसकी 2170 पृष्ठों की रिपोर्ट पुष्टि कर रही है, 1700 से अधिक साक्ष्य सर्वे में मिले हैं, 9 सदस्यीय टीम को 98 दिन के सर्वे में 98 से अधिक मूर्तियां मिली हैं, इसके बाद भोजशाला में मंगलवार या वसंत पंचमी से इतर 365 दिन अर्थात वर्षभर और 24 घंटे हिन्दुओं को हवन-पूजन की अनुमति क्यों नहीं? इस भ्रम को एएसआई स्वयं दूर करे, यही तो भोजशाला से जुड़ी जांच, शोध, सर्वे और सैकड़ों वर्ष के संघर्ष की पुकार है।
फिल्म सेट नहीं है भोजशाला
भोजशाला कोई फिल्म स्टूडियो का सेट नहीं है, जहां हिन्दू-मुस्लिम और पर्यटकों को संतुष्ट करने की राह खोजी जाए। जब भोजशाला में वसंत पंचमी पर हवन-पूजन की अनुमति है, तो यह वर्षभर क्यों नहीं हो सकती? एएसआई को अब यह तय कर लेना चाहिए कि भोजशाला उसके लिए मंदिर है, मस्जिद है या पर्यटन स्थल, क्योंकि भोजशाला उसी के अधीन है।
हिन्दू समाज इस बार निर्विघ्न पूजा पर अडिग है, और यही होगा।
- आशीष गोयल, याचिकाकर्ता, भोजशाला, धार
